बाढ़ पर निबंध हिंदी में | essay on flood in Hindi

बाढ़ पर निबंध हिंदी में Essay on flood in Hindi

हैलो दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है, हमारे आजके इस लेख बाढ़ पर निबंध हिंदी में (essay on flood in hindi) में।

दोस्तों इस लेख में आप बाढ़ क्या है? बाढ़ कैसे आती है? इसके कारण क्या है? और क्या-क्या नुकसान होते हैं? के साथ अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में जान पाएंगे।

दोस्तों पिछले लेख में हमने भूकंप और प्राकृतिक आपदा पर लिखा था, जिसका लिंक इस लेख में दे दिया जाएगा, जहाँ से आप उसे पढ़ सकते है, तो दोस्तों आइए शुरू करते हैं यह लेख में बाढ़ पर निबंध हिंदी में:-


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बाढ़ पर निबंध हिंदी में

बाढ़ पर निबंध 100 शब्द Essay on Flood in 100 words 

बाढ़ पर निबंध :- किसी भी बड़े भूभाग में जल का भराव बाढ़ कहा जाता है, जो एक प्राकृतिक आपदा (Natural Disaster) होती है। यह बिन बुलाए विभिन्न कारणों के कारण अचानक ही उत्पन्न हो जाती है। ज्यादातर बाढ़ अधिक बारिश के कारण,

किसी नदी में अधिक पानी की मात्रा के कारण, बांध या डैम टूटने के कारण आती है, जिससे एक बड़े भूभाग में पानी का भराव हो जाता है तथा वहाँ के फ्लोरा फयूना (Flora Fauna) को बहुत ही अधिक क्षति पहुंचाती है।

बाढ़ के कारण अपार जनधन की हानि होती है, जिसमें हजारों लोगों की जान चली जाती है वही सभी प्रकार की फसलें, वनस्पतियाँ आदि भी नष्ट हो जाती हैं।

बाढ़ के कारण विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ उत्पन्न होती हैं, जिसके कराण चारों ओर त्राहि-त्राहि मच जाती है। इसीलिए बाढ़ पर नियंत्रण पाने के लिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बस्तियों को नहीं बताना चाहिए,

नदियों पर मजबूत बांध बनाए जाने चाहिए तथा सरकार को भी बाढ़ नियंत्रण के लिए विभिन्न प्रकार के प्रयोग तथा इंतजाम किया जाना चाहिए तभी बाढ़ पर काबू पाया जा सकता है।

बाढ़ पर निबंध हिंदी में

बाढ़ पर निबंध 200 शब्दों में  Essay on flood in 200 words 

बाढ़ एक ऐसी प्राकृतिक आपदा है, जो एक बार आती है तो हजारों की संख्या में मनुष्य, पशु-पक्षियों तथा जानवरों की जान की दुश्मन बन जाती है तथा कई सालों तक लोग इस आपदा से ऊपर भी नहीं पाते।

साधारण शब्दों में कह सकते हैं कि बाढ़ एक वह प्राकृतिक आपदा है, जिसमें एक बड़े भूभाग में जलभराव हो जाता है।

इसके विभिन्न कारण हो सकते हैं जैसे कि अत्यधिक वर्षा का होना, किसी नदी के जल भराव के कारण, डैम आदि के टूटने के कारण, सुनामी के कारण आदि।

जब एक बड़े भूभाग में अचानक ही जल भराव हो जाता है, तो कई जिंदगियाँ तबाह हो जाती हैं, बस्तियाँ की बस्तियाँ पानी के बहाव में बह जाती हैं।

मनुष्य, पशु-पक्षी जानवर आदि मृत्यु के घाट उतर जाते हैं। मनुष्य के पास खाने के लिए कुछ नहीं बचता उनका अनाज भंडार नष्ट हो जाते हैं।

फसल नष्ट हो जाती हैं तथा कई प्रकार की बीमारियाँ और महामारियाँ उत्पन्न होने लगती है, जिससे मनुष्य तथा जानवर विभिन्न प्रकार के रोगों से ग्रस्त हो जाते हैं और मृत्यु के काल में समा जाते हैं।

