ध्वनि प्रदूषण पर निबंध Essay on noise pollution in hindi

ध्वनि प्रदूषण पर निबंध Essay on noise pollution in hindi 

हैलो दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है, हमारे इस लेख ध्वनि प्रदूषण पर निबंध (Essay on Noise pollution) में। दोस्तों इस लेख में आप ध्वनि प्रदूषण क्या है?

ध्वनि प्रदूषण के दुष्प्रभाव क्या है? ध्वनि प्रदूषण को किस प्रकार से रोका कैसे जा सकता है? आदि हैडिंग को पड़ सकेंगे।

यह निबंध कक्षा 1 से 12 वीं तथा उच्च कक्षाओं में पूँछा जाता है। तो आइये दोस्तों शुरू करते है यह महत्वपूर्ण आज का लेख ध्वनि प्रदूषण पर निबंध:-


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ध्वनि प्रदूषण पर निबंध

ध्वनि प्रदूषण पर निबंध 200 शब्द Essay on noise pollution in 200 words

  • प्रस्तावना Introduction 

विज्ञान के युग में विज्ञान ने मनुष्य को विभिन्न प्रकार की सुख-सुविधा हेतु प्रदान की हैं, किंतु साथ में ही विभिन्न प्रकार की सुविधाएँ और मुसीबत भी उत्पन्न कर दी हैं।

उन्हीं में से एक है 'ध्वनि प्रदूषण' ध्वनि प्रदूषण आज के समय में एक आम समस्या बन कर उभरी है, जिससे हर एक व्यक्ति जूझ रहा है।

अपने आसपास के वातावरण में उत्पन्न ध्वनि जो हमारे कान नहीं सह पाते हैं उसको ध्वनि प्रदूषण कहते हैं, जिसके कारण मनुष्य तथा जीव - जंतु विभिन्न प्रकार की मानसिक तथा अन्य बीमारियों से जूझ रहे है।

  • कारण तथा निराकरण Causes And Solution 

ध्वनि प्रदूषण का मुख्य कारण बढ़ती हुई जनसंख्या तथा भौतिक विलासी जीवन है। बड़ी-बड़ी कंपनियों में कई मशीनें लगातार दिन रात शोर करती रहती है,

जो असहनीय होता है, तथा वहां के कर्मचारी विभिन्न प्रकार की बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं, जबकि कुछ तो मानसिक संतुलन खो देते हैं

और बहरेपन का शिकार हो जाते हैं। सड़क पर दौड़ रहे वाहन लगातार ध्वनि उत्पन्न करते हैं, इसके साथ ही जेट विमान मिसाइल आदि से भी ध्वनि प्रदूषण होता है.

इसके साथ ही सांस्कृतिक प्रोग्रामों में बजने वाले विभिन्न प्रकार के बैंड बाजे ध्वनि प्रदूषण का कारण है। ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए मनुष्य को स्वयं प्रयास करना

चाहिए फैक्ट्रियों में कर्णबंधकों का उपयोग किया जाना चाहिए तथा मशीनों में साइलेंसर का उपयोग करके ध्वनि को कम किया जाना चाहिए, मोटर गाड़ी में अधिक तेज आवाज करने वाले हॉर्न का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए,

जेट विमान, मिसाइलों आदि का शोर भी कम करने के प्रयास करने चाहिए, शादी विवाह आदि समारोह में गोला बारूद बैंड बाजों का प्रयोग बहुत ही कम करना चाहिए ताकि ध्वनि प्रदूषण पर रोकथाम लगाई जा सके।

  • उपसंहार Conclusion 

आज के समय में ध्वनि प्रदूषण एक विकराल समस्या हो गई है जिससे निजात पाने के लिए मनुष्य को स्वयं ही संघर्ष करना होगा तथा

ध्वनि प्रदूषण उत्पन्न करने वाले यंत्रों पर लगाम लगाना होगा तथा उनका सीमित प्रयोग करना होगा तभी जाकर इस समस्या से निजात पा सकते हैं।

ध्वनि प्रदूषण पर निबंध


ध्वनि प्रदूषण पर निबंध Essay on Noise Pollution

यहाँ पर ध्वनि प्रदूषण पर निबंध (Essay on noise pollution) सरल भाषा में समझाया गया है, यहाँ से आप निबंध लिखने का आईडिया ले सकते है:-


प्रस्तावना Introduction 

एक ऐसी स्थिति जब मनुष्य के कानों को इतनी तीव्र ध्वनि सुनाई देती है, जिससे मनुष्य के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव तथा खतरनाक बीमारियाँ उत्पन्न होने लगती हैं, उस स्थिति को ध्वनि प्रदूषण कहते हैं।

