कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध

कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध kanya bhroon hatya par nibandh

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, आजके इस लेख कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध में। दोस्तों इस लेख में आप जानेंगे की कन्या भ्रूण हत्या क्या है और उसके परिणाम क्या होते है।

दोस्तों यह निबंध कक्षा 5 से लेकर 12 वीं तक और उच्च कक्षाओं के साथ ही कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पूँछा जाता है। यहाँ से आप निबंध लिखने का आइडिया भी ले सकते है, तो आइये दोस्तों करते है शुरू यह लेख कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध:-

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कन्या भ्रूण हत्या क्या है kanya bhroon hatya kya hai

रक्त परीक्षण, अल्ट्रासाउंड तथा अन्य मेडिकल तकनीकी Technology के द्वारा जब माँ के गर्भ में पल रहे शिशु के लिंग का निर्धारण कर लिया जाता है, तब उसे भ्रूण परीक्षण कहा जाता है।

इस भ्रूण परीक्षण में यह ज्ञात हो जाता है, कि माँ के गर्भ में पल रहा भ्रूण पुरुष है या स्त्री। यदि माँ के गर्भ में पल रहा भ्रूण स्त्री होता है, तब उस भ्रूण को नष्ट कर दिया जाता है।

अर्थात उस कन्या को जन्म लेने से पहले ही मार देना कन्या भ्रूण हत्या कहलाता है। कन्या भ्रूण हत्या एक सामाजिक अपराध होने के साथ ही कानूनन अपराध है।

किंतु पुरानी विचारधाराओं के लोग अब भी यह शर्मनाक हरकत करने से बाज नहीं आ रहे हैं, जो हमारे समाज संस्कृति के लिए एक कलंक एक धब्बा है।

भारतीय संस्कृति दुनिया की सबसे प्राचीन संस्कृति है जिसमें महिलाओं को सबसे महान तथा देवियों का दर्जा भी दिया जाता है।

संस्कृत में भी कहा गया है, यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता अर्थात जहाँ पर नारियों का आदर सम्मान होता है, वहाँ पर देवता निवास करते हैं, किंतु आज के समय में यह उक्ति झूठी होती हुई दिखाई देती है,

जबकि कन्या ही इस जीवन का आधार है, कन्या के बिना जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती। क्योंकि एक कन्या ही माँ होती है, एक कन्या बहन होती है

और एक कन्या ही वह है जो एक पुरुष की पत्नी उसकी जीवनसंगिनी होती है। लेकिन पुरुष सत्तात्मक विचारधारा और रूढ़िवादी विचारधारा को मानने वाले लोग आज भी पुरुषों को अधिक महत्व देते हैं।

जिस कारण कन्या भ्रूण हत्या जैसे सामाजिक और कानूनन अपराध जैसी घटनाएँ समाज में होती रहती है और समाज दूषित होता रहता है। 

कन्या भ्रूण हत्या के कारण kanya bhroon hatya ke kaaran

माता के गर्भ में लिंग परीक्षण करके यह ज्ञात कर लेना की गर्भ में पल रही संतान स्त्री है या पुरुष भ्रूण परीक्षण कहलाता है और अगर वह भ्रूण स्त्री होती है तो उसको नष्ट कर दिया जाता है।

जिसे कन्या भ्रूण हत्या कहा जाता है। जिसके कारण कई प्रकार के हैं, अधिकतर लोग मानते हैं कि केवल लड़के ही माता-पिता के मोक्ष का कारण होते हैं, जबकि लड़कियाँ उन पर बोझ होती है।

लड़कियाँ कमाई का साधन नहीं होती जबकि लड़के कमाई का साधन होते हैं , रूढ़िवादी विचारधारा के लोग कन्या भ्रूण हत्या के सबसे अधिक उत्तरदाई होते हैं।

ससुराल पक्ष के पति, ससुर-सास आदि बहू पर दबाव बनाते हैं, कि वह कन्या भ्रूण को नष्ट करें। समाज में होने वाली महिलाओं के प्रति असुरक्षा की भावना महिलाओं के साथ होने वाला अन्याय और दुर्व्यवहार भी कन्या भ्रूण हत्या के कारण माने जाते हैं।

दहेज प्रथा भी कन्या भ्रूण हत्या का मुख्य कारण है, क्योंकि जैसे ही किसी परिवार में बच्ची पैदा होती है तो माता-पिता उसके पालन-पोषण उसकी शिक्षा का ध्यान नहीं देते बल्कि

उसकी शादी उसके दहेज पर ध्यान देने लगते हैं और उन्हें बच्ची की दहेज और उसकी शादी की चिंता सताती रहती है। दहेज के अभाव में कई पढ़ी-लिखी अच्छी लड़कियाँ आयोग्य लड़कों के साथ ब्याह दी जाती हैं।

समाज में पनप रहे कई प्रकार के व्यापार के माध्यम से लड़कियों को फसाया जाता है और उनकी जिंदगी बर्बाद हो जाती हैं।

लड़के के जन्म पर जो खुशी परिवार में होती है, वह खुशी लड़की के जन्म पर कदापि नहीं होती कई रूढ़ीवादी लोग लड़कियों के जन्म को अशुभ और असगुन के रूप में भी मानते हैं।  

कन्या भ्रूण हत्या के समाज पर प्रभाव kanya bhroon hatya ke samaaj par prabhaav

कन्या भ्रूण हत्या का परिवार, समाज तथा देश पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। कियोकि जो संस्कार, शिक्षा एक बच्चे को माँ दे सकती है, वह पिता नहीं दे सकता।

इसलिए समाज का आधार ही स्त्री है, स्त्री के बिना समाज और परिवार मर्यादाहीन ही हो जाते है। कन्या भ्रूण हत्या जैसी कलंकित घटनाओं द्वारा वर्तमान में स्त्रियों की संख्या कम होती जा रहीं है,