इसीलिए बाढ़ से बचने के लिए सरकार के द्वारा विभिन्न प्रकार के बाढ़ नियंत्रण सहायता केंद्र है, साथ ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मनुष्य की बस्तियों को ना बसाना चाहिए, मनुष्य की बस्तियाँ नदी 

से दूर ऊंचे स्थानों बाढ़ ग्रस्त इलाकों से दूर बताई जानी चाहिए। बस्तियों के आसपास वृक्षारोपण किया जाना चाहिए, तथा समय-समय पर बाढ़ नियंत्रण केंद्र द्वारा जानकारी प्राप्त करती रहनी चाहिए, ताकि बाढ़ जैसी विकराल समस्या से काफी हद तक राहत पाया जा सके।


बाढ़ पर निबंध Essay on flood in hindi

यहाँ बाढ़ पर निबंध (Essay on flood) साधारण भाषा में समझाने का प्रयास किया गया है:-

बाढ़ पर निबंध हिंदी में

बाढ़ क्या है what is flood 

बाढ़ क्या है in hindi - जब किसी भी बड़े भूभाग में (बस्ती या खाली) विभिन्न प्रकार के कारणों के द्वारा जल से भर जाता है,

जिससे जनधन की अपार हानि तथा प्राकृतिक तत्वों को नुकसान पहुँचता है, उस स्थिति को हम बाढ़ (Flood) कहते हैं। साधारणतय :

जलाशयों में पानी की अधिक वृद्धि हो जाती है, या फिर बरसात (Raining) अत्यधिक मात्रा में होती है, तो नदियाँ और बड़े बड़े जलाशयों का जल अपनी सीमा से बाहर निकलने लगता है,

और आसपास के इलाकों में भरने लगता है जिससे आसपास के क्षेत्र जलमग्न हो जाते हैं, जिसे बाढ़ कहते हैं। दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं, कि बाढ़ एक प्राकृतिक आपदा (Natural Disaster) है।

जिसमें वह स्थिति बन जाती है कि एक बहुत बड़ा भूभाग अधिक वर्षा के कारण या फिर नदियों या जलाशयों के पानी के कारण भर जाता है।

ऐसी स्थिति में लोगों के घरों में पानी भर जाता है, जबकि कच्चे मकान तो गिर ही जाते हैं, मवेशी जानवरों को हानि पहुंचती है और आर्थिक नुकसान होता है।

कभी-कभी तो बाढ़ ऐसा भयंकर रूप लेती है, की बाढ़ का पानी अपने साथ गाँव के पशु पक्षियों जानवरों यहाँ तक कि मनुष्यों तक को बहा ले जाती है,

और बाढ़ का पानी निकलने के बाद विभिन्न प्रकार की महामारी और रोग उत्पन्न होते हैं, जिस पर मनुष्य का कोई भी नियंत्रण नहीं रहता इसलिए बाढ़ को प्राकृतिक आपदा भी कहा जाता है।


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बाढ़ के प्रमुख कारण what flood causes

बाढ़ के प्रमुख कारण - बाढ़ एक प्राकृतिक आपदा है, इसलिए यह अचानक नहीं आती बल्कि लंबे समय से प्राकृतिक नियमों में छेड़छाड़ करने के

पश्चात ही बाढ़ भयंकर रूप लेती है। बाढ़ के कुछ मानव जनित और प्राकृतिक कारण निम्न प्रकार से हैं:-

दुर्बल बांध का निर्माण - दुर्बल बांध का निर्माण बाढ़ का एक प्रमुख कारण रहा है। कभी-कभी बांध का निर्माण करते वक्त बांध निर्माण में

सही तरीके से सामग्री का उपयोग नहीं किया जाता तथा अधूरा ज्ञान होने के कारण बांध निर्माण का कार्य ठीक से नहीं होता। जिससे बांध दुर्बल बनते हैं,

और पानी की मात्रा अधिक बढ़ने पर वह टूट जाते हैं, जिससे वह पानी आसपास के इलाकों में भर जाता है और बाढ़ का रूप ले लेता है।

