रामनरेश त्रिपाठी का जन्म कब हुआ था.जीवन परिचय when was Ramnaresh Tripathi born Biography

रामनरेश त्रिपाठी का जन्म कब हुआ था जीवन परिचय when was Ramnaresh Tripathi born Biography 

हैलो दोस्तों नमस्कार आपका बहुत-बहुत स्वागत है, हमारे इस लेख राम नरेश त्रिपाठी का जन्म कब हुआ था (when was Ramnaresh tripathi born, biography) में।

दोस्तों आज इस लेख में हम द्विवेदी युग के एक महान कवि रामनरेश त्रिपाठी जी के बारे में उनका जीवन परिचय जानेंगे।

इसके साथ ही उनके भाव पक्ष कला पक्ष और सभी रचनाओं के साथ ही रामनरेश त्रिपाठी का अमूल्य योगदान हिंदी साहित्य में कैसा रहा पढ़ेंगे।

तो दोस्तों आइए शुरू करते हैं, यह लेख राम नरेश त्रिपाठी का जन्म कब हुआ था:-

जयशंकर प्रसाद की कविता आंसू

रामनरेश त्रिपाठी का जन्म कब हुआ था.जीवन परिचय

रामनरेश त्रिपाठी का जन्म कब हुआ था when was Ramnaresh Tripathi born

रामनरेश त्रिपाठी हिंदी साहित्य के द्विवेदी युग के एक महान कवि थे। जिन्होंने हिंदी साहित्य को अपनी अमूल्य और अतुलनीय कविताएँ, रचनाएँ प्रदान की।

ऐसे द्विवेदी युग के महान कवि रामनरेश त्रिपाठी जी का जन्म 1889 में जौनपुर जिले के कोइरीपुर गाँव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था।

इनके पिता जी का नाम पंडित रामदत्त त्रिपाठी था। जो बड़े ही सीधे, सरल स्वभाव और धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे।

पंडित रामदत्त त्रिपाठी भारतीय सेना में सूबेदार के पद पर थे। इसलिए रामनरेश त्रिपाठी में देश प्रेम, राष्ट्रभक्ति, धर्म निष्ठा आदि के गुण समाहित हो गए।

रामनरेश त्रिपाठी जी की प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही संपन्न हुई और उन्होंने कक्षा नौवीं तक की शिक्षा प्राप्त की, और उसके बाद उन्होंने घर पर स्वयं अध्ययन किया।

पंडित राम नरेश त्रिपाठी साहित्य और कविता लेखन में अधिक रूचि रखते थे। पंडित राम नरेश त्रिपाठी को हिंदी के साथ अंग्रेजी संस्कृत उर्दू और गुजराती भाषाओं का भी अच्छा खासा ज्ञान था।

पंडित राम नरेश त्रिपाठी ने अपना गुजारा करने के लिए सेट बल्लभ के पुत्रों की शिक्षा - दीक्षा का कार्यभार संभाला और साहित्य में अपनी निपुणता को हासिल करते गए।

और उन्होंने हे प्रभु आनंद दाता ज्ञान हमको दीजिए अद्भुत रचना कर डाली जो आज भी बहुत विद्यालयों और धार्मिक स्थलों के साथ ही कार्यालयों में सुबह कार्य करने से पहले प्रार्थना के रूप में दोहराई जाती है।

रामनरेश त्रिपाठी का निधन कब हुआ था when did Ramnaresh Tripathi die 

हिंदी साहित्य के महान कवि रामनरेश त्रिपाठी जिन्होंने कविता कहानी उपन्यास जीवनी संस्मरण आदि में अपना अमूल्य योगदान दिया।

रामनरेश त्रिपाठी ने 72 वर्षों में लगभग 100 से अधिक पुस्तके भी लिखी। ऐसे महान कवि पवित्र भूमि प्रयागराज में 16 जनवरी 1962 को स्वर्गलोक सिधार गए।

उनकी याद में उनके गृह जनपद जौनपुर में एक रामनरेश त्रिपाठी नाम से सभागार अभी भी उनकी यादों को ताजा किए हुए हैं।

रामनरेश त्रिपाठी की रचनाएँ Compositions of Ramnaresh Tripathi 

रामनरेश त्रिपाठी की प्रमुख रचनाएँ निम्न प्रकार से हैं:-

काव्य-कृतियाँ

मिलन (1918), पथिक (1920), मानसी (1927), स्वप्न (1929) इसके लिए उन्हें हिन्दुस्तान अकादमी का पुरस्कार मिला था

मुक्तक 

रामनरेश त्रिपाठी ने आर्य संगीत शतक, कविता-विनोद, क्या होम रूल लोगे, मानसी, मारवाड़ी मनोरंजन,मुक्तक लिखे हैं 

प्रबंध (काव्य)

मिलन, पथिक, स्वप्न, आदि प्रबंध रामनरेश त्रिपाठी द्वारा रचित हैं 

कहानी

रामनरेश त्रिपाठी ने कहानियों में तरकस, आखों देखी कहानियां, के साथ स्वपनों के चित्र, नखशिख, उन बच्चों का क्या हुआ आदि कहानियां लिखी है।

उपन्यास 

रामनरेश त्रिपाठी के मारवाड़ी और पिशाचनी, सुभद्रा वीरांगना, वीरबाला, और लक्ष्मी, आदि प्रमुख उपन्यास प्रसिद्ध है।

