काल भैरव के 108 नाम का जाप kaal bhairav ke 108 name ka jaap

काल भैरव के 108 नाम का जाप kaal bhairav ke 108 name ka jaap 

हैलो नमस्कार दोस्तों इस लेख काल भैरव के 108 नाम का जाप (108 Names of kaal bhairav and jaap) में आपका बहुत - बहुत स्वागत है।

दोस्तों आज आप इस लेख के माध्यम से भगवान भोलेनाथ के अवतार काल भैरव के बारे में जानेंगे, इसके साथ ही काल भैरव के 108 नाम का जाप, काल भैरव कौन है, काल भैरव किसके अवतार है,

काल भैरव की उत्पत्ति के साथ अन्य तथ्यों के बारे में जानेंगे। तो आइये दोस्तों शुरू करते है, यह लेख काल भैरव के 108 नाम का जाप :-

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काल भैरव के 108 नाम का जाप

काल भैरव कौन है who is kaal bhairav 

काल भैरव भगवान शिव शंकर के ही अवतार अंश माने जाते है। काल भैरव की सवारी कुत्ता है। काल भैरव ने संसार के सभी तीर्थ स्थानों का भ्रमण किया

और काशी में स्थायी निवास किया। काल भैरव की पूजा मंगलवार, शनिवार मध्य रात्रि 12 से 3 के मध्य की जाने पर मनुष्य मनोवांछित फल प्राप्त करता है।

काल भैरव पर भैरव चालीसा मन्त्र का जाप हवन और चमेली के फूल चढ़ाने से व्यक्ति सफलता नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षित, मृत्यु के भय से मुक्त तथा राहु केतु की दशाओं से भी मुक्त हो जाता है।

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काल भैरव के 108 नाम का जाप


काल भैरव के 108 नाम का जाप kaal bhairav ke 108 name ka jaap

काल भैरव के 108 नाम निम्नप्रकार से क्रम में दिए गए है:- 

1. ॐ ह्रीं भैरवाय नम:
2. ॐ ह्रीं भूतनाथाय नम:
3. ॐ ह्रीं भूतात्मने नम:
4. ॐ ह्रीं भू-भावनाय नम:
5. ॐ ह्रीं क्षेत्रज्ञाय नम:
6. ॐ ह्रीं क्षेत्रपालाय नम:
7. ॐ ह्रीं क्षेत्रदाय नम:
8. ॐ ह्रीं क्षत्रियाय नम:
9. ॐ ह्रीं विराजे नम:
10. ॐ ह्रीं श्मशानवासिने नम:
11. ॐ ह्रीं मांसाशिने नम:
12. ॐ ह्रीं खर्पराशिने नम:
13. ॐ ह्रीं स्मारान्तकृते नम:
14. ॐ ह्रीं रक्तपाय नम:
15. ॐ ह्रीं पानपाय नम:
16. ॐ ह्रीं सिद्धाय नम:
17. ॐ ह्रीं सिद्धिदाय नम:
18. ॐ ह्रीं सिद्धिसेविताय नम:
19. ॐ ह्रीं कंकालाय नम:
20. ॐ ह्रीं कालशमनाय नम:
21. ॐ ह्रीं कला-काष्ठा-तनवे नम:
22. ॐ ह्रीं कवये नम:
23. ॐ ह्रीं त्रिनेत्राय नम:
24. ॐ ह्रीं बहुनेत्राय नम:
25. ॐ ह्रीं पिंगललोचनाय नम:
26. ॐ ह्रीं शूलपाणाये नम:
27. ॐ ह्रीं खड्गपाणाये नम:
28. ॐ ह्रीं धूम्रलोचनाय नम:
29. ॐ ह्रीं अभीरवे नम:
30. ॐ ह्रीं भैरवीनाथाय नम:
31. ॐ ह्रीं भूतपाय नम:
32. ॐ ह्रीं योगिनीपतये नम:
33. ॐ ह्रीं धनदाय नम:
34. ॐ ह्रीं अधनहारिणे नम:
35. ॐ ह्रीं धनवते नम:
36. ॐ ह्रीं प्रतिभागवते नम:
37. ॐ ह्रीं नागहाराय नम:
38. ॐ ह्रीं नागकेशाय नम:
39. ॐ ह्रीं व्योमकेशाय नम:
40. ॐ ह्रीं कपालभृते नम:
41. ॐ ह्रीं कालाय नम:
42. ॐ ह्रीं कपालमालिने नम:
43. ॐ ह्रीं कमनीयाय नम: 
44. ॐ ह्रीं कलानिधये नम:
45. ॐ ह्रीं त्रिलोचननाय नम: 
46. ॐ ह्रीं ज्वलन्नेत्राय नम: 
47. ॐ ह्रीं त्रिशिखिने नम: 
48. ॐ ह्रीं त्रिलोकभृते नम: 
49. ॐ ह्रीं त्रिवृत्त-तनयाय नम: 
50. ॐ ह्रीं डिम्भाय नम: 
51. ॐ ह्रीं शांताय नम: 
52. ॐ ह्रीं शांत-जन-प्रियाय नम: 
53. ॐ ह्रीं बटुकाय नम:
54. ॐ ह्रीं बटुवेषाय नम: 
55. ॐ ह्रीं खट्वांग-वर-धारकाय नम:
56. ॐ ह्रीं भूताध्यक्ष नम: 
57. ॐ ह्रीं पशुपतये नम: 
58. ॐ ह्रीं भिक्षुकाय नम: 
59. ॐ ह्रीं परिचारकाय नम: 
60. ॐ ह्रीं धूर्ताय नम:
61. ॐ ह्रीं दिगंबराय नम:
62. ॐ ह्रीं शौरये नम: 
63. ॐ ह्रीं हरिणाय नम: 
64. ॐ ह्रीं पाण्डुलोचनाय नम: 
65. ॐ ह्रीं प्रशांताय नम: 