सड़क निर्माण - बाढ़ का एक प्रमुख कारण सड़क निर्माण को भी माना जाता है, क्योंकि सड़क निर्माण कार्यो के कारण पानी के निकास में व्यवधान उत्पन्न होता है,

तथा पक्की सड़कों के निर्माण से पृथ्वी भी जल का अवशोषण नहीं कर पाती इस कारण बाढ़ का खतरा बना रहता है।

पर्वतीय क्षेत्रों में अनियंत्रित गतिविधियाँ - पर्वतीय क्षेत्र में अनियंत्रित गतिविधियाँ भी बाढ़ का कारण बन जाती हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में अनियंत्रित तरीके से

खनन हिमालय क्षेत्रों में लंबी सड़कें बनाना तथा मलबे का निकलना वनों की कटाई आदि पर्वतीय क्षेत्र में बाढ़ का प्रमुख कारण होते हैं।

भूस्खलन अनियंत्रित वर्षा - भूस्खलन होने से भी बाढ़ का खतरा रहता है, जब भूस्खलन होता है, तो वह नदियों का मार्ग बदल देता है।

जिससे नदियाँ अपना मार्ग मोड़ कर जहाँ भी जगह मिलती है, वहाँ अपना बहाव शुरू कर देती हैं, वही अनियंत्रित वर्षा के कारण भी बाढ़ आने की संभावना बढ़ जाती है।

जब कभी बरसात अनियमित तरीके से और लगातार होती है, जिसे लोग बादल फटना या देवी शक्ति का प्रकोप भी मानते हैं, उस स्थिति में भी बाढ़ हमेशा देखी जाती है।

नदियों की तलछट ही भर जाना - नदियों में विभिन्न प्रकार का कूड़ा कचरा रासायनिक पदार्थ तथा मिट्टी आदि बहाकर लाई जाती है।

जिससे नदियों की तलछट भरने लगती है, जिससे पानी नदियों की सीमाओं को लाँघने लगता है, और बाढ़ का कारण बनता है।


बाढ़ से होने वाले नुकसान Harmful effect of flood 

बाढ़ से होने वाले नुकसान - बाढ़ एक ऐसी आपदा है, जिससे ना कि धन का नुकसान होता है, बल्कि कई जीव जंतुओं और मनुष्यों की जान तक चली जाती है। बाढ़ के कुछ नुकसान निम्न प्रकार के हैं:-

जनधन की हानि - बाढ़ आने पर बाढ़ का पानी गाँव में प्रवेश कर जाता है, और मकानों में भर जाता है, जिससे घरों में रखा हुआ खाने पीने का सामान नष्ट हो जाता है,

कभी कभी पानी का बहाव इतना तेज होता है, कि वह अपने साथ पशु पक्षियों और मनुष्यों को भी बहा ले जाता है, जिससे उन पशु पक्षियों और मनुष्यों की मृत्यु हो जाती है।

घरों का विनाश - जब बाढ़ का पानी तेज बहाव के साथ आता है, तो कच्चे मकानों को तो अपने साथ बाहर ही ले जाता है।

और बहुत से लोग तथा जानवर कच्चे मकानों में दबकर मर जाते हैं। जबकि पक्के मकानों को भी क्षति देखने को मिलती है।

आर्थिक नुकसान - बाढ़ आने पर आर्थिक नुकसान भी होता है, आर्थिक गतिविधियां सब बंद हो जाती हैं। बिजली के खंभे टूट कर गिर जाते हैं,

और सड़कों पर कीचड़ और पानी ही पानी दिखाई देता है, अन्न भंडार में पानी भर जाने से पूरा अन्न खराब हो जाता है, दुकानों किराना स्टोर आदि का सामान खराब हो जाता है,

यहाँ तक कि पीने तक का पानी दूषित हो जाता है और कुछ लोग तो प्यास और भूख के कारण ही मर जाते हैं।