जिससे कई पुरुष अविवाहित रह जाते है। वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार भारत में 1000 पुरषों पर 933 स्त्रियों का अनुपात था।

जो 2011 में बढकर 943 हो गया है। भारत में सबसे अधिक लिंगानुपात केरल राज्य में 1000 पुरषों पर 1084 स्त्रियाँ जबकि सबसे कम हरियाणा राज्य में 1000 पुरषों पर 879 स्त्रियाँ ही है।

कियोकि कन्या को जन्म लेने से पहले ही मार दिया जाता है। जो भारतीय संस्कृति तथा समाज के मुख पर कालिख है। समाज में स्त्रियों की संख्या कम होने लगी है जिसके कारण कई लोग अविवाहित रह जाते है।

और वे छोटी भोली-भाली बच्चियों के साथ बलात्कार जैसी घटनाओं को अंजाम देते है। कभी - कभी सामूहिक गैंगरेप जैसी घटनाएँ भी सामने आती है।

इस कारण महिलाएं तथा लड़कियाँ समाज में डरी - सहमी असुरक्षा की भावना महसूस करती है। और अपने जीवन की कई आकांक्षाओं को अपने दिल में ही दबा लेती है।.

कन्या भ्रूण हत्या रोकने के उपाय kanya bhroon hatya rokane ke upaay

भ्रूण की जांच करना और कन्या होने पर नष्ट कर देना  एक दुष्टकृत्य कार्य होता है। इसलिए कन्या भ्रूण हत्या कानूनन अपराध है।

भारत सरकार ने कन्या भ्रूण हत्या अधनियम 1994 पारित किया जो 1 जनवरी 1996 से लागू किया गया। इस अधिनियम में कन्या भ्रूण हत्या के संदर्भ में 34 धारायें तथा 12 भाग है।

जिसके तहत कन्या भ्रूण हत्या करने वाले और कराने वाले के लिए कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। इसलिए कन्या भ्रूण हत्या कानून को कठोरता से लागू करना चाहिए।

सभी चिकित्सालयों में लिंग परीक्षण पर पूर्णतः प्रतिबन्ध लगा देना चाहिए और जो भी लोग इसमें लिप्त हो उन्हें कठोर से कठोर सजा देनी चाहिए।

समाज में शिक्षा का प्रचार प्रसार करना चाहिए समाज के द्वारा और सरकार के द्वारा लड़कियों को सुरक्षा प्रदान करना चाहिए, सामाजिक बुराइयाँ दहेज प्रथा आदि का विरोध करना चाहिए

और उन्हें समाज से हटा देना चाहिए जिससे कि लड़कियाँ खुले वातावरण में चैन की सांस लेकर जीवन जी सकें और अपने परिवार पर बोझ ना बन सके।

महिलाओं और लड़कियों के प्रति हो रहे अत्याचार के लिए सरकार को कठोर से कठोर कदम उठाने चाहिए। महिलाओं के लिए महिला सुरक्षा हेल्पलाइन की

शुरूआत इस प्रकार की जानी चाहिए कि उनकी मदद जल्द से जल्द हो सके तथा अपराधी व्यक्ति को तुरंत कठोर से कठोर सजा सुनाई जा सके।

समाज के पढ़े-लिखे लोगों को कन्या भ्रूण हत्या जैसे अपराधों को कम करने के लिए समाज में कन्याओं की स्थिति को मजबूत बनाना चाहिए।

समाज के प्रत्येक वर्ग को कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रयास करने चाहिए। साक्षर लड़के लड़कियों को अनपढ़ तथा देहाती लोगों को कन्या भ्रूण हत्या के दुष्परिणामों के बारे में समझाना चाहिए।

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ उक्त नारे के साथ देश भर की विभिन्न एनजीओ तथा अंतरराष्ट्रीय एनजीओ को कन्या भ्रूण हत्या की रोकथाम के प्रभावी कदम उठाना चाहिए।

नुक्कड़ नाटकों के द्वारा जुलूस, प्रचार प्रसार के माध्यम से एनजीओ और एनजीओस वर्कर को कन्या भ्रूण हत्या को कम करने का प्रयास करना चाहिए।

पढ़े लिखे लोगों को और लड़के लड़कियों को समाज में फैली विभिन्न बुराइयों जैसे दहेज प्रथा का विरोध करना चाहिए और ना ही दहेज लेना चाहिए और ना ही दहेज देना चाहिए। ताकि लोग बेटियों को बोझ ना समझे और वह स्वछन्द रूप से जीवन जी सकें। 

समाज के लोगों को बेटी को बोझ ना समझ कर उसे गर्व महसूस करना चाहिए। कि उसके घर में साक्षात लक्ष्मी देवी प्रकट हुई हैं जिनसे ही इस सृष्टि का आधार है, क्योंकि बेटियाँ ही माँ होती है जो बच्चों को जन्म देती है।

उपसंहार Conclusion 

नर और नारी दोनों समाज रुपी वाहन के दो पहिये इसलिए समाज के लिए जितनी प्रतिष्ठा नर के लिए है उतनी नारी के लिए भी होनी चाहिए।

अगर दोनों में से एक नहीं है तो समाज रुपी वाहन का चलना मुश्किल हो जाता है। कियोकि स्त्री और पुरुष दोनों समाज के आधार है।

इस बात को सभी लोगों को स्वीकार करना ही होगा तथा स्त्री को समाज परिवार और देश के प्रत्येक कार्यक्षेत्र में बराबर हिस्सा देना चाहिए। तभी जाकर कन्या भ्रूण हत्या जैसी घटनाओं पर काबू पा सकते है।

दोस्तों आपने इस लेख में कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध पड़ा। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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