सुमित्रा का जीवन परिचय Sumitra ka jivan parichay

सुमित्रा का जीवन परिचय Sumitra ka jivan parichay 

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है इस लेख सुमित्रा का जीवन परिचय (Biography of Sumitra) में। दोस्तों इस लेख के माध्यम से आप अयोध्या के महाराज दशरथ की तीसरी रानी सुमित्रा का जीवन परिचय जानेंगे।

इसके साथ ही आप जानेंगे की सुमित्रा का जन्म कहाँ हुआ था, सुमित्रा का असली नाम क्या था आदि। तो आइये दोस्तों जानते है सुमित्रा का जीवन परिचय:-

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सुमित्रा का जीवन परिचय


सुमित्रा का जन्म स्थान कहाँ है, Sumitra ka janm sthan kahan hai 

सुमित्रा माता का जन्म चंद्रकला नामक स्थान पर हुआ था, उस देश का राजा सुमंत था। महाराज सुमंत की छियासठ रानियाँ थी।

उनमें बड़ी रानी का नाम था चंद्रमणी। एक बार रानी चन्द्रमणी महाराज सुमंत के पास सम्पूर्ण श्रृंगार करके गई, जिससे राजा उन पर आशक्त हो गए।

कुछ दिन बाद रानी को पता चला की वह गर्भवती है। जिससे महाराज सुमंत भी अधिक प्रसन्न हुए। महाराज सुमंत ने सभी ब्राह्मणों और साधु-संतों को दिल खोलकर दान किया।

उस समय पूरे राज्य में खुशी का माहौल था। महारानी चंद्रमणी ने 10 महीने 5 दिन में एक पुत्री को जन्म दिया, जो चंद्र के समान उज्जवल तथा शांत थी।

पुत्री के जन्म के पश्चात महाराजा सुमंत अत्यंत प्रसन्न हुए। तथा उनके नामकरण के लिए ऋषि-मुनियों को बुलाया गया तथा उनका नाम सुमित्रा रखा गया। 

सुमित्रा के माता पिता का क्या नाम था Sumitra ke Mata - Pita ka naam kya tha 

महारानी सुमित्रा अयोध्या नरेश राजा दशरथ की तीसरी पत्नी थी। जिन्होंने एक पुत्री एक पत्नी एक सौतन एक माता तथा एक विमाता का दायित्व बिना विचलित होते हुए निभाया।

महारानी सुमित्रा एक धैर्यवान सबसे होशियार निर्भीक तथा कर्मठ महिला थी। ऐसी आदरणीय नारी ममतामयी माता, तथा पतिव्रत पत्नी सुमित्रा की माता का नाम चन्द्रमणी तथा पिता का नाम महाराज सुमंत था।

जो सुमित्र देश के राजा थे। इस सुमित्र देश को चंद्रकला नगर भी कहा जाता था। महारानी सुमित्रा का मायका चंद्रकला नगर था। 

सुमित्रा का असली नाम क्या है Sumitra ka asli naam kya hai 

महारानी सुमित्रा सुमित्र देश की राजकुमारी थी इसलिए उनका नाम सुमित्रा पड़ गया। किन्तु सुमित्रा का असली नाम पूर्णावती था।

पूर्णावती नाम उनका वास्तविक नाम था तथा उन्हें उनके राज्य में इसी नाम से बुलाते थे। जब भी उनके महल में कोई भी मांगलिक कार्य होते थे

तो सुमित्रा को ही चौक पूरने के लिए बुलाया जाता था कियोकि वे सबसे अच्छे चौक पूरती थी। इसलिए उनका नाम भी पूर्णावती हो गया था। 

महारानी सुमित्रा के कितने पुत्र थे Maharani sumitra ke kitne putra the 

महारानी सुमित्रा अयोध्यापति महाराजा दशरथ की तीसरी पत्नी थी। महाराजा दशरथ को जब पहली पत्नी कौशल्या और दूसरी पत्नी कैकई से पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई तब उन्होंने महारानी सुमित्रा के साथ विवाह किया।

किंतु दुर्भाग्यवश महारानी सुमित्रा के गर्भ से भी संतान की उत्पत्ति नहीं हुई। महाराजा दशरथ ने संतान प्राप्ति के लिए यज्ञ करवाया जिसमें से खीर के दो दौने निकले

एक खीर का दोना माता कौशल्या को तथा दूसरा खीर का दोना माता केकई को दिया गया। तब माता कौशल्या और माता कैकई ने अपनी-अपनी खीर में से आधा हिस्सा सुमित्रा को दे दिया।

इस प्रकार से सुमित्रा ने लक्ष्मण को जन्म दिया जो महारानी कौशल्या की खीर का भाग था। और महारानी कैकई ने भी अपनी खीर में से आधा हिस्सा दिया सुमित्रा को दिया जिससे शत्रुघ्न का जन्म हुआ।

इस प्रकार महारानी सुमित्रा ने लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न को जन्म दिया था। किन्तु वे राम और भरत को अपने पुत्रों से भी ज्यादा प्रेम करती थी।

महारानी सुमित्रा ने अपने दोनों पुत्रों को श्रीराम और भरत की सेवा में समर्पित कर दिया था उन्होंने लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न को द्वेष, मद, क्रोध, लालच से दूर रहकर मन वचन तथा कर्म से अपने भाइयों की सेवा करने का आदेश दिया। 

दोस्तों इस लेख में आपने महारानी सुमित्रा का जीवन परिचय (Biography of queen sumitra) पड़ा। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा। 

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