साधारण शब्दों में कह सकते हैं, कि वह स्थिति जिसमें मनुष्य के कान सहनशक्ति से अधिक तेज आवाज (Sound) नहीं सुन सकते उस स्थिति को ही ध्वनि प्रदूषण कहा जाता है।

लगातार वाहनों की तेज आवाज, कारखानों में बजने वाले सायरन, मशीनों की आवाज, कई ध्वनि विस्तारक यंत्र जैसे डीजे इसका मुख्य कारण होते हैं।

इसीलिए ध्वनि प्रदूषण वह प्रदूषण है, जिसमें तेज आवाज से मनुष्य की श्रवण शक्ति, स्वस्थ्य और जीवन कष्टदाई बन जाता है।

ध्वनि प्रदूषण को सामान्य भाषा में शोर कहते हैं। विज्ञान के आधार पर कहा जाता है, कि ध्वनि की तीव्रता मापने की इकाई डेसीबल (Decibel) है।

इसमें हल्की फुसफुसाहट लगभग 10 डेसीबल के बराबर होती है, हल्की बातचीत की बात करें तो वह 20 डेसीबल के आसपास और सामान्य बातचीत 30 डेसीबल के लगभग बराबर होती है।

जबकि वैज्ञानिकों के अनुसार मनुष्य के कान 100 से 120 डेसीबल तक की ध्वनि सुनने के लिए सक्षम होते हैं, किंतु इससे अधिक तीव्र ध्वनि के कारण

मनुष्य कि श्रवण शक्ति और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने लगता है। भारत के ऐसे कई महानगर (Cities) हैं, जहाँ पर आज शोर की मात्रा 100 से 120 डेसीबल तक पहुँच गई है।

उन शहरों में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता का सबसे पहले नाम आता है। इन शहरों में ध्वनि 100 डेसीबल से ऊपर मापी गई है, जबकि इन शहरों के लिए शोर की सीमा 45 डेसीबल निर्धारित की गई थी।

अतः ऐसे शहर जहाँ पर शोर की मात्रा 50 डेसीबल से अधिक मापी गई है, वे शहर ध्वनि प्रदूषित शहरों के अंतर्गत आते हैं।


ध्वनि प्रदूषण के कारण क्या है what is causes of noise pollution 

बढ़ते हुए औद्योगीकरण तथा जनसंख्या (Population) के कारण वर्तमान समय में ध्वनि प्रदूषण के प्रमुख स्रोत निम्न प्रकार से हैं:-

यातायात के साधन - आज का युग विज्ञान का युग कहा जाता है। विज्ञान (Science) ने ऐसी बहुत सी भौतिकवादी वस्तुओं का निर्माण कर दिया है, जिनसे मनुष्य के जीवन में सुख और शांति स्थापित हुई है।

किंतु इसके विपरीत ही बहुत सी समस्याएँ भी उत्पन्न होने लगी हैं। यातायात के क्षेत्र में तीव्र वृद्धि के कारण आज यातायात ध्वनि प्रदूषण का स्रोत बन गया है।

सड़कों पर दौड़ने वाली मोटर, गाड़ी, बस दिन रात तेज ध्वनि करती हैं इसके साथ ही रेलगाड़ी जैसे - शताब्दी एक्सप्रेस, राजधानी एक्सप्रेस

इतनी तीव्र ध्वनि छोड़ते हैं कि आसपास के मकान भी कम्पित हो जाते हैं। इसके साथ ही हवाई जहाज जेट प्लेन भी ध्वनि प्रदूषण के कारण है। 

उद्योग धंधे - जनसंख्या बढ़ने के कारण विज्ञान के युग में अधिक प्रगति हुई है, और विज्ञान के युग में अधिक प्रगति के कारण औद्योगिकरण में भी तीव्र वृद्धि देखने को मिल रही है।

आज बड़े-बड़े शहरों में उद्योगों को स्थापित किया जा रहा है। किंतु उद्योग धंधे ध्वनि प्रदूषण के उत्पन्न करने में सबसे प्रमुख होते हैं।

कुछ उद्योग तो ऐसे होते हैं जिनकी मशीनों से भयंकर तीव्र आवाज निकलती है जिससे वहां काम करने वाले श्रमिकों में विभिन्न प्रकार के रोग जैसे - बहरापन मानसिक संतुलन खोना देखे जा सकते हैं।

मनोरंजन के साधन - प्राचीन काल से ही मनुष्य अपने चित्त और मन को प्रसन्न रखने के लिए मनोरंजन के साधनों का उपयोग करता हुआ आया है।

प्राचीन काल में लोग शिकार करना, चौपड़ खेलना पसंद करते थे। किंतु आज के समय में आधुनिक मनोरंजन के साधन उपलब्ध हो गए हैं।

