मंथरा कौन थी मंथरा की कहानी

मंथरा कौन थी मंथरा की कहानी who was monthara story of monthara 

हैलो दोस्तों इस लेख मंथरा कौन थी मंथरा की कहानियाँ (Manthara who was Manthara's Stories) में आपका बहुत बहुत स्वागत है।

इस लेख में आप मंथरा कौन थी? मंथरा पूर्वजन्म में कौन थी? आदि आश्चयर्जनक तथ्यों के बारे में जान पाएंगे। तो आइये दोस्तों पढ़ते है, यह लेख मंथरा कौन थी मंथरा की कहानी:-

रावण के पिता कौन थे

मंथरा कौन थी मंथरा की कहानी

मंथरा कौन थी who was monthra

रामायण में मंथरा के विषय में बताया गया है, कि मंथरा महाराज दशरथ कि तीसरी महारानी केकैयी की दासी थी। श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास दिलाने में मंथरा की प्रमुख भूमिका रही उसी के कारण श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास भोगना पड़ा था।

अयोध्या में महारानी केकैयी के साथ उसकी दासी मंथरा भी उसके साथ ही रहती थी। मंथरा और केकैयी का संबंध इतना अट्टू इतना प्रबल था, कि वे दोनों एक दूसरे के बहुत ही करीब और हर एक बात एक दूसरे को

बताती थी और एक दूसरे की बात को मानती भी थी। इसलिए मंथरा के कहने पर केकैयी ने महाराजा दशरथ से उनके दिए गए वचनों में उलझा कर भगवान श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास और

भरत के लिए राजपाट मांगा था। तो आइए जानते हैं, कि आखिर में मंथरा कौन थी जिस की बातों में आकर महारानी केकैयी ने इतना बड़ा कदम उठा लिया कि उन्हें स्वयं अपने पुत्र और महाराज दशरथ के

साथ-साथ सारे अयोध्या नगरी और देशवासियों के द्वारा अपमानित होना पड़ा। वास्तव में मंथरा और केकैयी दोनों ही केकय देश की राजकुमारी थी। केकय देश के सम्राट थे अश्वपति उनकी पुत्री का नाम था

केकैयी जबकि सम्राट अश्वपति के एक भाई थे जिनका नाम था बृहद्रथ और उनकी एक पुत्री थी जिसका नाम था "रेखा" रेखा बड़े-बड़े नैनो वाली स्त्री थी जो बाद में मंथरा के नाम से विख्यात हुई।

राजकुमारी रेखा को एक विचित्र प्रकार की बीमारी थी कि उसे अचानक इतना पसीना आता था कि वह पसीने से भीग जाती थी और प्यास लगने लगती थी, जिसके चलते एक दिन उसने इलायची, मिश्री और चंदन

से बना हुआ शरबत पी लिया इसके फलस्वरूप उसकी तबीयत खराब होने लगी और वह बीमार हो गई तत्पश्चात देश के कई वैद्यों को बुलाया गया और उस राजकन्या का उपचार करवाया गया

जिससे राजकन्या रेखा की जान तो बच गई लेकिन उसकी रीढ़ की हड्डी हमेशा के लिए टेड़ी होकर रह गई और वह कुबड़ी औरत बन गई इसलिए उसके शरीर के कारण ही वह अविवाहित रही

और जब केकैयी की शादी महाराजा दशरथ के साथ हुई तो वह केकैयी की अच्छी सहेली और बहन होने के नाते अयोध्या में आकर रहने लगी तथा केकैयी की अंगरिक्षका बन गई।

पूर्वजन्म में मंथरा कौन थी who was the mantra in the previous birth

पौराणिक धर्म ग्रंथों के आधार पर बताया जाता है कि जो मंथरा रामायणकाल में राम को बनवास देने के लिए उत्तरदाई थी वास्तव में मंथरा कौन थी, इस मंथरा की क्या कहानी है यह जानना आपके लिए जरूरी है

कि मंथरा कौन थी दासी थी या राजकुमारी या फिर कोई और लोमस ऋषि के द्वारा बताया गया कि मंथरा भक्त प्रहलाद के पुत्र विरोचन की पुत्री थी। जब एक बार विरोभक्तचन और देवताओं के बीच में युद्ध हुआ था तो विरोचन ने देवताओं पर विजय प्राप्त की थी।

