कलम की आत्मकथा पर निबंध Essay on autobiography of pen in hindi 

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है, आज के हमारे इस लेख एक कलम की आत्मकथा पर निबंध में। इस लेख के माध्यम से आप कलम की आत्मकथा हिंदी में पड़ेंगे।

यह कलम की आत्मकथा पर निबंध कक्षा एक से लेकर बारहवीं तथा उच्च कक्षाओं में हमेशा पूछा जाता है, इसलिए आप यहाँ से कलम की आत्मकथा पर निबंध लिखने का आईडिया भी ले सकते हैं।

यहाँ पर कलम की आत्मकथा पर निबंध मुख्य हैडिंग्स के साथ समझाने का प्रयास किया गया है, तो आइए दोस्तों करते हैं, आज का यह लेख शुरू कलम की आत्मकथा पर निबंध है:- 

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कलम की आत्मकथा पर निबंध


प्रस्तावना Preface

मेरा नाम कलम है। मैं दुनिया के प्रत्येक व्यक्ति के द्वारा परिचित हूँ। सभी मुझे अच्छी तरह से जानते हैं। मेरा यह नाम कलम अरबी भाषा से हिंदी भाषा में आया हुआ है। जबकि मुझे संस्कृत में लेखनी कहा जाता है।

लेखनी का अर्थ होता है, लिखने का औजार। वैसे तो मैं एक साधारण सी संरचना वाली वस्तु हूँ, किंतु यह इतिहास गवाह है, कि मैंने कई बड़े - बड़े आंदोलन और राजनीतिक परिवर्तन किये हैं।

मेरे ही कारण कई युद्ध और मानव संघर्ष शांतिपूर्ण समझौतों में बदल गए हैं। तभी तो यह बात हमारे सामने आती है, कि तलवार बड़ी है या कलम अगर आप इतिहास के पन्ने पलट कर देखेंगे

तो आपको अवश्य ही ज्ञात हो जाएगा कि मैंने क्षण भर में ही कई ऐसे बड़े-बड़े कार्य किए हैं जो तलवार जीवन भर भी नहीं कर सकती।

जन्म और प्रारंभिक जीवन Birth and early life

जबसे मानव सभ्यता का इस पृथ्वी पर इतिहास प्रारंभ होगा है, तथा उसने अपना विकास और वृद्धि की है तब से भाषा वृद्धि के साथ ही उसने मुझे अपने जीवन में योगदान देना आरंभ किया।

भाषा सीख के बाद उसने सबसे पहले उंगली के रूप में मेरा प्रयोग किया। मनुष्य के द्वारा उंगली के रूप में मेरा प्रयोग करने पर मनुष्य ने सबसे पहले मेरे द्वारा जमीन पर लिखना शुरु कर दिया।

प्रारंभ में मनुष्य उंगली के द्वारा विभिन्न प्रकार के संकेत और चित्र धरती पर बनाने और उकेरने लगा, किंतु यह समय के साथ मिट जाते थे।

इसलिए कुछ पत्तों और वनस्पतियों का उपयोग करके मनुष्य ने स्याही का विकास किया। स्याही का विकास होने के पश्चात भी उंगली के द्वारा लिखा किंतु उंगली से लेखन स्पष्ट ना हो सका

तो उसने पक्षियों के पंखों तथा पेड़ पौधों की टहनियों का उपयोग कलम के रूप में प्रारंभ कर दिया। तथा पक्षियों के पंखों और पेड़ पौधों की टहनियों से बनी कलम के द्वारा लेखन का कार्य

बड़े-बड़े पत्तों पर पत्थरों पर होने लगा। कुछ समय के पश्चात वृक्ष की टहनियों को धारदार बनाकर तथा सरकंडा को अच्छी तरीके से काटकर मेरा रूप दे दिया गया।

कलम की आत्मकथा पर निबंध

वर्तमान में मेरे विभिन्न रूप Currently my various forms

जिस प्रकार से मनुष्य ने प्रगति की है, उसी प्रकार से मेरे इतिहास में भी प्रगति होने लगी थी। मेरा विकास भी होने लगा था और आज में विज्ञान के कारण कई रूपों में आप लोगों के सामने प्रकट हो चुकी हूँ।

पहले मुझे स्याही में डुबोकर उपयोग में लाया जाता था, किंतु आज के समय में विज्ञान की मदद के कारण मैं अत्यंत विकसित हो चुकी हैं।

आज मुझे स्याही में नहीं डुबोया जाता आज के समय में मुझ में एक बार स्याही भर दी जाती है और मैं लंबे समय तक लोगों के काम में आती हुँ।

अंग्रेजी भाषा में मुझे कई नाम प्राप्त हो चुके हैं, सबसे ज्यादा प्रचलित मेरे नाम है "बॉल पेन, फाउंटेन पेन" मेरे कई रुप भी आज देखने को मिल सकते हैं। में बच्चों के लिए भी उपयोगी होती हूँ जिसे पेंसिल कहा जाता है।

चित्र को उकेरने के लिए तथा बच्चों के द्वारा भाषा सीखने के लिए सबसे पहले मुझे ही उपयोग में लाया जाता है. आज मैं विभिन्न प्रकार के रंगों से युक्त हो चुकी हूँ में सब प्रकार के रंगों में आज प्राप्त हुँ।

