सूखा आपदा पर निबंध Essay on drought disaster in hindi

सूखा आपदा पर निबंध Essay on drought disaster in hindi 

हैलो दोस्तों आपको बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख सूखा आपदा पर निबंध (Essay on Drought disaster) में। दोस्तों इस लेख के माध्यम से आप सूखा आपदा पर निबंध हिंदी में पड़ेंगे।

दोस्तों यह सूखा आपदा पर निबंध कक्षा 6 से 12 वीं तक के छात्रों के लिए महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकता है, यहाँ से आप सूखा आपदा पर निबंध

लिखने का आईडिया भी ले सकते है। तो आइये दोस्तों शुरू करते है, यह लेख सूखा आपदा पर निबंध:-

सूखा आपदा पर निबंध


सूखा आपदा क्या है what is drought disaster

सूखा एक प्राकृतिक आपदा (Natural Disaster) है, जिसे बहुत से ग्रामीण लोग देवीय शक्ति का प्रकोप और प्राकृतिक प्रकोप भी कहते है।

सूखा एक जल से संबंधित(Water Reletid) स्थिति होती है, जिसमें मिट्टी में पानी की इतनी कमी हो जाती है, कि उसमें दरारें पड़ जाती हैं।

सामान्य तौर पर कह सकते हैं कि एक वह बड़ा भूभाग जहाँ पर कई दिनों से वर्षा ना हुई हो तथा नदी तालाब पोखर आदि सूख गए हो

तथा पृथ्वी का वाटर लेवल भी कम हो गया हो उस स्थिति को सूखा कहा जाता है। ऐसी स्थिति में चारों तरफ पानी की कमी ही कमी दिखाई देती है,

ना पानी सिंचाई के लिए उपलब्ध हो पाता है और ना ही घरेलु कार्यों के लिए कभी-कभी तो इस सूखे की स्थिति में पानी पीने के लिए भी नहीं मिल पाता है इस आपदा में पीने के पानी के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता है।


सूखा आपदा पर निबंध

सूखा की परिभाषा Defination of drought

पानी या जल सभी जीवों की मूलभूत आवश्यकताओं में से सबसे प्रमुख आवश्यकता होती है, जो विभिन्न प्रकार के स्त्रोतों जैसे वर्षा जल पृथ्वी के अंदर का जल नदी तालाबों तथा कुओं से प्राप्त जल से पूरी की जाती है।

किंतु कभी-कभी पानी की मात्रा इतनी कम हो जाती है कि नदी तालाब कुएँ सब सुख जाते हैं, उस स्थिति को हम सूखा कहते हैं।

वैज्ञानिकों ने सूखे की विभिन्न प्रकार की परिभाषाएँ दी है, लेकिन सूखे की सर्वमान्य परिभाषा बरसने वाले पानी की मात्रा पर निर्भर करती है।

वैज्ञानिकों ने सूखे की परिभाषा इस प्रकार दी है, कि वह स्थिति जिसमें किसी भी एक निश्चित क्षेत्र में 25 सेंटीमीटर से कम बरसात होती है।

तो उस स्थिति को सूखा कहा जाता है, तथा उस क्षेत्र को सूखा प्रभावित क्षेत्र कहा जाता है। मौसम विभाग के अनुसार सूखे को 3 वर्गों में बांटा गया है:-

  1. सामान्य सूखा - सामान्य सूखा सूखे की वह स्थिति होती है, जिसमें यथार्थ वर्षा का सामान्य वर्षा से विचलन 11 सेंटीमीटर से 25 सेंटीमीटर के मध्य में रहता है।
  2. मध्यम सूखा - मध्यम सूखा सूखे की स्थिति होती है, जिसमें यथार्थ वर्षा का विचलन सामान्य वर्षा से 26 से 50 प्रतिशत के बीच में होता है।
  3. प्रचंड सूखा - प्रचंड सूखा सूखे की स्थिति है, जिसमें यथार्थ वर्षा का विचलन सामान्य वर्षा से 50% से अधिक होता है। 

सूखा आपदा के कारण Causes of drought disaster

सूखा के दो प्रकार के कारण हो सकते हैं, जिनमें प्राकृतिक और मानव हस्तक्षेप भी शामिल है। भारत में सूखा आपदा के कारण निम्न प्रकार के हैं :-

भारत में सूखे का सर्वप्रमुख कारण दक्षिणी पश्चिमी मानसून का देरी से आना है। मानसून का असामान्य तरीके से वितरण होना तथा देरी से आना

मानसून का समय से पूर्व आकर समाप्त भी हो जाना आदि भी सूखा आपदा के प्रमुख कारण हो रहे हैं। एलनीनो और ललिनो समुद्री धाराओं के कारण भी विभिन्न प्रकार की अनियमितताएँ उत्पन्न होने लगती है।

किसी क्षेत्र में अत्यधिक वर्षा के कारण बाढ़ उत्पन्न हो जाती है, तो किसी क्षेत्र में मानसून ना पहुंचने के कारण सूखा उत्पन्न हो जाता है।

मानवीय क्रियाकलाप भी सूखा आपदा के कारण बन जाते हैं। बढ़ती जनसंख्या के कारण वनो की अंधाधुंध कटाई वृक्षों का काटा जाना आदि सूखे के कारण को उत्पन्न कर देते हैं।

सिंचाई के लिए भूमिगत जल का अधिक मात्रा में उपयोग करना कृषि में विभिन्न प्रकार के रासायनिक उत्पादों, कीटनाशकों का प्रयोग करना भी सूखा आपदा के कारण माने जाते हैं।