किंतु कुछ ही समय पश्चात देवताओं ने एक षड्यंत्र रचा तथा ब्राह्मण स्वरूप धरकर विरोचन से भिक्षा में उसकी आयु ही मांग ली इस प्रकार विरोचन की मृत्यु के पश्चात सभी दैत्य यहाँ-वहाँ भाग रहे थे

और उनका कोई सरदार भी नहीं था। ऐसे समय में मंथरा ने दैत्यों का नेतृत्व किया और देवताओं पर फिर से विजय प्राप्त की तथा देवता भी दैत्यों के डर से इधर-उधर भागने लगे तथा भगवान विष्णु के पास पहुंचे

तब भगवान विष्णु ने देवराज इंद्र को मंथरा पर आक्रमण की आज्ञा दी तो देवराज इंद्र के बज्र के प्रहार से मंथरा पृथ्वी पर जाकर गिरी और उसकी मृत्यु हो गयी।

भगवान विष्णु से बदला लेने के लिए लिया पुनर्जन्म Reincarnated to take revenge on Lord Vishnu

इंद्र के वज्र के प्रहार से भक्त पहलाद के पुत्र विरोचन की पुत्री मंथरा की मृत्यु तो हो गयी, किंतु मंथरा ने भगवान विष्णु से बदला लेने की ठान ली क्योंकि वह सोचती रही कि उसका जो हाल है

कि उसके अपनों ने भी उसे त्याग दिया इसके लिए उत्तरदाई केवल भगवान विष्णु ही है, और वह भगवान विष्णु से बदला लेने के बारे में सोचती रही बदले की भावना से उसने रामायण काल में

मंथरा का जन्म लिया था, और भगवान राम के जीवन को तहस-नहस कर दिया लोमश ऋषि के द्वारा बताया जाता है कि जो कुबड़ी मंथरा थी वह श्री कृष्ण के काल में कुब्जा के नाम से ही जानी जाती थी।

मंथरा के पति कौन थे who was manthara's husband

वाल्मीकि रामायण में वर्णन किया गया है, कि मंथरा वास्तव में एक गंधर्व कन्या थी किंतु इस बात की पुष्टि नहीं थी कि वह कहाँ से आई है और उसके पति कौन थे? अन्य धर्म ग्रंथों के अनुसार बताया जाता है

कि गंधर्वी ने मंथरा के रूप में केकैयी देश में जन्म लिया इनके पिता का नाम वृहदृथ जो केकय देश के सम्राट अश्वपति के भाई थे, किंतु रामायण काल में भी अपने कुबड़े रूप के कारण मंथरा अविवाहित ही रही।

गंधर्वी का अवतार थी मंथरा Manthara was the avatar of Gandharvi

पौराणिक धर्म ग्रंथों के आधार पर बताया गया है कि, जब पृथ्वी लोक पर अनाचार, अधर्म, अनीति का सम्राट फैला हुआ था तथा चारों तरफ राक्षसों के घोर अत्याचार के कारण ऋषि-मुनियों तथा

आम लोगों का जीना मुश्किल हो गया था। उस समय सभी देवी देवता ब्रह्मा जी के पास पहुंचे और उन्होंने इसे स्थिति के बारे में ब्रह्मा जी को अवगत कराया तब ब्रह्मा जी ने कहा कि तुम सभी देवी देवता

जाकर पृथ्वी पर वानर भालू आदि का रूप धारण करो और भगवान विष्णु श्री राम रूप में जन्म लेंगे। इसलिए जाकर राक्षसों के संघार में आप सभी उनकी सहायता करो ऐसा सुनकर देवताओं

ने गंधर्वी से प्रार्थना की कि तुम धरती लोक पर जाकर मंथरा के रूप में जन्म लो और भगवान श्री राम को 14 वर्ष वनवास अपनी भूमिका अदा करो जिससे

राक्षसों का संघार हो सके इस प्रकार मंथरा एक गंधर्व कन्या थी तथा जिस की मुख्य भूमिका श्री राम को वनवास देना तथा राक्षसों का संहार करवाना था।

दोस्तों आपने इस लेख में मंथरा कौन थी, मंथरा की कहानियॉं पड़ी आशा करता हुँ की आपको लेख अच्छा लगा होगा इसे शेयर अवश्य करें।

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