भूकंप पर निबंध हिंदी में | Essay on earthquake in hindi

भूकंप पर निबंध Essay on Earthquake

हैलो दोस्तों आपका हमारे इस लेख भूकंप पर निबंध (Essay on earthquake) में बहुत-बहुत स्वागत है। दोस्तों इस लेख में आप भूकंप पर छोटे- बड़े निबंध पढ़ेंगे, जो कक्षा 5 से लेकर कक्षा 12 तक अक्सर पूछे जाते हैं। 

इस लेख में आप भूकंप क्या है? भूकंप कैसे आता है? तथा भूकंप से क्या क्या हानियां होती हैं? आदि कई महत्वपूर्ण बातों के बारे में जानेंगे 

दोस्तों भूकंप एक प्राकृतिक आपदा इसका कोई निश्चित समय नहीं रहता कि वह कब आएगा, किन्तु जब भी आता है तो भयंकर विनाश का कारण बनता है तो दोस्तों आगे बढ़ते हैं हमारे कुछ लेख भूकंप पर निबंध में:-

ग्लोबल वॉर्मिंग पर निबंध

भूकंप पर निबंध Essay on Earthquake


भूकम्प पर निबंध 250 शब्दों में Essay on earthquake 

जब धरती अचानक हिलने लगती है यह घटना भूकंप (Earthquake) कहलाती है, जब पृथ्वी के अंदर के गर्म पदार्थों के कारण हलचल उत्पन्न होती है, तो वह भूकंप की स्थिति होती है।

भूकंप कम और भारी दोनों तीव्रता का होता है। जब कम तीव्रता वाला भूकंप आता है तो धरती केवल हिलती महसूस होती है और इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता। 

जबकि अधिक तीव्रता वाला भूकंप भारी क्षति पहुँचाता है। कच्चे कमज़ोर मकान गिर जाते हैं, संपत्ति का भारी नुकसान होता है, सैंकड़ों मनुष्य, जीव जंतु मर जाते हैं। 

तो हज़ारों की संख्या में घायल हो जाते हैं, लोग बेघर होकर अस्थायी निवास में रहने के लिए विवश हो जाते हैं, विकट परिस्थिति उत्पन्न होती है 

और इन परिस्थितियों को सामान्य बनाने में महीनों और कई वर्ष लग जाते हैं। भूकंप ऐसी प्राकृतिक आपदा है, जिसे रोका नहीं जा सकता 

परंतु सावधानियों से होने वाली हानि ज़रूर कम की जा सकती है। इससे बचने के लिए भूकंपरोधी भवनों का निर्माण किया जाना चाहिए। 

जब भूकंप आता है तो लोगों को घबराना नहीं चाहिए  उस समय आवश्यक सावधानियाँ बरतनी चाहिए। कियोकि भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है, और इसका समाधान  मिल-जुलकर करना चाहिए।

भूकंप पर निबंध Essay on Earthquake

भूकंप पर निबंध 500 शब्दों में Essay on earthquake 

भूकंप पर निबंध - पृथ्वी का कम्पन (Shivering) करने की स्थिति को भूकम्प या भूचाल कहा जाता है। किन्तु कई बार यह स्थिति बहुत भयकर हो जाती है। 

परिणामस्वरूप पृथ्वी पर उपस्थित जड़-चेतन प्राणी और पदार्थ का या तो विनाश हो जाता है या फिर वह सर्वनाश की स्थिति में चला जाता है। 

जापान ऐसा देश है जहाँ प्रायः सुना जाता है, कि वहाँ तो अक्सर विनाशकारी भूकम्प आते रहते हैं। इस लिए जापान के लोग लकड़ियों के बने घरों में रहते हैं। 

एक भयानक भूकम्प कई वर्षों पहले भारत के कोटा नामक स्थान पर आया था। उसने शहर के साथ-साथ हजारों घर-परिवारों को नष्ट कर दिया था 

कुछ वर्षों पहले गढ़वाल, महाराष्ट्र के कुछ भागों को भूकम्प के हानिकारक हादसों का शिकार होना पड़ा। प्रकृति (Nature) की यह किस प्रकार की लीला है, 