भयानक बीमारियाँ - बाढ़ अपने साथ जनधन की हानि तो करती ही है, किंतु बाढ़ के निकलने के बाद भी हमारे सामने मुसीबत खड़ी कर देती है,

क्योंकि बाढ़ के साथ विभिन्न प्रकार का कूड़ा कचरा एकत्रित होता है, जिसमें कई प्रकार के जीवाणु (Bacteria) विषाणु (Virus) होते हैं। पानी दूषित हो जाने के कारण लोग दूषित पानी पीते हैं,

और हैजा, पेचिस जैसे रोगों से ग्रसित हो जाते हैं, इसके साथ ही महामारी जैसी बीमारी बाढ़ के बाद उत्पन्न होती हैं, जिससे सैकड़ों लोग मर जाते हैं।


बाढ़ आने पर बचाव Protection from flood 

बाढ़ आने पर बचाव - अगर आप बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में हैं और बाढ़ आ जाती है, तो आपको निम्न उपाय जरूर करने चाहिए:- 

जरूरत का सामान इकट्ठा करें - अगर आपको बाढ़ का पता चल जाता है, और बाढ़ का पानी गांव में तथा घरों में भरने लगता है

तो आप तुरंत ही जरूरत का सामान इकट्ठा करें और उस सामान को लेकर आप एक ऊंची पहाड़ी पर या फिर किसी पक्के ऊंचे मकान पर चढ़ जाये और बाहरी मदद आने तक वही रहे।

मवेशियों को खुला छोड़ दें - अगर बाढ़ आती है, तो आप सभी प्रकार के मवेशियों को जल्दी से जल्दी बंधन मुक्त कर दें

और उन्हें उचित स्थान तक पहुंचाने की कोशिश करें अगर पानी का बहाव तीव्र है, तो उन्हें किसी पहाड़ी या ऊँचे स्थान तरफ ले जाएँ।

बाढ़ में फसने पर - यदि बाढ़ का बहुत तीव्र और आप बाढ़ के पानी में फंस गए हैं और ऐसा लग रहा है कि वह पानी आप को बहाकर ले जाएगा।

तो आप अपने आसपास कोई ऐसी वस्तु खोजें जो पानी में तैर रही हो अगर आपको कोई बड़ी सी लकड़ी मिल जाती है तो

आप उसको पकड़े रहें और पानी के बहाव के साथ बहते जाएँ तथा उचित स्थान आने पर उस लकड़ी की मदद से रुकने का प्रयास करें।

बूढ़े और पुराने वृक्ष पर ना चढ़े - जब कभी आप बाढ़ में फंस जाएँ तो आप किसी पुराने या कमजोर बृक्ष पर बिल्कुल भी ना चढ़े

वरना वह वृक्ष पानी के बहाव से टूट जाएगा। जिससे आपको चोट भी लग सकती है और आपके बहने की संभावना भी हो सकती है।


बाढ़ रोकने के उपाय Measures of Flood prevention

बाढ़ रोकने के उपाय - जब बाढ़ आती है, उस समय तो बाढ़ को नहीं रोका जा सकता, किंतु बाढ़ हमेशा बरसात के मौसम में आती है इसलिए हमें बरसात के मौसम से पहले ही सावधानियाँ बाढ़ को रोकने के उपाय करने चाहिए:- 

बांध का निर्माण - जो भी छोटी बड़ी नदियाँ हैं तथा बड़ी नदियों की सहायक नदियाँ हैं उन सभी पर मजबूत बांध का निर्माण किया जाना चाहिए, जिससे मुख्य नदी में बाढ़ के खतरे कम किए जा सकेंगे।

वृक्षारोपण - नदियों के जो ऊपरी जल संग्रहण क्षेत्र हैं, वहाँ पर वृक्षारोपण (Tree Plantation) किया जाना चाहिए क्योंकि वृक्ष पानी को सोखते हैं और बाढ़ के प्रभाव को कम करते हैं।

नदियों के मार्ग  - नदियों के मार्ग को सीधा और सरल बनाना चाहिए, जिससे वे अपने मार्ग को बदलने ना पाए इस प्रकार से भी नदियों के बाढ़ का खतरा कम किया जा सकता है।

