गंगा नदी पर निबंध Essay on river Ganges in hindi

गंगा नदी पर निबंध essay on river Ganges in hindi 

हैलो दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है, हमारे इस लेख गंगा नदी पर निबंध essay on river ganga in hindi में।

दोस्तों आप इस लेख में गंगा नदी के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर पाएंगे।

साथ ही आप जानेंगे, कि गंगा नदी कहाँ से निकलती है? गंगा नदी की सहायक नदियां कौन-कौन सी हैं?

गंगा नदी के तट पर कौन कौन से शहर बसे है? और गंगा नदी का महत्व क्या है? तो दोस्तों आइए शुरू करते हैं, यह लेख गंगा नदी पर निबंध:-

गंगा नदी पर निबंध

सिंधु नदी पर निबंध

गंगा नदी के बारे में about Ganga river 

गंगा नदी पर निबंध - भारत (India) देश एक ऐसा देश है, जहाँ पर भारत के कोने कोने से विभिन्न नदियाँ निकलती है। इसलिए भारत को नदियों का देश (Country of River) कहा जाता है।

विश्व में भारत देश ही एक ऐसा देश है, जहाँ पर नदियों को माँ की संज्ञा दी जाती है। भारत देश में बहुत सी ऐसी पवित्र नदियाँ हैं,

जिनके शीतल जल में स्नान करने से ही मनुष्यों के सभी पाप धुल जाते हैं। ऐसी ही एक नदी है "गंगा नदी" जिसे माँ गंगा के नाम से भी जाना जाता है।

गंगा नदी भारत की सबसे बड़ी पवित्र नदी है। पौराणिक धर्म ग्रंथों में गंगा नदी का बहुत ही महत्व है, जिसका उद्गम उत्तराखंड से होता है।

गंगा नदी ही भारत में एक ऐसी नदी है, जिसका जल वर्षों तक रखने पर भी खराब नहीं होता। पौराणिक धर्म ग्रंथों में बताया जाता है,

कि गंगा नदी में मनुष्य की अस्थियाँ विसर्जन करने पर उस मनुष्य की आत्मा को शांति मिलती है, और उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। इसलिए गंगा नदी में नित्य प्रति श्रद्धालुओं का मेला सा लगा रहता है।

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गंगा नदी कहाँ से निकलती है Where does the river Ganges originate  

गंगा नदी उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित गौमुख स्थान के ग्लेशियर गंगोत्री से निकलती है। जहाँ पर इसका नाम भागीरथी होता है।

उत्तरकाशी जिले में ही उत्तराखंड में संतोपथ ग्लेशियर से अलकनंदा नाम से एक और नदी निकलती है, और दोनों नदियाँ आपस में एक स्थान (देवप्रयाग ) में जाकर मिलती है।

जहाँ पर संयुक्त धारा का नाम गंगा हो जाता है। गंगा नदी उत्तराखंड से निकलकर उत्तराखंड सहित बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल पाँच राज्यों में होकर बहती है।

अंत में बंगाल की खाड़ी में गिर जाती है, जिसकी कुल लंबाई 2525 किलोमीटर है।


गंगा नदी की सहायक नदियाँ Tributaries of river Ganges 

गंगा नदी भारत की सबसे बड़ी नदी है, जिसकी कुल लंबाई 2525 किलोमीटर है। गंगा नदी भारत के उत्तराखंड राज्य से निकलती है,

तथा बांग्लादेश से होती हुई बंगाल की खाड़ी में गिर जाती है। इस मध्य गंगा नदी 2525 किलोमीटर की दूरी तय करती है।

जिसके बीच में कई छोटी-बड़ी नदियाँ गंगा नदी में आकर मिल जाती हैं। जिन्हें गंगा नदी की सहायक नदियाँ (Tributaries) कहते हैं।

गंगा नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी यमुना नदी है, जो यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलती है, और 1310 किलोमीटर की दूरी तय करके इलाहाबाद में

गंगा से मिल जाती है। गंगा नदी की अन्य सहायक नदियों में सोन, टोंस, गोमती, घघर, गंडक, कोसी, हुगली, महानदी आदि है।

गंगा नदी पर निबंध

गंगा नदी का अपवाह तंत्र Gangetic river drainage system 

गंगा नदी उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिला में स्थित गंगोत्री ग्लेशियर से भागीरथी के नाम से निकलती है। भागीरथी नदी में एक स्थान पर एक और

नदी भिलंगना आकर मिलती है, और उस स्थान का नाम गोविंद प्रयाग हो जाता है। जहाँ पर टिहरी बांध (Tehri Dam) का निर्माण किया गया है।

अब भागीरथी नदी आगे बढ़ती है, और उत्तराखंड में ही एक स्थान पर आकर अलकनंदा नदी से मिल जाती है। जहाँ पर इन दोनों नदियों के मिलन बिंदु को देवप्रयाग (Devprayag) कहा जाता है।

और फिर नदी का नाम गंगा नदी हो जाता है। अब गंगा नदी उत्तराखंड में हरिद्वार और ऋषिकेश से आगे बढ़ती है. तथा मैदानी क्षेत्र में प्रवेश करने के साथ उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर जाती है,

और कानपुर से होते हुए इलाहाबाद में प्रवेश करती है। जहाँ पर यमुना नदी आकर गंगा नदी में मिल जाती है। गंगा नदी वाराणसी में प्रवेश करती है,

जहाँ पर इसमें गोमती नदी मिल जाती है। इसके बाद गंगा नदी बिहार में प्रवेश करती है, और पटना से आगे बढ़ती है, और गंगा नदी में सहायक नदियाँ जैसे- गंडक, घग्गर और कोसी मिल जाती है।