कि वह मानव-शिशुओं के घर जीव - जंतुओं को तथा स्वयं तथा वनस्पतियों को भी कच्ची मिट्टी के खिलौनों की तरह तोड़-मरोड़कर रख देती है। 

सबसे पहले भूकम्प गढ़वाल के पहाड़ी इलाकों में पहुँचा। और बहुत नुकसान पहुंचाया  कुछ दिन पश्चात् महाराष्ट्र के एक भाग में फिर भूकम्प देखने को आया 

जिसने वहाँ सब कुछ ध्वस्त कर दिया।  महाराष्ट्र में धरती के जिस भाग पर भूकम्प रुपी राक्षस ने अपने पैर रखें वहाँ तो नगर के नगर खण्डहर बन गए ।

उन मकानों में फंसे हुये नागरिक कुछ तो काल के असमय मृत्यु का ग्रास बन गए , जबकि बचे हुये लंगड़े-लूले बन चुके थे। 

एक दिन बाद समाचार में बताया कि सरकार और गैर-सरकारी स्वयं-सेवी संस्थाओं के सेवक दोनों भूकंप पीड़ित लोगों के लिए राहत कार्यों में जुटे हुए थे। 

और इस प्रकार कई संस्थाएँ अपने साधनों के अनुसार सहृदयता का व्यवहार करती हुई भूकंप पीड़ितों को राहत पहुंचाने का प्रयास कर रही थीं।

भूकम्प कितना विनाशकारी था यह दूरदर्शन में वहाँ के दृश्य देखकर अनुमान लगया जा सकता है, जिन भागों पर भूकम्प अधिक था उन जगहों पर सब कुछ समाप्त हो चुका था। 

यहाँ तक कि किसानों (Farmers) के पशु तक नहीं बचे थे। गाय भैस कुत्ता बिल्ली आदि पशुओं का अन्त हो चुका था। 

सैकड़ों लोग मकानों के ढहने और धरती के फटने से मृत्यु के ग्रास बन चुके थे और हंसता-खेलता महाराष्ट्र का नगर वीरान होकर रह गया था। 

हर जगह गहरा मौत का-सा सन्नाटा छा जाता है, कभी-कभी तो ऐसा लगता है, कि जापान के लोग कैसे रहते होंगे उन्हें ना जाने कब भूकंप का सामना करना पड़े।

भूकंप का एक और नजारा 26 जनवरी, 2001 को गुजरात सहित पूरे भारत ने देखा, जिस भूकंप की तीव्रता 7.7 थी, 

और इसमें भुज सहित संपूर्ण गुजरात में भारी जान-माल का नुकसान के साथ मौत का तांडव मच गया। 

इसी प्रकार 8 अक्टूबर, 2005 को पाकिस्तान के POK पाक अधिकृत कश्मीर और भारतीय कश्मीर में दिल दहला देने वाला विनाशकारी भूकंप आया 

जिसमें उसने करीब एक लाख लोगों को मौत की नींद सुला दिया ,जबकि लाखों बच्चे अनाथ और लोग घायल हुए। इस भूकंप में अरबों रुपए की संपत्ति की हानि हुई।

भूकंप के विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा कोई उपकरण-यंत्र विकसित नहीं हुआ है, जिससे यह बात निश्चित की जाये कि किन क्षेत्रों में भूकंप आने वाला है। 

भूकंप के आने पर ‘रिक्टर स्केल’ (Richter scale) पर भूकंप की तीव्रता  का ही मापन किया  जा सकता है। इसलिए जापान, व अमेरिका के कुछ राज्यों में जहाँ पर भूकंप के झटके हमेशा महसूस किए जाते हैं, 

उन जगहों के वैज्ञानिकों ने भूकंपरोधी मकानों (Earthquake Resistance) का निर्माण पर बल दिया है।

भूकंप पर निबंध Essay on Earthquake

भूकंप पर निबंध 800 शब्दों में Essay on earthquake

यहाँ पर भूकंप पर निबंध 800 शब्दों में साधारण भाषा में समझाने का प्रयास किया गया है:- 

भूकंप क्या है what is Earthquake

पृथ्वी के हिलने को भूचाल, भूकंप कहा जाता है। धरती का ऐसा कोई भी स्थान शेष नहीं, जहाँ कभी-न-कभी भूकम्प न आया हो।

