प्राकृतिक आपदा पर निबंध | Essay on natural disaster in hindi

प्राकृतिक आपदा पर निबंध natural disasters essay in hindi 

हैलो दोस्तों आपका हमारे इस लेख प्राकृतिक आपदा पर निबंध में बहुत-बहुत स्वागत है। दोस्तों इस लेख में आप प्राकृतिक आपदा पर निबंध (Essay on Natural Disaster) पढ़ेंगे जो कक्षा 6 से कक्षा 12वीं तक अक्सर पूछा जाता है।

आप यहाँ से निबंध लिखने का आइडिया भी ले सकते हैं। दोस्तों प्राकृतिक आपदा वह आपदा होती है, जिसका कुछ पता नहीं रहता कि वह कब आएगी।

साधारण शब्दों में बोल सकते है कि वह आपदा जिस पर मनुष्य का किसी प्रकार का नियंत्रण ना हो प्राकृतिक आपदा होती है। तो दोस्तों आइए पढ़ते हैं प्राकृतिक आपदा पर निबंध:-

वृक्षारोपण पर निबंध

प्राकृतिक आपदा पर निबंध


प्राकृतिक आपदा क्या है what is natural disaster 

किसी भी प्रकार की घटना जिसके द्वारा जन-धन की अपार हानि होती है, उसे आपदा कहते हैं। आपदा दो प्रकार की होती हैं, 

प्राकृतिक आपदा और मानव जनित आपदा जिनमें मानव जनित आपदाएँ वे आपदाएँ होती हैं जिनकी उत्पत्ति (Origion) मानव के हस्तक्षेप के कारण या मानव के द्वारा होती हैं, 

उन आपदाओं को मानव जनित आपदा कहते हैं, जबकि प्राकृतिक आपदाएँ वे आपदाएँ होती हैं, जो प्रकृति (Nature) द्वारा उत्पन्न होती हैं, 

तथा इनका कोई निश्चित समय नहीं रहता की ये कब आती हैं और कब चली जाती हैं, किंतु जब भी प्राकृतिक आपदाएँ घटित होती हैं, उस समय अपार जन-धन की हानि होती है, 

यहाँ तक कि नगर के नगर और देश के देश प्राकृतिक आपदाओं के शिकार ऐसे होते हैं, कि लंबे समय तक अपनी यथास्थिति में नहीं पहुंच पाते।

दूसरे शब्दों में कह सकते हैं, कि वे आपदाएँ जिस पर मनुष्य का किसी भी प्रकार का जोर नहीं चलता जिन्हें दैवीय प्रकोप भी माना जाता है, 

उन घटनाओं को प्राकृतिक आपदा (Natural disaster) कहते हैं। प्राकृतिक आपदा भी कई प्रकार की होती हैं। जैसे - ज्वालामुखी विस्फोट, भूकंप, सुनामी, भूस्खलन, बाढ़, सूखा अतिवृष्टि आदि।

  1. जनसंख्या विस्फोट पर निबंध 
  2. विज्ञान के चमत्कार निबंध 

प्राकृतिक आपदा के प्रकार type of natural disaster

कुछ प्राकृतिक आपदाओं को नीचे वर्णित किया गया है :-

प्राकृतिक आपदा पर निबंध

प्राकृतिक आपदा भूकंप Natural disaster Earthquake 

प्राकृतिक आपदाओं में सर्वप्रथम नाम भूकंप (Earthquake) का आता है, क्योंकि यह एक ऐसी प्राकृतिक आपदा है, जिसमें पृथ्वी हिलने डुलने लगती है, तथा कई जगहों से फट जाती है, 

जिसमें नगर के नगर समा जाते हैं और लाखों लोगों की मृत्यु हो जाती है। भूकंप उस स्थिति को कहते हैं, जिसमें पृथ्वी किन्हीं भी कारणों के द्वारा कंपन करने लगती है।

भूकंप से अपार हानि होती है। भूकंप के कई कारण माने जाते हैं, जैसे- ज्वालामुखी विस्फोट, धरती के अंदर प्लेटों का खिसकना तथा कुछ लोग इसे देवी प्रकोप भी मानते हैं। 