सबके लिए उपयोगी Useful for all

मैं तो कलम हूँ और भगवान ने मुझे सभी के लिए उपयोगी बनाया है, इसलिए यह मेरी ह्रदय से इच्छा है, कि सभी लोग मेरा भरपूर उपयोग करें तथा अपने जीवन में हमेशा प्रगति करते रहें।

मैं हर एक वर्ग के व्यक्ति के लिए उपयोगी हूँ चाहे बात करो किसी बच्चे की या फिर किसी विद्वान की सभी मेरी उपयोगिता समझते हैं।

बच्चे मेरे द्वारा लिखना पढ़ना सीखते हैं, तो विद्वान व्यक्ति मेरे द्वारा विभिन्न प्रकार के लेख लिखते हैं और प्रकाशित भी करते हैं। डॉक्टर के द्वारा मेरा उपयोग निरंतर किया जाता है।

डॉक्टर मरीजों को विभिन्न प्रकार के नुक्से मेरे द्वारा ही लिखते हैं, जबकि वकील भी मेरा उपयोग करते हैं। कई फैसले मेरे द्वारा ही सुनाए जाते हैं, क्लर्क विभिन्न प्रकार की टिप्पणियाँ मेरे द्वारा ही करते हैं।

मेरी सहायता से ही विद्यार्थी कई प्रकार की परीक्षाओं को पास करते हैं और विभिन्न प्रकार के पदों पर पहुंचते हैं। छोटे से छोटा व्यक्ति किसी भी पद पर आसीन क्यों ना हो मुझे अपने पास रखता है,

जबकि शिक्षक का तो मैं गौरव हूँ। किंतु मुझे वे लोग बिल्कुल भी पसंद नहीं है, जो शिक्षा के महत्व को नहीं समझते और मुझे उपयोगी ना समझ कर अनपढ़ रह जाते हैं। ऐसे लोग जीवन भर दुख भोगते हैं और अंधकार में जीवन जीते रहते हैं।

साहित्यिक रचनाओं की चिर-संगिनी Accompaniment of literary works

मैं विभिन्न प्रकार की साहित्यिक रचनाओं की साक्षी हूँ, क्योंकि यह सभी रचनाएँ मेरे समक्ष और मेरे द्वारा ही रचित हुई हैं।

आदि काल से लेकर आधुनिक काल तक जो कवि और महाकवियों ने साहित्यिक रचनाएं की हैं, अपने विचार और अनुभव रचनाओं में भर दिए हैं

उन सभी की गवाह में हूँ। बड़े-बड़े महात्माओं और कवियों का साथ और सत्संग मुझे प्राप्त हुआ है। उनसे बहुत कुछ सीखने को भी मुझे मिला है।

भक्त कवि भक्तियुक्त रचनाएँ लिखते हैं तो मुझे बड़ी ही आनंद की अनुभूति होती है। कबीरदास, सूरदास, रहीमदास, रसखान आदि भक्त कवियों के द्वारा में तो धन्य हो गई हूँ।

अगर मेरा जन्म ना हुआ होता तो वर्तमान युग में उपन्यास, रचनाएँ, चिकित्सा ग्रंथ, गीत संगीत की विविध कलाएँ देखने को ना मिलती।

इसीलिए मैं सबके लिए महत्वपूर्ण और महत्व रखती हूँ। आज मेरे द्वारा ही सभी व्यक्तियों को विज्ञान और साहित्य सभी प्राप्त हो जाते हैं।

सामाजिक उपयोगिता Social utility

अगर बात सामाजिक उपयोगिता की होती है, तो मैं हमेशा ही समाज सुधार और समाज उपयोगिता के लिए तैयार रहती हुँ।

किसी को पत्र लिखना हो या किसी भी प्रकार का हिसाब करना हो या किसी से पत्र के द्वारा विनम्र निवेदन करना हो या फिर जनकल्याणकारी रचना लिखनी हो या फिर प्रेम बचन, समाज सुधारक संबंधी लेख लिखने हैं

तो मैं हमेशा ही सभी के लिए तैयार रहती हुँ। मैंने मानव समाज को आनंद और मनोरंजन दोनों ही प्रदान किए हैं, राष्ट्रीय भावनाओं को बड़ाया है, हमेशा सभी लोगों की निस्वार्थ सेवा की है,

और हमेशा ही सभी लोगों की सेवा के साथ अपना शरीर भी नष्ट किया है। लेकिन मैंने बदले में कभी किसी से कुछ भी नहीं माँगा।

क्योंकि समाज सेवा के लिए सभी प्रकार के कार्यों से मुझे अपार शांति और प्रसन्नता प्राप्त होती है। समाज के सभी लोग मुझे ह्रदय से लगाकर रखते हैं।

समाज के सभी लोग मेरे द्वारा शिक्षित होते है अपने पैरों पर खड़ा होकर अपने समाज देश का नाम रोशन करते हैं। जिससे मुझे असीम सुख शांति का एहसास होता है। 

उपसंहार Conclusion 

मैं समाज की शुभचिंतक हूँ, इसीलिए हर वक्त सभी लोगों के लिए तैयार रहती हुँ। आप सभी लोगों के लिए बहुत उपयोगी हुँ,

किंतु फिर भी मुझे किसी भी प्रकार का गर्व और अभिमान नहीं है। मैं हमेशा ही समाज को सुख समृद्धि, विकास तथा प्रगति में मदद करती रहूँगी।

दोस्तों इस लेख में आपने कलम की आत्मकथा पर निबंध पड़ा आशा करता हूँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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