66. ॐ ह्रीं शां‍तिदाय नम: 
67. ॐ ह्रीं शुद्धाय नम:
68. ॐ ह्रीं शंकरप्रिय बांधवाय नम: 
69. ॐ ह्रीं अष्टमूर्तये नम: 
70. ॐ ह्रीं निधिशाय नम: 
71. ॐ ह्रीं ज्ञानचक्षुषे नम: 
72. ॐ ह्रीं तपोमयाय नम:
73. ॐ ह्रीं अष्टाधाराय नम: 
74. ॐ ह्रीं षडाधाराय नम:
75. ॐ ह्रीं सर्पयुक्ताय नम:
76. ॐ ह्रीं शिखिसखाय नम: 
77. ॐ ह्रीं भूधराय नम: 
78. ॐ ह्रीं भूधराधीशाय नम: 
79. ॐ ह्रीं भूपतये नम: 
80. ॐ ह्रीं भूधरात्मजाय नम: 
81. ॐ ह्रीं कपालधारिणे नम: 
82. ॐ ह्रीं मुण्डिने नम: 
83. ॐ ह्रीं नाग-यज्ञोपवीत-वते नम: 
84. ॐ ह्रीं जृम्भणाय नम: 
85. ॐ ह्रीं मोहनाय नम: 
86. ॐ ह्रीं स्तम्भिने नम: 
87. ॐ ह्रीं मारणाय नम: 
88. ॐ ह्रीं क्षोभणाय नम: 
89. ॐ ह्रीं शुद्ध-नीलांजन-प्रख्य-देहाय नम: 
90. ॐ ह्रीं मुंडविभूषणाय नम: 
91. ॐ ह्रीं बलिभुजे नम: 
92. ॐ ह्रीं बलिभुंगनाथाय नम: 
93. ॐ ह्रीं बालाय नम: 
94. ॐ ह्रीं बालपराक्रमाय नम: 
95. ॐ ह्रीं सर्वापत्-तारणाय नम: 
96. ॐ ह्रीं दुर्गाय नम: 
97. ॐ ह्रीं दुष्ट-भूत-निषेविताय नम:
98. ॐ ह्रीं कामिने नम:
99. ॐ ह्रीं कला-निधये नम:
100. ॐ ह्रीं कांताय नम:
101. ॐ ह्रीं कामिनी-वश-कृद्-वशिने नम:
102. ॐ ह्रीं जगद्-रक्षा-कराय नम:
103. ॐ ह्रीं अनंताय नम:
104. ॐ ह्रीं माया-मन्त्रौषधी-मयाय नम:
105. ॐ ह्रीं सर्वसिद्धि प्रदाय नम:
106. ॐ ह्रीं वैद्याय नम:
107. ॐ ह्रीं प्रभविष्णवे नम: 
108. ॐ ह्रीं विष्णवे नम :