भूकंप के कम तीव्रता के झटकों से तो कोई हानि नहीं होती, लेकिन जब अधिक तीव्रता के झटके आते हैं, तो बहुत भयंकर परिणाम देखने को मिलते हैं। 

भूकंप को रोकने के कई उपाय खोजने के प्रयास किये गए किन्तु कई वर्षों की लगातार मेहनत के बाद भी वैज्ञानिक (Scientist) भूकंप के रोकथाम का उपाय आज तक नहीं खोज कर पाए।

भूकंप क्यों आते हैं Why do earthquakes happen

भूकंप क्यों आते है इस विषय में भिन्न-भिन्न मत हैं। भूगर्भशास्त्रियों (Geologists) का कहना है, कि पृथ्वी के भीतर की प्लेटों में सभी धातुएँ और पदार्थ आदि तरल रूप में पाए जाते हैं। 

जब वे पृथ्वी के अंदर की गरमी (Heat) के कारण अधिक तेजी से बहते और फैलते हैं, तो धरती में कम्पन्न होता है और वह पदार्थ ज्वालामुखी (Volcano) के छिद्र से बाहर आते है। 

इस कारण भूकंप आते है। एक अन्य विचार यह भी है कि पृथ्वी के भीतर प्लेटों के खिसकने से भी धरती हिल उठती है।

भारत में कुछ रूढ़िवादी लोगों का कहना है, कि पृथ्वी के जिस भाग पर पाप बढ़ जाते हैं वहाँ की पृथ्वी काँपने लगती है इसी प्रकार एक कथा भी प्रचलित है 

कि शेषनाग, ने अपने फनों के ऊपर पृथ्वी को धारण किया है, और जब वे अपने सिर को हिलाते हैं तो भूकंप की स्थिति बनती है। 

जबकि कुछ अर्थशास्त्रियों (Economists) का विचार था कि संसार में जब जनसंख्या (Population) बढ़ जाती है तो उसे कम करने के लिए प्रकृति (Nature) भूकंप लाती है।

भारत देश में पिछले लगभग डेढ़ सौ वर्षों में सात बड़े-बड़े भूकंप आए हैं। जिनमें भीषण भूकंप कलकत्ता में 11 अक्तूबर, 1937 को आया,

इस भूकंप में लगभग तीन लाख व्यक्ति मारे गए थे। दूसरा भयंकर विनाशकारी भूकंप असम में, 15 अगस्त, 1950 को आया था। जिसमें लगभग डेढ़ हजार व्यक्ति मारे गए थे

इस भूकंप के झटके बनारस से लेकर रंगून तक महसूस किए गए थे। इस भूकंप से भूमि के धरातल में हुए परिवर्तनों के परिणामस्वरूप 

असम की नदियों लोहित और छिहांग ने अपना रास्ता बदल दिया था, जिस कारण इन नदियों में और ब्रह्मपुत्र नदी में आई बाढ़ से अपार हानि हुई थी।

फिर बिहार के भूकंप का नंबर आता है, जो 15 जनवरी 1934 को आया था। इस भूकंप के प्रकोप से बिहार, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश, बंगाल, सहित कई राज्य हिल गए थे, जबकि पटना, मुजफ्फरपुर, गया और मुंगेर जिलों को भयकर विनाश का सामना करना पड़ा।

इस भूकंप के कारण हुई उथलपुथल में सैकड़ों लोग मर गए, जबकि मुंगेर शहर तो नष्ट ही हो गया। पृथ्वी से ऐसी जहरीली गैसें निकलीं, 

जिनको सिर्फ सूंघने से ही अनेक मनुष्यों की मृत्यु हो गयी, यातायात (Transport) नष्ट हो गया, महीनों तक खुदाई चलती रही और ज़मीन में दबी लाशें तथा कीमती समान निकलता रहा।

भारतीय उप-महाद्वीप में एक और भयंकर भूकंप 31 मई, 1935 को क्वेटा (Quetta) में भयकर तबाही का रूप लेकर आया था, जिसने क्वेटा शहर नष्ट कर दिया तथा लगभग 60 हजार व्यक्ति मर गए।

जापान देश में तो हमेशा भूकंप आते रहते हैं। इसलिए वहाँ लकड़ी और गत्ते से मकान बनाये जाते है। अभी कुछ वर्ष पहले टर्की में भयंकर भूकम्प आया था, 