नाटक 

रामनरेश त्रिपाठी ने वफ़ाती चाचा, अजनबी, के आलावा पैसा परमेश्वर, बा और बापू, कन्या का तपोवन, जयंत, प्रेमलोक, आदि प्रसिद्ध नाटक लिखे हैं 

व्यंग्य 

रामनरेश त्रिपाठी व्यंगकार भी है, दिमाग़ी ऐयाशी, स्वप्नों के चित्र आदि सबसे प्रसिद्ध व्यंग हैं।

रामनरेश त्रिपाठी की भाषा शैली Ramnaresh tripathi ki bhasa shaili 

रामनरेश त्रिपाठी की भाषा शैली - पंडित राम नरेश त्रिपाठी जी को हिंदी के साथ ही अंग्रेजी, संस्कृत, उर्दू, गुजराती आदि भाषाओं का भी ज्ञान था।

किंतु रामनरेश त्रिपाठी जी ने अपने साहित्य में सबसे अधिक महत्व हिंदी भाषा को दिया। रामनरेश त्रिपाठी ने अपनी रचनाओं में खड़ी बोली का अधिक प्रयोग किया है।

इसके साथ ही कहीं-कहीं पर संस्कृत के शब्दों का बाहुल्य भी देखने को मिलता है। संस्कृत के नियमों का प्रयोग भली भांति उन्होंने अपने काव्य में किया है।

पंडित राम नरेश त्रिपाठी की भाषा में प्रसाद गुण की झलक भी देखने को मिलती है। तो वहीं दूसरी तरफ उन्होंने अपनी वर्णनात्मक शैली का प्रयोग प्रकृति के अद्भुत सौंदर्य का वर्णन करने के लिए किया है,

और वहीं उपदेश आत्मक शैली का प्रयोग आदर्श भावों को प्रकट करने के लिए किया है। उनकी भाषा में अलंकारों का प्रयोग भी देखने को मिलता है।

किंतु कहीं ऐसा नहीं लगता कि अलंकारों का जबरदस्ती काव्य में प्रयोग किया गया है। रामनरेश त्रिपाठी जी की भाषा शैली संगीतमय और प्रभावशाली है।

रामनरेश त्रिपाठी जी का भाव पक्ष Ramnaresh tripathi ka bhav paksh 

रामनरेश त्रिपाठी जी का भाव पक्ष - रामनरेश त्रिपाठी जी के पिता भारतीय सेना में सूबेदार थे। जिससे रामनरेश त्रिपाठी जी के जीवन और भाव पक्ष पर काफी अधिक प्रभाव पड़ा।

जबकि रामनरेश त्रिपाठी जी में देश प्रेम, राष्ट्रीयता तथा धर्मनिष्ठा के गुण कूट-कूट कर भरे हुए थे। उनकी रचनाओं में एक और भावों की प्रधानता है,

तो दूसरी और राष्ट्र के प्रति प्रेम और प्रकृति का चित्रण भी उन्होंने बड़े ही मनोहारी रूप में किया है। रामनरेश त्रिपाठी एक आदर्शवादी कवि थे। इसलिए उनकी रचनाओं में नवीन आदर्श और नवयुग का संकेत है।

रामनरेश त्रिपाठी जी का कला पक्ष Ramnaresh tripathi ka kala paksh 

रामनरेश त्रिपाठी जी का कला पक्ष - रामनरेश त्रिपाठी जी की काव्य की भाषा बड़ी ही सहज सरल शुद्ध खड़ी बोली है। जबकि बे उर्दू अंग्रेजी और गुजराती संस्कृत भाषा के भी विद्वान थे।

रामनरेश त्रिपाठी जी की रचनाओं में व्याकरण के नियमों का विशेष रूप से पालन किया गया है। कहीं-कहीं पर लोक प्रचलित शब्द उर्दू के छंदों और संस्कृत के शब्दों का भी प्रयोग देखने को मिलता है।

एक तरफ रामनरेश त्रिपाठी जी की रचनाओं में छायावादी शैली का मानवीकरण देखने को मिलता है, तो दूसरी ओर रूमानियत भी उनकी रचनाओं में यत्र - तत्र दिखाई देती है। 

रामनरेश त्रिपाठी जी का साहित्य में स्थान Ramnaresh tripathi ka sahitya me sthan 

रामनरेश त्रिपाठी जी का साहित्य में स्थान - रामनरेश त्रिपाठी स्वच्छंदतावाद के प्रतिष्ठित कवि हैं, हिंदी काव्य में उन्होंने अपना अमूल्य योगदान दिया है। हिंदी कविता में स्वच्छंदतावाद के जन्मदाता श्रीधर पाठक की काव्य परंपरा को उन्होंने आगे बढ़ाया है।

द्विवेदी युग और छायावाद के मध्य एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में रामनरेश त्रिपाठी जी को बड़े ही सम्मान के साथ जाना जाता है।

दोस्तों इस लेख में आपने  राम नरेश त्रिपाठी का जन्म कब हुआ तथा उनका जीवन परिचय (When was Ramnaresh tripathi born biography) पड़ा आशा करता हूं पहले आपको अच्छा लगा होगा।

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