जिनमें सिनेमा, रेडियो, टेलीविजन, ट्रांजिस्टर ध्वनि विस्तारक यंत्र डीजे आदि प्रमुख हैं। लगातार इन्हें सुनने पर मानसिक तनाव तथा

बहरापन का आभास होने लगता है। इसलिए मनोरंजन के साधन भी एक प्रकार से ध्वनि प्रदूषण के कारण माने जाते हैं।

सांस्कृतिक उत्सव - भारत एक ऐसा देश है, जहाँ पर सभी धर्मों के लोग रहते हैं, इसलिए यहाँ पर विभिन्न प्रकार के त्योहार मनाए जाते हैं।

और भारत को त्योहारों का भी देश कहा जाता है। भारत में खासकर दीपावली, दशहरा तथा विवाह के अवसर पर पटाखे, गोला,बारूद का उपयोग किया जाता है।

यहाँ पर देवी देवताओं को प्रसन्न करने के लिए ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग भी किया जाता है। अखंड रामायण, नमाज तथा अन्य धार्मिक आयोजनों में

विभिन्न ध्वनि प्रदूषण यंत्र उपयोग में लाए जाते हैं। जिससे ध्वनि प्रदूषण तो होता ही है साथ ही लोग और यहाँ तक कि पशु पक्षी भी प्रभावित होते हैं।


ध्वनि प्रदूषण के दुष्प्रभाव bad results of noise pollution 

ध्वनि प्रदूषण भी प्रदूषण की तीव्र घातक कैटेगरी के अंतर्गत आता है, जिसके विभिन्न प्रकार के नुकसान भी होते हैं ध्वनि प्रदूषण के नुकसान निम्न प्रकार से हैं :- ध्वनि प्रदूषण एक ऐसा प्रदूषण है

जो मानव शरीर के साथ ही पशु पक्षियों तथा जानवरों के शरीर पर भी विभिन्न प्रकार के दुष्प्रभाव उत्पन्न कर देता है। एक जर्मन डॉक्टर जैक्सन के अनुसार बताया गया है, कि शोर में शरीर की शिराएँ शिकुड़ जाती हैं।

इसके बाद इन छोटी सी शिराओं में रक्त का बहाव भी कम होने लगता है तथा मनुष्य हृदय संबंधी रोगों से जूझने लगता है और मनुष्य का स्नायु तंत्र भी प्रभावित हो जाता है।

डॉक्टर्स की रिपोर्ट के अनुसार बताया जाता है, कि 80 डेसीबल से अधिक तीव्र ध्वनि बहरापन उत्पन्न कर सकती है। जबकि 100 डेसीबल से तीव्र ध्वनि हमेशा के लिए स्थाई बहरापन उत्पन्न कर सकती है।

डिस्को क्लब ऐसे स्थान होते हैं, जहाँ पर कभी-कभी शोर की मात्रा 140 डेसीबल तक भी पहुंच जाती है और इतना शोर व्यक्ति के स्नायु तंत्र को प्रभावित करने के लिए तथा बहरा पर उत्पन्न करने के लिए काफी होता है।

155 डेसीबल से अधिक मात्रा का शोर त्वचा को भी जला देता है, जबकि 180 डेसीबल से अधिक मात्रा का शोर मनुष्य के लिए भयंकर प्राणघातक होता है और उसकी मृत्यु हो जाती है।

वैज्ञानिकों के एक प्रयोग के अनुसार बताया गया था कि 175 डेसीबल शोर के संपर्क में रखे गए चूहों ने भी अपना दम तोड़ दिया था।

तेज शोर में काम करने से आंखों की पुतलियां फैल जाती हैं, मांसपेशियां खिंच जाती हैं, हृदय की धड़कन तेज होने लगती है, रक्त वाहिनियाँ सिकुड़ जाती हैं और हृदय रोग उत्पन्न होने लगते हैं।

पाचन क्रिया प्रजनन क्रिया में गड़बड़ होने लगती है, जबकि तेज शोर में काम करने वाली और रहने वाली गर्भवती महिलाओं के गर्भ में पल रहे बच्चों की आकृति भी विकृत पड़ जाती है।

रक्त दबाव बढ़ने लगता है, तथा एड्रीनलीन हार्मोन (Adrenaline hormone) अधिक मात्रा में श्राव होता है, चिंता और घबराहट उत्पन्न होने लगती है।

इसलिए कहा जा सकता है, कि शोर से मनुष्य के शरीर के प्रत्येक क्रियाओं पर बुरा प्रभाव पड़ता है, और मनुष्य की मृत्यु भी हो जाती है।