जिसने लगभग बारह हजार व्यक्तिओ की जान ले ली। अक्तूबर 1956 में दिल्ली तथा आसपास के इलाके में केवल एक मिनट के भूकंप के झटके से ही लगभग ढाई हजार मकान क्षतिग्रस्त हो गए थे।

11 दिसंबर, 1967 को सुबह चार बजकर बाईस मिनट पर सतारा जिले के कोयना नगर के आसपास के लगभग पचास गाँवों में भीषण भूकंप आने से सौ से अधिक व्यक्ति मर गए 

और तेरह सौ घायल हो गए थे। इसका प्रभाव मुंबई पूना, किर्की, पणजी, हैदराबाद व औरंगाबाद आदि अनेक नगरों पर भी पड़ा।

23 सितंबर, 1945 को मैक्सिको में भूकंप ने बीस हजार व्यक्तियों को अपनी मौत के चादर में समेट लिया तथा  कई मकान ध्वस्त हो गए।

भूकम्प ने लाखों लोगो को मौत की नींद सुला दिया जबकि हजारों बच्चों को अनाथ, अपंग बना दिया फिर भी अभी तक वैज्ञानिक भूकंप की समस्या को हल नहीं कर पाए हैं।

भूकंप पर निबंध 1000 शब्दों में Essay on earthquake

यहाँ पर 1000 शब्दों में भूकंप पर निबंध हिंदी भाषा में समझाने का प्रयास किया गया है। यहाँ से आप भूकंप पर निबंध लिखने का आईडिया ले सकते हैं। यह निबंध कक्षा 5 से लेकर कक्षा बारहवीं तथा उच्च कक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है। 

प्रस्तावना Introduction 

प्रकृति की रचना ईशवर की रचना है, जिसके कारण वह अजेय है और मनुष्य भी प्राचीन काल से प्रकृति की शक्तियों के साथ संघर्ष करता रहा। 

मनुष्य ने अपनी बुद्धि, शक्ति के बल पर प्रकृति के कई रहस्यों कों उजागर करने में सफलता प्राप्त की है। परन्तु प्रकृति की शक्तियों पर संपूर्ण अधिकार करने की शक्ति मनुष्य में नहीं है।

प्रकृति विभिन्न रूपो में हमारे सामने आती है। ये कभी अपना कोमल और सुखदायी रूप में दिखाई देती है तो कभी कठोर रूप धारण करती है, 

जिससे मनुष्य इसके सामने विवश हो जाता है। तूफान, बाढ़, सूखा, अकाल, अनावृष्टि अतिवृष्टि तथा भूकम्प ऐसे ही प्रकोप है।

भूकम्प क्या है what is earthquake

साधारण शब्दों में घरती के हिलने को भूचाल, भूकंप कहा जाता है। पृथ्वी के प्रत्येक भाग पर कभी ना कभी भूकंप के झटके आए ही होंगे, 

भूकंप के हल्के झटके कम गति वाली तरंगे जो विशेष हानि नहीं पहुँचाती। लेकिन जब कभी जोर के झटके तीव्र गति का भूकंप आता हैं तो वे प्रलयकारी होते हैं।

भूकंप अचानक मुक्त हुई ऊर्जा की तरंग के कारण उत्पन्न होने वाली घटना है, जो धरातल के नीचे चट्टानों के लचीलेपन तथा गुरुत्वकर्षण के कारण उत्पन्न होता है।

भूकंप को मापने के लिए दो प्रकार के पैमानों का अविष्कार वैज्ञानिकों ने किया है जिन्हें मरकेली पैमाना और रिक्टर पैमाना कहा जाता है।

मरकेली पैमाना (Mercalli scale) में भूकंप की तीव्रता को मापने के लिए 12 श्रेणियों में बांटा है, जबकि रिएक्टर पैमाने (Reactor scale) में भूकंप तीव्रता को मापने के लिए 1 से 9 तक संख्याएंँ होती हैं। इस पैमाने का अविष्कार चार्ल्स फ्रांसिस ने 1945 में किया था।