जब भूकंप आता है तो बड़ी से बड़ी मजबूत इमारते गिर जाती हैं, जिसके नीचे हजारों लोग दब कर मर जाते हैं,  कई बच्चे अनाथ हो जाते हैं, तथा कई स्त्रियाँ विधवा हो जाती हैं। 

लंबे समय से वैज्ञानिक भूकंप की समस्या से समाधान पाने के लिए प्रयास कर रहे हैं, किंतु अभी तक उनका प्रयास सफल नहीं हो पाया। केवल भूकंप से बचाव के उपाय अपनाये जाते है। 

जैसे - भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में ईट, सीमेंट से घर नहीं बनाये जाते बल्कि गत्ता प्लास्टिक फाइबर से घर बनाना चाहिए, भूकंप चेताबनी तथा समाचार पर ध्यान देना आदि।

प्राकृतिक आपदा पर निबंध

प्राकृतिक आपदा सुनामी Natural disaster tsunami 

सुनामी भी एक तरह की प्राकृतिक आपदा (natural disaster) है, जो पानी में उत्पन्न होती है, इसीलिए इसे पानी का भूकंप भी कहा जाता है, क्योंकि यह भूकंप के समान ही होती हैं। 

साधारण शब्दों में कह सकते हैं, कि समुद्री जल जब ऊर्ध्वाधर तरंगों का रूप ले लेता है, तो उस स्थिति को सुनामी कहते हैं। 

सुनामी समुद्र तटीय क्षेत्रों (Seaside areas) में भयंकर विनाशकारी होती हैं, जो 20 मीटर की ऊंचाई तक पहुंच जाती है और समुद्र तटीय नगर के नगर अपने साथ समुद्र में बहा ले जाती हैं।

सुनामी के विभिन्न कारण हैं, जैसे - ज्वालामुखी विस्फोट, भूकंप आदि। जब समुद्री धरातल पर भूकंप आता है, तथा ज्वालामुखी उत्पन्न होती है, तो ऊर्जा की अपार मात्रा मुक्त होती है, 

जिसके कारण महासागरीय जल का विस्थापन होता है और यह जल तरंगों का रूप ले लेता है, जो आसपास बसे नगरों और शहरों में प्रवेश करता है तथा सुनामी का रूप धारण कर लेता है।

सुनामी से बचने के लिए समुद्र तटीय इलाकों में विभिन्न प्रकार के उपाय किए जाने चाहिए समुद्र से दूर ही नगरों को बसाया जाना चाहिए, 

तथा लोगों को बचाव दल के संपर्क नंबर याद होना चाहिए, लोगों को पशु पक्षियों की असामान्य गतिविधियों पर भी ध्यान देना चाहिए तथा सुनामी चेतावनी पर ध्यान देना चाहिए।

प्राकृतिक आपदा पर निबंध

प्राकृतिक आपदा ज्वालामुखी Natural disaster valcano 

ज्वालामुखी भी एक विनाशकारी प्राकृतिक आपदा है जिसके उत्पन्न होते ही सैकड़ों मील तक लोग इसकी चपेट में आ जाते हैं। 

ज्वालामुखी प्रशांत महासागर तटीय क्षेत्रों में अधिक देखने को मिलते हैं। यह तीन प्रकार के होते है,सक्रिय ज्वालामुखी (Active volcano) सुप्त ज्वालामुखी (Supt volcano) तथा मृत ज्वालामुखी (dead volcano) साधारण शब्दों में कह सकते हैं, 

की ज्वालामुखी वह एक प्राकृतिक आपदा है जिसमें ज्वालामुखी के क्षेत्र से भयंकर विनाशकारी गैसें तथा लावा निकलता है, जो मनुष्य जीव जंतुओं को नष्ट करने के साथ वहाँ की वनस्पति तथा प्राकृतिक संपदा (Natural wealth) को भी नष्ट कर देता है। 

ज्वालामुखी उत्पन्न होने का कारण पृथ्वी के अंदर विभिन्न प्रकार की धातु तथा ताप का महत्वपूर्ण सहयोग होता है, पृथ्वी के अंदर कई धातुयें (Metals) पाई जाती हैं।  