आज बढ़ते हुए औद्योगीकरण के कारण प्रदूषण भी सूखा का कारण माना जा रहा है। इसके साथ अन्य मानव जनित तथा प्राकृतिक कारण

जिनके द्वारा प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से वर्षा तथा वर्षा के साधनों पर प्रभाव पड़ता है उसे सूखा आपदा का कारण माना जाता है।


सूखा के दुष्परिणाम Consequences of drought

सूखा एक प्राकृतिक आपदा है, इसलिए यह विभिन्न प्रकार के दुष्परिणाम भी उत्पन्न करती है सूखा एक ऐसी स्थिति है, जो जल से संबंधित होती है,

और जल मनुष्य जीव जंतुओं तथा वनस्पतियों के जीवन का आधार है, जिस क्षेत्र में सूखा पड़ता है, वहाँ पर दुष्परिणाम बहुत ही घातक देखने को मिलते हैं।

सूखे की स्थिति उत्पन्न होने पर खेत सूख जाते हैं, खेत की मिट्टी सूख जाती है, तथा दरारे पड़ जाती हैं। जिससे फसलें उत्पन्न नहीं हो पाती है, तथा चारों तरफ जल के लिए हाहाकार मच जाती है।

कुएँ, तालाब, पोखर, नलकूप आदि से पानी सूख जाता है। लोगों को पानी पीने के लिए नहीं मिलता है, पीने के पानी के लिए लोग दूर-दूर से पानी की खोज में जाते हैं तथा पानी भरकर लाते हैं।

जिससे उनका समय बर्बाद होता है, और वे अन्य कार्य नहीं कर पाते हैं। आसपास के पशु पक्षी पानी के अभाव में मरने लगते हैं, वनस्पतियाँ पानी के अभाव में सूख जाती हैं।

तथा फल उत्पन्न करना बंद कर देती हैं, पेड़ पौधे मुरझा जाते है, एक प्रकार से पानी के अभाव में चारों तरफ हाहाकार तथा मौत का तांडव ही नजर आता है।


सूखे से बचने के उपाय Ways to avoid drought

सूखे से बचने के लिए विभिन्न प्रकार के उपाय है, इसके लिए सरकार के साथ ही स्वयं मनुष्य को भी व्यक्तिगत प्रयास करना चाहिए।

सूखे से निपटने के लिए सबसे पहले वर्षा जल का संग्रहण वैज्ञानिक पद्धति के आधार पर किया जाना चाहिए, जिससे सूखे की स्थिति में उस जल का उपयोग किया जा सके।

जिन क्षेत्रों में सूखा की स्थिति अधिक उत्पन्न होती है, उन क्षेत्रों में भूमिगत जल भंडारों की खोज की जानी चाहिए तथा उनका उपयोग नियंत्रित तरीके से किया जाना चाहिए।

जिन क्षेत्रों में जल अधिक है, उन क्षेत्रों को निम्न जल क्षेत्रों से छोटी सी नदी पाइपलाइन आदि के माध्यम से जोड़कर उस क्षेत्र में सूखे की स्थिति से निपटा जा सकता है।

सूखा प्रभावित क्षेत्र में अधिक से अधिक वृक्षों को लगाना चाहिए जो बरसात के पानी को सोखते हैं तथा भूमिगत जल स्तर को बढ़ाने में मदद करते हैं।


भारत के सूखा प्रभावित क्षेत्र Drought affected areas of india

भारत के कई ऐसे क्षेत्र हैं, जो सूखे की स्थिति से लगातार जूझ रहे हैं, जिनमें से सबसे पहले नाम आता है "राजस्थान का"  राजस्थान के पश्चिमी भाग जो अरावली पर्वत श्रेणी से सटा हुआ है, तथा यह भाग मरुस्थल है,

इसलिए सूखा प्रभावित क्षेत्र के अंतर्गत आता है। इसके साथ ही गुजरात का कच्छ का क्षेत्र भी सूखा प्रभावित क्षेत्र है, यहाँ पर बरसात 9 सेंटीमीटर से भी कम होती है।

इसके आलावा महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक का पठार तमिलनाडु के उत्तरी क्षेत्र के भूभाग, उड़ीसा के कुछ आंतरिक भूभाग सूखा प्रभावित क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं।

सूखा प्रभावित क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश का दक्षिण भाग बुंदेलखंड कोकण क्षेत्र भी आता है, जहाँ 32 सेंटीमीटर से भी कम बरसात होती है।

इसके साथ ही भारत में बढ़ती जनसंख्या तथा ओधोगीकारण से वनो का सफाया किया जा रहा है, और ऐसे क्षेत्र सूखा प्रभावित क्षेत्र में तब्दील होते जा रहे है। 

दोस्तों इस लेख में आपने सूखा आपदा निबंध (Essay on Drought Disaster) पड़ा आशा करता हुँ, यह लेख आपको अच्छा लगा होगा।

  • FAQ For Essay on Drought

Q.1. सूखे का प्रमुख कारण क्या है?

Ans. सूखे का सबसे प्रमुख कारण वृक्षों का कटना और जलवायु परिवर्तन है।

Q.2. सूखा प्रभावित राज्य कौन से है?

Ans. भारत में सूखा प्रभावित राज्य राज्यस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तरप्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक उड़ीसा आदि है।

Q.3. सूखा से बचने के उपाय क्या है?

Ans. सूखा से बचने के लिए वृक्षारोपण किया जाना चाहिए साथ ही पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित किया जाना चाहिए।

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