विकास कार्य रोकना - जो क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित हैं, उन क्षेत्रों में किसी भी बड़े विकास कार्यों की अनुमति नहीं देनी चाहिए।

मजबूती से भवन निर्माण - बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कच्ची मकानों का निर्माण बहुत ही कम किया जाना चाहिए पक्के मकानों का निर्माण सरिया सीमेंट तथा मजबूत सामग्री के साथ किया जाना चाहिए।

पानी का निकास - जो क्षेत्र बाढ़ प्रभावित हैं, उन क्षेत्रों में पानी का निकास के रास्ते इस प्रकार से बनाए जाने चाहिए कि बाढ़ आने पर भी पानी जल्द से जल्द निकल जाए।

पर्वतीय क्षेत्रों में विकास कार्य रोकना - जो क्षेत्र पर्वतीय क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं, वहाँ पर ऐसे विकास कार्य रोक देना चाहिए, जिसमें विस्फोटकों का उपयोग करना पड़ता है।

क्योंकि पर्वतों को तोड़ने के लिए विस्फोटक का उपयोग करते हैं जिससे भूस्खलन की समस्या बनी रहती है, तथा भूस्खलन के कारण नदियों के मार्ग बदल जाते है और बाढ़ के खतरे बढ़ जाते हैं।

बाढ़ चेतावनी प्रणाली - जो लोग बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे हैं, उन्हें बाढ़ चेतावनी प्रणाली के बारे में जानकारी होना चाहिए

और सरकार के द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ से संबंधित जानकारी समय-समय पर दी जानी चाहिए। जिससे बाढ़ आने से नुकसान को कुछ हद तक रोका जा सके।


भारत की प्रमुख बाढ़ प्रभावित घटनाएँ Major Flood Affected Events of India

  1. कशमीर बाढ़ आपदा :- कश्मीर में सितंबर 2014 में झेलम नदी में भयानक बाढ़ आयी थी। जिसका कारण भयंकर बारिश होना था जिससे झेलम नदी का जलस्तर बढ़ गया, इसीलिए कश्मीर क्षेत्र के रिहायशी इलाकों में पानी घुस गया था, जिसमें लगभग 500 लोगों की जान गई और हजारों लोग बेघर हो गए।
  2. उत्तराखंड फ्लैश फ्लड :- भारत के इतिहास इस घटना को सबसे विनाशकारी विनाशकारी घटना कह सकते है, कियोकि इसने उत्तराखंड के लगभग 12 जिलों को प्रभावित किया। जून 2013 में उत्तराखंड में भारी वर्षा, के कारण साथ ही बड़े पैमाने पर भूस्खलन के कारण लगभग 5500 से अधिक जानें लगतार 14 से 17 जून तक बाढ़ और भुसखलन के कारण गयी, जबकि लाखों लोग बेघर हो गए।
  3. बिहार बाढ़ आपदा 2007:- बिहार सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित राज्य है जहाँ पर 2007 में भारी वर्षा के कारण भयानक बाढ़ आयी थी जिसमें बिहार के 19 जिला प्रभावित रहे। इस घटना में लगभग 1200 लोगों की जानें चली गयी और हजारों लोग बेघर हो गए।

निष्कर्ष Conclusion 

बाढ़ एक प्राकृतिक आपदा है, जो अचानक वर्षा आदि के कारण उत्पन्न होती है और अपार जनधन की हानि का कारण बनती है।

किन्तु बाढ़ के प्रभाव को कम करके होने वाली क्षति को कम किया जा सकता है, उसके लिए व्यक्ति को स्वयं बाढ़ तथा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सचेत रहना चाहिए तथा बाढ़ से बचने के उपाय अपनाने चाहिए।



दोस्तों इस लेख में आपने बाढ़ पर निबंध (Essay on flood) पढ़ा, आशा करता हुँ आप इस जानकारी से संतुष्ट हुए होंगे।

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  1. प्राकृतिक आपदा पर निबंध Natural Disaster
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