भगवान विष्णु का पहला अवतार Bhagvan vishnu ka pahla avtar

भगवान विष्णु का पहला अवतार Bhagvan vishnu ka pahla avtar 

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है। इस लेख भगवान विष्णु का पहला अवतार (God vishnu ka Pahla avtaar) में। दोस्तों इस लेख में आप

श्री हरि विष्णु के पहले अवतार के बारे में जानेंगे कि उन्होंने पहला अवतार कौन सा धारण किया था। तथा क्यों धारण किया था। तो आइये दोस्तों पढ़ते है यह कथा भगवान विष्णु का पहला अवतार:-

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भगवान विष्णु का पहला अवतार


भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार Bhagwan vishnu ka Matsya avtar 

यह कथा उस समय की है जब प्रकृति पर अधर्म, अनीति और अत्याचार का साम्राज्य बढ़ता जा रहा था। तथा पृथ्वी पर भयंकर प्रलय आने वाला था।

पृथ्वी पर प्रलय आने से पहले भगवान ब्रह्मा जी ने वेदों का सृजन किया था। जो मानव जाति के कल्याण तथा प्रकाश का स्रोत माने जाते हैं।

किंतु उस समय के राक्षस राज हायग्रीव ने वेदों को चुरा लिया। इसलिए भगवान विष्णु ने अपना पहला अवतार मत्स्य अवतार धारण किया। तथा हयग्रीव का वध करके सृष्टि को भयंकर प्रलय से बचाया।

भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार की कथा उस समय आरंभ होती है। जब हयग्रीव राक्षस राज के समय ही एक बहुत ही बड़ा धर्मात्मा राजा था जिसका नाम था

"सत्यव्रत" किंतु वह अहंकारी प्रकृति का भी राजा था। एक बार राजा सत्यव्रत कृतवर्मा नदी में नहा रहा था तथा नहाने के बाद वह भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य देने लगा

तभी अचानक उसे किसी जीव की आवाज सुनाई दी जो कह रहा था मेरी रक्षा करो, मेरी रक्षा करो। जब राजा ने अपने हाथों में देखा तो उसके हाथों में एक छोटी मछली थी। जो मनुष्य की भांति बोल रही थी।

तब उसी दिव्य मछली ने कहा हे! राजन मैं एक छोटी मछली हूँ और इस नदी में बहुत सी बड़ी-बड़ी मछलियाँ है। जो छोटी मछलियों को खा लेती हैं।

कृपया आप मेरी रक्षा कीजिए और मुझे अपने साथ अपने राज महल में शरण दीजिए। मेरी रक्षा करना आपका कर्तव्य और धर्म भी है।

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तब राजा ने कहा हे! मत्स्य में तुम्हारी रक्षा अवश्य करूंगा तुम एक तुच्छ जीव हो और मेरा राज महल बहुत बड़ा है। वहाँ पर तुम आराम से रह सकती हो।

ऐसा कहकर राजा सत्यव्रत उस मत्स्य को अपने साथ राजमहल ले आया और उसे एक सोने के बर्तन में रख दिया। किंतु जैसे ही राजा वहाँ से जाने लगा 

उस मछली ने उस राजा को आवाज दी हे! राजन मेरी रक्षा करो यह पात्र मेरे लिए उपयुक्त नहीं है। तब राजा ने पास जाकर देखा कि मत्स्य ने उस पात्र के बराबर का आकार ग्रहण कर लिया है।

और राजा ने पहरेदार से बड़ा पात्र मंगवा कर मछली को कुछ पात्र में रख दिया। किंतु थोड़ी ही देर बाद मछली ने उस पात्र के बराबर का आकार ग्रहण कर लिया।

तब राजा सत्यव्रत बोले हे¡ मत्स्य आप कोई साधारण जल जीव नहीं हो आप अवश्य ही कोई दिव्य जीव हो। मेरा यह राज महल आपके योग्य नहीं है।

मैंने आपको तुच्छ जीव कहा था मुझे उसकी शिक्षा मिल गई है। मैं आपको वापस समुद्र में छोड़ देता हूँ। इस प्रकार से राजा उस मछली को समुद्र में ले गए किंतु

जैसे ही उसने मछली को समुद्र में छोड़ा उस मछली ने समुद्र से भी बड़ा आकार ग्रहण कर लिया। तब राजन बोला हे! दिव्य आत्मा आप साधारण जल जीव नहीं हो आप तो स्वयं श्री हरि विष्णु है।

में राजा सत्यव्रत कर्म, मन और वचन से आपकी शरण में आया हूँ। कृपया करके अपने चतुर्भुज रूप के साक्षात दर्शन दीजिए और इस अवतार का कारण बताइए।

तब भगवान श्री हरि विष्णु ने अपने चतुर्भुज रूप के दर्शन दिए और कहा हे!  राजन आज से ठीक सातवे दिन महा प्रलयंकारी प्रलय आएगा जो पृथ्वी समेत तीनों लोको में भूचाल मचा देगा।

यह रूप मैंने हयग्रीव राक्षस का वध करने के लिए धारण किया है। किंतु जब प्रलय आएगा तब यह समस्त पृथ्वी समुद्र के जल में डूब जाएगी उस समय तुम एक नौका पर सप्त ऋषियों के साथ समस्त आत्माओं औषधियों बीजों को अपने साथ ले लेना।

में समुद्र में प्रलय के समय इसी मत्स्य अवतार में आऊँगा तब तुम वासुकी नाग से अपनी नाव को मेरी सींग से बांध देना तब में तुम्हारी प्रलय से रक्षा करूँगा।

और आत्मज्ञान की शिक्षा दूँगा। दूसरी तरफ भगवान विष्णु ने हयग्रीव राक्षस का उसके पापी सैनिको सहित अन्त करके वेदों को छुड़ा लिया।

और फिर सातवे दिन प्रलय आरम्भ हो गया। समस्त पृथ्वी पर जल ही जल दिखाई दे रहा था। आकाश में बिजलियाँ चमक रही थी।

ज्वालामुखी फुट पढ़ी थी पेड़ पौधे जीव जंतु सब नष्ट हो गए थे। तभी राजा सत्यव्रत (मनु) ने एक नौका पर सभी सप्तऋषियों अनाजों और बीजों को रख लिया।

उनकी नौका समुद्री लहरों में उछलने लगी और नाव में पानी भरने लगा। तभी भगवान विष्णु मत्स्य रूप में प्रकट हुए तथा नाव को मत्स्य से वासुकी नाग द्वारा बांधा गया।

जब प्रलय शांत हुआ तब भगवान विष्णु रूपी मत्स्य उन्हें सुमेरु पर्वत पर ले गए। तथा राजा को आत्मज्ञान प्रदान किया तथा सृष्टि की फिर से शुरुआत हुई। इस प्रकार से भगवान विष्णु के पहले अवतार मत्स्य अवतार की कथा संपन्न हुई।

निष्कर्ष - जब भी धर्म की हानि होती है और पृथ्वी पर अनीति, अधर्म और अत्याचार का शासन बढ़ता है। तब भगवान विष्णु अवश्य ही उसे समाप्त करने के लिए अवतार लेते हैं।

आपने इस लेख में भगवान विष्णु का पहला अवतार मत्स्य अवतार (God vishnu ka pahla avtaar) के बारे में पढ़ा। आशा करता हूँ यह लेख आपको अच्छा लगा होगा कृपया इस लेख पर कमेंट जरूर करें और इसे शेयर करना ना भूलें।

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