इसके बाद गंगा नदी आगे बढ़ती है, और झारखंड से होते हुए पश्चिम बंगाल में प्रवेश करती है। जहाँ पर गंगा नदी में फरक्का नामक स्थान पर हुगली नदी मिल जाती है।

वहाँ फरक्का बैराज बना हुआ है। आगे बढ़कर गंगा नदी दो धाराओं में विभक्त हो जाती है। एक धारा का नाम पदमा होता है,

जो बांग्लादेश में बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है। जबकि दूसरी धारा का नाम मेघना होता है, जो ब्रह्मपुत्र नदी से मिल जाती है। 

गंगा नदी के किनारे बसे शहर the city is situated on the banks of river Ganges 

गंगा नदी के किनारे कई शहर बसे हुए हैं, जिन्हें पवित्र शहरों के नाम से जाना जाता है। गंगा नदी 5 राज्यों से होकर गुजरती है।

और इन 5 राज्यों के लगभग 100 से अधिक शहर गंगा नदी के किनारे बसे हो गए हैं, उत्तर प्रदेश के शहरों में

कानपुर, वाराणसी, इलाहाबाद, कन्नौज रामनगर, हस्तिनापुर, इलाहाबाद के साथ ही अन्य कई शहर गंगा नदी के तट पर बसे हुए हैं।

जबकि उत्तराखंड राज्य में हरिद्वार,  ऋषिकेश, तपोवन,  रुद्रप्रयाग कर्णप्रयाग, देवप्रयाग, बद्रीनाथ, गंगोत्री आदि शहर गंगा नदी के तट पर बसे हुए हैं।

बिहार राज्य में पटना, छपरा, दानापुर,  बक्सर, बरौनी के साथ अन्य कई शहर गंगा नदी के तट पर बसे हुए शहर हैं।

जबकि झारखंड राज्य के 2 शहर साहिबगंज और राजमहल गंगा नदी के किनारे बसे शहर है।

वहीं पश्चिम बंगाल में श्रीरामपुर, टीटागढ़,  उत्तरी बैरकपुर,  कृष्णानगर, कोलकाता एमसी, कल्याणी हल्दिया आदि कई प्रमुख शहर है,

जो गंगा नदी के किनारे बसे हुए शहर हैं, और गंगा नदी की पवित्रता से पवित्र है। इनमें से कई शहर योगी संतों और महात्माओं की तपोभूमि भी है।

गंगा नदी का महत्व importence of Ganga river 

गंगा नदी का महत्व आर्थिक और सांस्कृतिक पौराणिक (Cultural and Mythological) दोनों दृष्टि से उल्लेखनीय है।

एक तरफ गंगा नदी नदी भारत की सांस्कृतिक, पौराणिक नदियों के रूप में जानी जाती है। वहीं दूसरी तरफ गंगा नदी आर्थिक नदी (Economical) के रूप में भी जानी जाती है।

गंगा नदी का महत्व आर्थिक दृष्टि से देखा जाये तो गंगा नदी के आसपास जितने भी शहर बसे हुए हैं, तथा सटे हुए सभी भूभागों में गंगा के जल के द्वारा ही खेती की जाती है।

इसलिए गंगा के जल का एक बहुत बड़ा भाग सिंचाई के लिए उपयोग किया जाता है। जिससे खेतों की फसल लहराती है।

गंगा के तटवर्ती इलाकों में बहा के लाई गई मिट्टी उपजाऊ होती है, और अधिक मात्रा में फसल की भी प्राप्ति होती है।

इसके साथ ही मछली उद्योग तथा यातायात से भी आर्थिक लाभ होता है। गंगा नदी पर कई बांध बनाए गए हैं, जहाँ पर विद्युत भी बनाई जा रही है।

वहीं दूसरी तरफ देखा जाए तो सांस्कृतिक और पौराणिक दृष्टि से गंगा नदी का एक अलग ही महत्व है।

धर्म ग्रंथों और पौराणिक कहानियों में बताया जाता है,  कि माता गंगा को शिव जी ने शुक्ल सप्तमी तिथि को अपनी जटाओं में धारण किया था

इसलिए इस दिन को गंगा सप्तमी के नाम से मनाया जाता है, और गंगा माँ के श्रद्धालुओं को गंगा माँ का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

सप्तमी के दिन गंगा में स्नान करने पर सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं। तथा मोक्ष (Salvation) की प्राप्ति होती है। क्योंकि पौराणिक कथाओं के आधार पर बताया जाता है,

कि गंगा माँ की उत्पत्ति भगवान विष्णु के पैर से हुई है, जो प्रजापति ब्रह्मा के कमंडल में समाहित थी। और महाराज भागीरथ के प्रयास के कारण धरती पर आयी।

माँ गंगा को जीवनदायिनी और पापनाशिनी के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इनके शीतल जल में स्नान करने से सभी प्रकार के रोग और कष्टों से (Disease and suffering) मुक्त हो जाते हैं।

माँ गंगा के जल का उपयोग लोग यज्ञ में करते हैं, यह जल कभी खराब नहीं होता। गंगा जल का उपयोग विभिन्न प्रकार की औषधियों में भी किया जाता है। 

निष्कर्ष conclusion 

गंगा नदी भारत की सबसे बड़ी और एक महान पौराणिक नदी है। जिसे स्वयं महादेव ने अपने सिर पर धारण किया था। गंगा नदी गंगा माता के रूप में अपने पुत्रों को पाप मुक्त और कष्टों से हमेशा मुक्त करती है।

दोस्तों इस लेख में आपने गंगा नदी पर निबंध (Essay on River Ganga) के साथ अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों के बारे में ज्ञान प्राप्त किया आशा करता हूं, यह लेख आपको अच्छा लगा होगा।

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