भूकंपीय तरंगे Earthquake waves 

  1. प्राइमरी तरंगे (Primary waves) - प्राइमरी तरंगे वे तरंगे होती हैं जिनका औसत वेग 8 किलोमीटर प्रति सेकंड होता है। यह तरंगे अनुदैधर्य प्रकार की होती हैं जो ठोस द्रव और गैस तीनों में से होकर गुजर जाती हैं। यह तरंगे सबसे कम क्षति कारक तरंगे होती हैं। 
  2. द्वितीयक तरंगे (Secondary waves)- यह वे भूकंपीय तरंगे होती है जो केवल ठोस से ही गुजरती हैं यह अनुप्रस्थ प्रकार की तरंगे होती हैं जिनका वेग 4 किलोमीटर प्रति सेकंड होता है। यह तरंगे प्राथमिक तरंगों से अधिक क्षति कारक होती हैं। 
  3. एल तरंगे (L-waves) - एल तरंगों को लंबी तरंगे कहा जाता है इनकी खोज H.D Love ने की थी। यह तरंगे धरातल पर सबसे बाद में पहुंचती हैं कियोकि इनका वेग 1.5 से 3 किलोमीटर प्रति सेकंड होता है। तरंग सबसे विनाशकारी तरंगे होती है।

भूकंप का कारण Causes of Earthquake 

भूकंप क्यों कैसे आते हैं यह एक प्रकार का ऐसा रहस्य है, जिसकी पूर्ण जानकारी आज तक नहीं है, वैज्ञानिकों ने प्रकृति को मनुष्य के अनुकूल बनाने का अथाह प्रयास किया है। 

आज के समय मनुष्य गर्मी तथा सर्दी में स्वयं को बचाने के लिए अपने आप को वातावरण (Environment) के अनुकूल बना सकता है।

लेकिन भूकंप तथा बाढ़ (Flood) सूखा (Drought) ज्वालामुखी (Volcano) प्लेटो की गतियाँ, जलीय भार आदि ऐसे देवी प्रकोप है, जिनका समाधान वैज्ञानिक कई वर्षों के कठोर प्रयत्नो के बावजूद भी नहीं कर पा रहे है।

भूकंप के कारण के विभिन्न विचार वैज्ञानिकों भूगर्भशास्त्रियों ने दिए भूकम्प के विषय में लोगों के भी भिन्न-भिन्न मत है, 

भुगर्भ शास्त्रियों का कहना है कि धरती के भीतर विभिन्न धातुएँ तरल पदार्थ के रूप में है, कियोकि पृथ्वी के अन्दर तापमान अधिक है 

जब अंदर के ताप के कारण ये घातुएँ (Metals) तीव्रता से फैलने लगती हैं, तो पृथ्वी हिलने लग जाती है, जो भूकंप कहलाता है। 

कई बार ये पिघली घातुएँ ज्वालामुखी (Volcano) के रूप में बाहर आ जाती है और भूकम्प का कारण बन जाती है।

दूसरी ओर भारत एक धार्मिक देश है। यहाँ के लोगों का विचार है, कि जब पृथ्वी के किसी भाग पर पाप, अत्याचार और अनाचार, अधर्म बढ़ जाते हैं तो उस भाग में देवी प्रकोप के कारण भूकंप जैसी आपदा आती है।

ग्रामीणों में तो यह कथा चलती है कि भगवान विष्णु के शेषनाग ने पृथ्वी को अपने सिर पर धारण कर रखा है। जब शेषनाग अपने एक सिर पर पृथ्वी के बोझ के कारण थक जाते है। 

तो उसे दूसरे सिर पर बदलता है उसकी इस क्रिया से पृथ्वी हिल जाती है और भूकंप आ जाता है। 

किन्तु अर्थशास्त्रियों (Economist) का कहना है, कि जब पृथ्वी पर जनसंख्या बढ़ जाती है तब उसे संतुलित करने के लिए भूकम्प उत्पन्न होते हैं।

भूकंप से हानि Loss of Eathquake 

भूकंप का कारण कुछ भी हो सकता है पर इतना तय है कि भूकंप एक दैवी प्रकोप जैसा है तथा भयानक विनाश का कारण बनता है। 

भूकंप जान लेवा ही नहीं बल्कि मनुष्य की वर्षों की मेहनत को भी नष्ट कर देता है। बिहार में बड़े विनाशकारी भूकंप देखे गए है 