जो घरती के अन्दर अत्यधिक ताप तथा दाब पर पिघल जाती हैं तथा धरती पर एक छिद्र से अधिक दबाव के साथ बाहर निकलती हैं इस स्थिति को ही ज्वालामुखी कहते हैं। 

ज्वालामुखी से निजात पाने के लिए ज्वालामुखी क्षेत्र में शहर को नहीं बसाना चाहिए तथा जहाँ सुप्त तथा मृत ज्वालामुखी है, उन स्थानों पर मानव क्रियाकलापों की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

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प्राकतिक आपदा सूखा Natural disaster Draught 

सूखा एक ऐसी प्राकृतिक आपदा है, जिसके कारण मनुष्य तथा सभी प्रकार के जीव जंतु सहित वनस्पतियाँ  भी नष्ट हो जाती हैं।

उपजाऊ घरती ऊसर हो जाती है, तथा अपना उपजाऊपन (Fertility) छोड़कर रूखी दिखाई देती है। साधारण शब्दों में कह सकते हैं कि सूखा एक वह स्थिति है जिसमें बर्षा 25 सेंटीमीटर से भी कम होती है 

अर्थात वह एक बड़ा भूभाग जहाँ पर 25 सेंटीमीटर से कम बरसात होती है, सूखा ग्रसित क्षेत्र कहलाता है। ऐसे क्षेत्रों में सभी प्रकार की मानवीय क्रियाकलाप मंद पड़ जाते हैं। 

पीने के लिए पानी भी नहीं बचता पृथ्वी का वाटर लेवल (Water label) कम हो जाता है, तथा वनस्पतियाँ पेड़ पौधे सूख कर मुरझा जाते हैं। 

सूखा का सबसे प्रमुख कारण वृक्षों तथा जंगलों का सफाया करना है, आज बढ़ती जनसंख्या (Population) तथा औधोगिकरण (Industrilization) से जंगलों को काटा जा रहा है, जो सूखा का कारण बन रहे है  

क्योंकि वृक्ष ही वर्षा को लाते हैं। इसलिए सूखा से निजात पाने के लिए प्रत्येक जगह वृक्षारोपण करना (Tree Plantation) चाहिए अगर वृक्षारोपण होगा तो वृक्ष वर्षा मानसून को लाएंगे और बरसात होगी तथा सूखा की स्थिति नष्ट हो जाएगी।

प्राकृतिक आपदा पर निबंध

प्राकृतिक आपदा बाढ़ natural disaster flood 

बाढ़ भी प्राकृतिक आपदा के अंतर्गत आने वाली एक भयानक विनाशकारी आपदा है, जिसमें अपार जन-धन की हानि के साथ ही विभिन्न प्रकार के पशु पक्षी भी चपेट में आ जाते हैं। 

सामान्यतः एक बड़े भूभाग में जल का भर जाना बाढ़ कहलाता है। बाढ़ के कई कारण हो सकते हैं, जैसे - अनियंत्रित वर्षा किसी बांध का टूटना या नदी का अपना मार्ग बदल देना। 

बाढ़ से कई कच्चे मकान गिर जाते है बच्चे तथा बुजुर्ग, जानवर पानी के बहाव में वह जाते है तथा संपत्ति नष्ट हो जाती है। 

बाढ़ के बाढ़ विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ (Desease) जन्म लेती है, जो मनुष्यों सहित कई जीव जन्तुओ को मौत की गोद में सुला देती है।

बाढ़ से निजात पाने के लिए नदियों के किनारे बांध का निर्माण किया जाना चाहिए तथा बड़ी-बड़ी नदियों के आसपास शहरों तथा नगरों को नहीं बता रहा है जाना चाहिए

प्राकृतिक आपदा से हानि disadvantage of Natural disaster 

प्राकृतिक आपदाएँ ऐसी आपदाएँ होती है, जिनके आने का कोई निश्चित समय नहीं होता, यहाँ तक की कुछ ऐसी प्राकृतिक आपदाएँ होती है 

जो मनुष्य को सोचने का समय भी नहीं देती की वह करें ऐसी आपदाओं से लाखों लोगों की जान चली जाती है, तथा मानवीय गतिविधियाँ (Human Activity) बंद हो जाती है, 

