सिंधु घाटी सभ्यता पर निबंध | sindhu ghati sabhyata in hindi

सिंधु घाटी सभ्यता पर निबंध Essay on sindhu sabhyata in hindi 

हैलो दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है, इस लेख सिंधु घाटी सभ्यता पर निबंध (Essay on Sindhu Ghati sabhyata in hindi) में। दोस्तों इस लेख में आप सिंधु घाटी की सभ्यता के विषय में सभी जानकारी प्राप्त करेंगे।

क़्योकी इस सिंधु घाटी की सभ्यता निबंध में हमने सिंधु घाटी के लोगों की जीवन शैली सामाजिक जीवन आर्थिक जीवन तथा धार्मिक जीवन के साथ साथ कई अन्य महत्वपूर्ण बातों पर प्रकाश डाला है तो दोस्तों बने रहिये सिंधु घाटी की सभ्यता पर निबंध में:-

सिंधु नदी पर निबंध जानकारी

सिंधु घाटी सभ्यता पर निबंध

सिंधु सभ्यता पर निबंध - मनुष्य का प्रादुर्भाव कई लाख वर्ष पूर्व हुआ था और इसके पश्चात विभिन्न प्रकार की सभ्यताएँ भी विकसित हुई जैसे- मोसोपोटामियाँ की सभ्यता फारस की सभ्यता चीन की सभ्यता और इन्ही सभ्यताओं में से एक सभ्यता है

सिंधु घाटी की सभ्यता जिसे हड़प्पा सभ्यता के नाम से भी जाना जाता है। सिंधु घाटी सभ्यता का पता उस समय चला जब 1921 में दयाराम साहनी ने हड़प्पा स्थल की खुदाई करवाई 

तथा एक बहुत बड़े नगर के ढांचे का अवशेष प्राप्त हुआ जबकि 1922-23 ईसवी में राखलदास बनर्जी ने मोहनजोदड़ो नामक स्थल की खुदाई की

और सिंधु सभ्यता के कई स्थानों की खोज हुई तथा इससे संबंधित कई प्रकार के अवशेष प्राप्त हुये 

सिंधु घाटी की सभ्यता का क्षेत्र भी बहुत विकसित और विशाल था जो लगभग 13 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ था। सिंधु घाटी की सभ्यता उत्तर में कश्मीर के मांडू तक तथा दक्षिण में दैमाबाद तक फैली हुई थी

जबकि पश्चिम में बलूचिस्तान और पूर्व में उत्तर प्रदेश के आलमगीर तक विकसित थी।

सामाजिक जीवन social life 

सिंधु सभ्यता के लोगों का सामाजिक जीवन बड़ा ही सरल और सुविधापूर्ण था। उनके समाज का मुख्य आधार परिवार था।

सिंधु घाटी सभ्यता में निवास करने वाले लोग मूलतः द्रविङ जाति के थे। कई अवशेषों से पता चला कि सिंधु घाटी की सभ्यता का समाज मातृसत्तात्मक था। यहाँ से मातृ देवी की मूर्ति भी प्राप्त हुई है।

जबकि मोहनजोदड़ो से नृत्यांगना की कांस्य की मूर्ति प्राप्त हुई है। सिंधु घाटी की सभ्यता के लोग मांसाहारी और शाकाहारी दोनों प्रकार के थे। यहाँ पर गेहूं जौ तिल  दालें मुख्य खाद्यान्न फसने थी।

तथा कुछ जगह से चावल के भी प्रमाण प्राप्त हो गए हैं।

सिंधु सभ्यता में समाज विद्वान योद्धा व्यापारी और श्रमिक लोगों में बंटा हुआ था। यहाँ के लोग बहुमूल्य धातुओं से बने आभूषण भी पहनते थे। सोने चांदी हाँथीदाँत से बने हुए आभूषण प्रचलन में थे।

यहाँ पर मनका बनाने की फैक्ट्री भी चन्हूदडो नामक स्थान पर स्थित थी।

आग में पकी मिट्टी से बर्तन बनाए जाते थे और इस मिट्टी को टेराकोटा के नाम से जाना जाता था। सिंधु घाटी की सभ्यता के लोग मछली पकड़ना शिकार करना जुआ खेलना आदि शौक रखते थे।

धार्मिक जीवन Religious life 

सिंधु सभ्यता (हड़प्पा सभ्यता) के लोगों का धार्मिक जीवन कर्मकांड और धार्मिक रूढ़ियों से संबंधित था। यहाँ पर लोग विभिन्न प्रकार के ताबीज धारण किया करते थे

जिन पर पशु पूजा वृक्ष पूजा आदि के चित्र भी अंकित रहते थे।सिंधु सभ्यता के लोग मातृशक्ति में अधिक विश्वास किया करते थे। मातृ देवी और पशुपति शिव की मूर्तियाँ बनाते थे

और उनकी आराधना किया करते थे। क्योंकि मोहनजोदड़ो से पशुपति शिव की मूर्ति भी प्राप्त हुई है।

जिसमें दाएँ ओर चीता और हाथी तथा बाई और गेंडा और भैंसा की छवि अंकित की गई है

तथा नीचे दो हिरन भी बैठे हुए हैं तथा सर पर एक त्रिशूल है। हड़प्पा सभ्यता के लोग लिंग पूजा भी किया करते थे. और अंधविश्वास जादू टोने में विश्वास करते थे।

आर्थिक जीवन Economic life

हड़प्पा सभ्यता (सिंधु घाटी की सभ्यता) के लोगों का आर्थिक जीवन बढ़ा ही सादा और सरल था। यहाँ पर उपजाऊ की जाने वाली फसने प्रमुख रूप से नौ थी।