ध्वनि प्रदूषण के रोकथाम के उपाय Measures to prevent noise pollution

ध्वनि प्रदूषण एक ऐसा प्रदूषण है, जो स्थाई रूप से विभिन्न प्रकार की विकृतियाँ मनुष्य तथा पशु-पक्षियों में उत्पन्न कर देता है, इसीलिए ध्वनि प्रदूषण के रोकथाम के कुछ उपाय निम्न प्रकार से बताया गए हैं:-

  1. अगर ध्वनि प्रदूषण पर प्रतिबंध लगाना चाहते हैं, तो ध्वनि प्रदूषण के लिए व्यापक अभियान चलाया जाना बहुत ही आवश्यक हो गया है।
  2. इसके कुप्रभाव को रोकने के लिए कानून बनाने के साथ ही साथ लोगों को शोरगुल के खतरे के बारे में भी बताना अत्यंत लाभकारी होगा।
  3. लोगों को शोरगुल के दुष्प्रभाव से अवगत कराना चाहिए मोटर लाउडस्पीकर और बैंड बाजा के अंधाधुंध प्रयोग को रोकने के लिए वर्तमान कानून अपर्याप्त है।
  4. इसीलिए सरकार के द्वारा खटारा मोटर गाड़ी आदि को आवासीय क्षेत्रों से निकालने पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए। इसी तरह नगर के तीव्र ध्वनि उत्पन्न करने वाले वाहनों का प्रवेश वर्जित कर देना चाहिए
  5. यातायात के नियमों (Transport Rule) का कठोरता से पालन होना चाहिए, जिससे वाहन चालकों को और कम हॉर्न का प्रयोग करना पड़े और ध्वनि प्रदूषण पर लगाम लगाई जा सके।
  6. हवाई जहाज को विशेष ढाल पर उतारा या चढ़ाया जाना चाहिए, जिससे कम से कम शोर (Sound) उत्पन्न हो सके पटाखों का शोर तथा सिनेमाघरों में गर्जन तर्जन पर अंकुश लगाने के लिए कानून भी बनाना चाहिए।
  7. सरकार को प्रत्येक क्षेत्र में उत्पन्न होने वाले शोर को नापने के लिए डेसीबल इन्वेंट लागू कर देनी चाहिए और जो भी डेसीबल सीमा का उल्लंघन करता है, उनके विरुद्ध तुरंत कड़ी से कड़ी कार्यवाही भी की जानी चाहिए। जो कारखाने शोर उत्पन्न करने वाले हैं, उनको शहरों से दूर बनाया जाना चाहिए।
  8. फैक्ट्री और कारखानों में ध्वनि रोधक यंत्र मशीनों में लगाकर श्रमिकों को भी कर्ण बंधकों का उपयोग भली-भांति करना चाहिए।
  9. इमारतों के नक्शे इस प्रकार से बनाए जाने चाहिए कि जो शोरगुल है वह बाहर ना जा सके इस प्रकार से हम शोर पर काफी हद तक अंकुश लगा सकते हैं और ध्वनि प्रदूषण को कम कर सकते हैं

उपसंहार Conclusion

ध्वनि प्रदूषण स्वस्थ्य के लिए बहुत ही ख़तरनाक है, इसलिए इसे रोकने के लिए सरकार के साथ सभी व्यक्तियों को प्रयास करना चाहिए तथा ध्वनि से सम्बंधित बनाये कानूनों को

सख़्ती से लागू करना चाहिए तभी शोर को कम किया जा सकता है, तथा जीव - जंतुओ में उत्पन्न होने वाली कई विक्रतियों को रोका जा सकता है, इसी में सभी का कल्याण है।

दोस्तों इस लेख में आपने ध्वनि प्रदूषण पर निबंध (Essay on sound Pollution in hindi) पड़ा, आशा करता हूँ, यह लेख आपको अच्छा लगा होगा।

  • FAQ for noise pollution

ध्वनि प्रदूषण से क्या तात्पर्य है?

ध्वनि प्रदूषण से तात्पर्य उस स्थिति से है, जब मनुष्य के कानों को ध्वनि इतनी तीव्र ध्वनि सुनाई देती है, जिससे मनुष्य के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव तथा खतरनाक बीमारियाँ उत्पन्न होने लगती हैं।


ध्वनि प्रदूषण से क्या हानि है?

ध्वनि प्रदूषण से ह्रदय, रक्तचाप, बहरापन, पागलपन जैव रासायनिक क्रियाओं में अनियमिततायें आदि विकार उत्पन्न होते है।


ध्वनि प्रदूषण की इकाई क्या है?

ध्वनि प्रदूषण की इकाई डेसिबल है जिसका मान्य 0 से 130 होता है।

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