जिसमें हजारों लोग मौत के मुंह में चले गए ज़मीन में दरारें पड़ गई जिनमें जीवित प्राणी समा गए धरती के गर्भ से विभिन्न प्रकार की विषैली गैस उत्पन्न हूंई 

जिससे मनुष्य सहित विभिन्न प्राणियों का दम घुट गया। धरती में दबे लोगों के मृत शरीरों को बाहर निकालने के लिए धरती की खुदाई करनी पडती है। 

भूकम्प के कारण यातायात के साधन नष्ट हो जाते हैं बड़ी तथा मजबूत इमारतें नष्ट हो जाती है। लोग बेघर हो जाते हैं, धनवान निर्धन बन जाते हैं और निर्धनों को जीने के लाले पड़ जाते हैं।

जब कभी जिस किसी क्षेत्र में भूकंप आता है, तो उस जगह पर चारों तरफ मौत का तांडव तथा हर जगह चीँख पुकार ही सुनाई देती हैं।

भूकंप से बचने के उपाय

भूकंप का उल्लेख Discription of Earthquake 

भूकंप ने सन 1935 में प्रलयकारी नृत्य किया था। भूकंप के तेज झटकों के परिणामस्वरूप देखते ही देखते एक सुंदर नगर नष्ट हो गया हजारों स्त्री पुरुष सुखद नींद का आनंद ले रहे थे 

कुछ ही पलों में मौत का ग्रास बन गए। मकान, सड़के ओर वृक्ष रेलवे लाइने आदि सब नष्ट हो गए, उस समय की स्थिति बहुत दयनीय हो गया। 

हजारों लोग अपंग हो गए। किसी का हाथ टूट गया तो किसी की पैर कोई व्यक्ति अँधा हो गया या बहरा हजारों स्त्रियाँ विधवा हो गई और बच्चों के सिर से माँ बाप का शाया छिन गया। 

इसी प्रकार गुजरात राज्य में सन 2001 में भूकंप आया जिससे हुई भयकर बर्बादी ने मनुष्य जाति को झकझोर दिया। आज भी भूकंप से प्रताड़ित लोग भूकम्प की करुण दृश्य मन में लाते ही ह्रदय कांप उठता है।

जापान जैसे कुछ ऐसे देश है, जहाँ भूकंप आने की संभावना अधिक होती है। इसलिए इन देशों में मकान ईंट तथा सीमेंट के नहीं बनाये जाते 

यहाँ पर गत्ते के तथा प्लास्टिक फाइबर (Plastic fiber) के मकान बनाए जाते हैं, इनके द्वारा भूकंप के प्रभाव को कम कर सकते हैं, कियोकि भूकंप आता है तो भयानक जान और माल की हानि होती है। 

टर्की देश में आये भीषण भूकंप से हजारों मनुष्य दबकर मर गए तथा लाखों घायल हो गए भूकंप के हल्के झटके भी बड़ी इमारतों को घराशायी कर देते है।

उपसंहार Conclusion 

आज के युग को विज्ञान का युग (Age of Science) कहते है, किन्तु भूकम्प के कारण क्षण भर में प्रलय का दृश्य दिखाई देता है। पर करें तो क्या करें ईश्वर की इच्छा के आगे सब विवश है।

और विज्ञान ने अभी तक भूकम्प को रोकने का उपाय नहीं खोज पाया किन्तु वैज्ञानिक लगातार भूकंप की समस्या से निजात पाने का हल खोज रहें है।

तब तक मनुष्य को भूकंप से होने वाली हानि को कम करने के प्रयास तथा हमेशा भूकंप से बचने के उपाय पर ध्यान देना चाहिए। 

मनुष्य को अपनी शक्ति और बुद्धि का घमंड नहीं करना चाहिए। मनुष्य को हमेशा ईश्वर की शक्ति के आगे नतमस्तक रहना चाहिए, कियोकि ईश्वर की कृपा ही हमें प्राकृतिक प्रकोप से बचा सकती है।

दोस्तों आपने इस लेख में भूकंप पर छोटे बड़े निबंध (Essay on Earthquake) भूकंप क्या है निबंध पढ़े। आशा करता हूं यह लेख आपको अच्छा लगा होगा कृपया इसे अपने दोस्तों में शेयर जरूर करें।

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