जिनमें गेंहू जौ के अतिरिक्त कपास, तरबूज और मटर भी उगाए जाते थे। यहाँ पर हल का भी प्रयोग जुताई के लिए किया जाता था।

किन्तु फावड़े आदि का यहाँ पर कोई साक्ष्य नहीं मिला कालीबंगा से हल रेखा का साक्ष्य तथा सिंचाई का साक्ष्य धौलावीरा से प्राप्त होता हुआ है।

सिंधु सभ्यता के लोग ताम्र और टिन से मिश्रित धातु कांस्य का निर्माण करते थे तथा उनसे बने विभिन्न प्रकार के आभूषण और उन धातुओं से बनाएँ हुए आभूषण और बर्तनों का प्रयोग किया करते थे।

सिंधु सभ्यता के समय खेतड़ी राजस्थान से तांबा मंगाया जाता था। यहाँ पर बड़ाईगिरी, शिल्पकला, मिट्टी से बर्तन बनाना आदि कई शिल्पकलाएँ विकसित थी.

सिंधु घाटी सभ्यता पर निबंध

सिंधु सभ्यता की नगर योजना City plan of Indus civilization

सिंधु सभ्यता का उत्खनन होने के बाद पता चला कि सिंधु सभ्यता के नगरों के जो अवशेष है दो भागों से मिलकर बने होते थे। जिनमें ऊपरी भाग दुर्ग होता था। जिसमें बड़ी-बड़ी इमारतें, राजकीय घराने, और भंडार कक्ष होते थे।

जबकि निम्न भागों में छोटे भवन बने होते थे. बड़ी-बड़ी सड़कें समकोण पर काटती थी। नालियाँ पक्की ईंटो से बनायीं जाती थी जो ऊपर से बंद होती थी।

यहाँ के घरों का विन्यास ग्रीड पद्धति के आधार पर बनाया गया था। सभी घरों में स्नानागार और अन्नागार होते थे तथा पानी का निकास पाइप लाइनों के द्वारा नालियों में किया जाता था।

मोहनजोदड़ो से एक विशाल स्नानागार भी प्राप्त हुआ है जिसका प्रयोग अनुष्ठान आदि के समय किया जाता था

लेखन और लिपि Writing and script 

सिंधु घाटी की सभ्यता के लोगों की लेखन अभी तक पढ़ा नहीं गया है। सिंधु घाटी सभ्यता की लिपि चित्रात्मक थी।

जिसमें 65 मूलचिन्ह और 250 से 400 तक चित्राक्षर हैं। इन अक्षरों का प्रयोग लेखन के लिए सेलखड़ी की आयताकार मुद्राओं पर किया गया है।

सिंधु घाटी की सभ्यता की लिपि का का लेखन बाई ओर से दाईं ओर किया जाता है. जिसमें सबसे अधिक प्रचलित  अक्षर u और चिन्ह मछली है. इस लिपि का सबसे पहले नमूना 1853 में मिला था।

पतन के कारण Due to the decline 

सिंधु सभ्यता एक विशाल सभ्यता थी किंतु अचानक ही लुप्त हो गई है। जिसके लुप्त होने के या पतन के कई कारण वैज्ञानिकों ने बताए हैं।

आर्यों का आक्रमण - भीलर स्टुअर्ट गार्डन चाइल्ड वैज्ञानिकों ने सिंधु घाटी सभ्यता के पतन का मुख्य कारण आर्यों का आक्रमण बताया है।

बाढ़ - मार्शल मैके एस आर राव ने इस के पतन का मुख्य कारण बाढ़ को बताया है।

जबकि जलवायु परिवर्तन जलप्लावन महामारी बीमारी परिस्थिति संतुलन भी इसके विभिन्न वैज्ञानिकों ने पतन के कारण बताए हुए हैं

सिंधु घाटी के प्रमुख स्थल Major sites of Indus Valley Civilization

1. हड़प्पा - इस स्थल की खोज दयाराम साहनी ने 1921 में की थी जो रावी नदी के किनारे पाकिस्तान में स्थित है।

2. मोहनजोदड़ो - मोहनजोदड़ो नामक स्थान की खोज राखलदास बनर्जी ने 1922 में की थी जो सिंधु नदी के किनारे पर पाकिस्तान में स्थित है।

3. चन्हूदडो -  इस स्थान की खोज एम जी मजूमदार ने सन 1931 में की थी जो सिंधु प्रान्त के सिंध पाकिस्तान में स्थित है।

4. कालीबंगा -  कालीबंगा नामक स्थान की खोज देवीलाल एवं वीके थापर ने सन 1953 में की थी। यह स्थान घग्गर नदी के किनारे श्री गंगानगर राजस्थान में स्थित है।

5. रंगपुर -  रंगपुर स्थान की खोज रंगनाथ राव ने 1953 में की थी, जो भादर नदी के किनारे काठियावाड़ गुजरात में स्थित है।

6. रोपड़ -  रोपड़ स्थान की खोज यज्ञदत्त शर्मा ने 1953 में की थी जो सतलाज नदी के किनारे रोपड़ पंजाब में स्थित है।

7. लोथल - लोथल नामक स्थान की खोज रंगनाथ राव  ने 1955 ईस्वी में की थी जो भोगवा नदी के किनारे अहमदाबाद गुजरात में स्थित है।

उपसंहार Conclusion

सिंधु घाटी की सभ्यता एक ऐसी सभ्यता थी जो पूर्णतः  विकसित सभ्यता मानी जाती थी, किंतु किसी कारणवश यह सभ्यता पूर्णता नष्ट हो गई।

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