और यथास्थिति में आने में वर्षों लग जाते है। कई प्रकार की भयानक बीमारियाँ उत्पन्न हो जाती है. जिससे मनुष्य के साथ अन्य जीव जंतुओं का अस्तित्व (Existence) समाप्त हो जाता है, 

यहाँ तक की वनस्पतियाँ भी प्रभावित होती है, और आपदा ग्रसित क्षेत्रों में लम्बे समय तक वनस्पतियाँ देखने को नहीं मिलती वह स्थान खंडहर, बीरान हो जाता। 

भूकंप से रेल लाइन बिजली के खम्बे तथा सड़के आदि घ्वस्त हो जाती है तो सूखा से मिट्टी उपजाऊपन छोड़ जाती है, तथा पानी के आभाव में फसलें सूख जाती है। 

बाढ़ से घर नष्ट हो जाते है तथा महामारी, हैजा, मलेरिआ जैसी बीमारियाँ उत्पन्न होने से कई लोगों मृत्यु का ग्रास बन जाते है। 

प्राकृतिक आपदा से बचने के उपाय ways to avoids natural disaster 

वैज्ञानिकों के लगातार प्रयास के बाबजूद भी अभी तक वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक आपदाओं पर काबू नहीं कर पाया। ऐसी स्थिति में केवल प्राकृतिक आपदाओं से बचाव ही किया जा सकता है, 

वैज्ञानिकों के प्रयास से प्राकृतिक आपदा चेतावनी प्रणाली विकसित की गई है, जिसमें प्राकृतिक आपदाओं तथा मौसम सम्बन्धी गतिविधियों पर ध्यान दिया जाता है

तथा उनका अध्ययन कर इनसे सम्बंधित सूचनाओं को जनमानस तक समाचार के माध्यम से पहुँचाने का कार्य किया जाता है। अतः मनुष्य को इन चेतावनियों की और ध्यान देना चाहिए

भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में गत्ते तथा प्लास्टिक फाइबर (Plastic fiber) के घरों का निर्माण किया जाना चाहिए, सुनामी प्रभावित क्षेत्रों में शहर तथा नगरों का निर्माण ऊँची पहाड़ियों पर बसाये जाने चाहिए 

नदियों के पास बाँध (Dam) का निर्माण किया जाना चाहिए सूखा ग्रस्त क्षेत्रों में वृक्षारोपण कार्यक्रम (Tree Plantation Programm) चलना चाहिए प्रत्येक व्यक्ति को प्राकृतिक आपदाओं का ज्ञान वचाव के उपाय तथा 

सुरक्षा दल के सम्पर्क में होना चाहिये। इस प्रकार से हम काफ़ी हद तक इन आपदाओं से होने वाली हानि को कम कर सकते है।

उपसंहार Conclusion 

प्राकृतिक आपदाएँ ऐसी आपदाएँ होती हैं जिन पर नियंत्रण पाना बड़ा ही मुश्किल होता है लेकिन इनके बचाव के उपाय हमेशा किए जाने चाहिए हमें प्राकृतिक आपदाओं के प्रति हमेशा सजग रहना चाहिए 

और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली हानि को कम करने का प्रयास करना चाहिए अगर आप मानव के अस्तित्व को बचाना चाहते हैं तो प्राकृतिक नियमों में छेड़छाड़ ना करें वृक्षारोपण करें

तथा प्रकृति को हरा-भरा और शुद्ध रखें क्योंकि प्राकृतिक आपदाएँ इतनी विनाशकारी होती हैं जो सब कुछ तहस-नहस कर देती हैं 

अतः प्रत्येक व्यक्ति को प्रकृति के नियमों का उल्लंघन नहीं करना चाहिए प्रकृति की सुरक्षा और संरक्षण में कार्य करना चाहिए जिससे इन प्राकृतिक आपदाओं को कम किया जा सके

दोस्तों इस लेख में आपने प्राकृतिक आपदा पर निबंध (Essay on Natural Disaster) पड़ा आशा करता हूंँ, यह लेख आपको अच्छा लगा होगा

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