काल भैरव किसका अवतार है kaal bhairav kiska avtar hai 

शिव पुराण में बताया जाता है, कि काल भैरव स्वयं महादेव के अवतार है, जिनकी उत्पत्ति की कई कथाएँ प्रचलित है।

एक कथा के अनुसार बताया जाता है कि प्रजापति दक्ष की कन्या सती ने अपने पिता की इक्षा के विरुद्ध जाकर शिव शंकर से विवाह किया था।

कियोकि दक्ष शिव शंकर की महता को नहीं जानता था। एक बार प्रजापति दक्ष ने एक महायज्ञ का आयोजन किया।. जिसमें ब्रम्हा, विष्णु सहित सभी देव और ऋषि मुनि शामिल थे।

किन्तु प्रजापति दक्ष ने अपनी कन्या सती और जमाता भोलेनाथ को आमंत्रित ही नहीं किया। जब माता सती को पिता दक्ष के यज्ञ के बारे में ज्ञात हुआ

तो वह बहुत दुखी हुई और भगवान भोलेनाथ के बार बार मना करने पर वे दक्ष के यज्ञ में पहुँच गयी। जहाँ पर प्रजापति दक्ष ने भगवान भोलेनाथ का अपमान किया

उनके लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया। जिसके कारण माँ सती ने यज्ञ के कुंड में स्वयं का दाह कर दिया।

जब भगवान भोलेनाथ को माँ सती के बारे में ज्ञात हुआ तो उनके काल भैरव रूप ने प्रजापति दक्ष का वध कर दिया।

काल भैरव की उत्पत्ति Kaal bhairav ki utpatti 

काल भैरव की उत्पत्ति से सम्बंधित कई कहानियाँ है। काल भैरव को भगवान भोलेनाथ का ही रूप माना जाता है।

एक बार जब ब्रम्हा और श्रीहरि विष्णु को संसार की सृष्टि का श्रेष्ठ रचनाकार होने पर अहम् हो गया। तो उन्होंने वेदों से अपनी श्रेष्ठता के बारे में पूँछा।

तो वेदों ने शिव शंकर जी को सबसे श्रेष्ठ बताया। जिस पर ब्रम्हा जी हँस पड़े। और शिवजी के प्रति अपमानजनक शब्द कहे जिससे भोलेनाथ ब्रम्हा जी से क्रूद्ध हो गए और एक काला अवतार धारण किया।

जिसे काल भैरव कहा गया। इस काल भैरव ने ब्रम्हा जी के 5 वें मस्तक को धड से अलग कर दिया। और ब्रम्ह हत्या से मुक्त होने के लिए संसार के सभी तीर्थ स्थानों के दर्शन किये।

किन्तु वें ब्रम्ह हत्या से मुक्त काशी में हुए। जहाँ वें आज भी निवास करते है। और महाकाल (Mahakaal) के नाम से जाने जाते है।

दोस्तों इस लेख में आपने काल भैरव के 108 नाम (108 Names of kaal bhairav) के साथ काल भैरव किसके अवतार थे और उनकी उत्पत्ति के बारे में पढ़ा आशा करता हूं यह लेख आपको अच्छा लगा होगा।

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