डॉ रामकुमार वर्मा का जीवन परिचय Biography of Dr Ramkumar Verma

डॉ रामकुमार वर्मा का जीवन परिचय

डॉ रामकुमार वर्मा का जीवन परिचय Dr Ramkumar Verma ka jivan Parichay 

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है, आज के हमारे इस लेख डॉ रामकुमार वर्मा का जीवन परिचय में।

दोस्तों इस लेख के माध्यम से आज आप हिंदी साहित्य के एक महान साहित्यकार डॉ रामकुमार वर्मा का कवि परिचय जान पाएंगे।

दोस्तों इस डॉ रामकुमार वर्मा के कवि परिचय से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर प्रश्न पूछे जाते है, यहाँ से आप डॉ रामकुमार वर्मा के जीवन से संबंधित प्रत्येक तथ्य की जानकारी प्राप्त कर पाएंगे।

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डॉ रामकुमार वर्मा जी कौन थे Who was Dr Ramkumar Verma 

डॉ रामकुमार वर्मा हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध साहित्यकार व्यंगकार, आलोचक, हास्य कवि के साथ ही एकांकी के जन्मदाता माने जाते हैं।

उन्हें हिंदी साहित्य में अपने महत्वपूर्ण योगदान देने के कारण पदमभूषण तथा अन्य विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

डॉ रामकुमार वर्मा कविता को आराध्यनीय मानते थे, वे मानते थे, कि सभी कवियों को अपनी कविताओं के माध्यम से मनुष्यता का संदेश देना चाहिए।

डॉ रामकुमार वर्मा ने हिंदी साहित्य में योगदान देते हुए लगभग 150 से अधिक एकांकी, नाटक, उपन्यास और रचनाएँ प्रदान की है। 

डॉ रामकुमार वर्मा का जीवन परिचय  Biography of Dr Ramkumar Verma 

डॉ रामकुमार वर्मा का जन्म मध्य प्रदेश राज्य के सागर जिले के एक गांव गोपालगंज में 15 सितंबर 1905 ईसवी में हुआ था।

रामकुमार वर्मा के पिता जी का नाम लक्ष्मी प्रसाद था जो एक उपजिलाधिकारी हुआ करते थे। तथा माता जी का नाम राजरानी देवी था।

रामकुमार वर्मा की प्रारंभिक पढ़ाई घर पर ही उनके माता-पिता के संरक्षण में हुई। इसके बाद उन्होंने 1923 में हाई स्कूल की परीक्षा तथा 1925 में इंटर स्कूल की परीक्षा अच्छे मार्क्स से पास की।

किंतु वर्मा जी ने अपनी उच्च शिक्षा जबलपुर और प्रयाग में रहकर की थी। उन्होंने जबलपुर मैं रॉबर्टसन कॉलेज तथा प्रयाग में प्रयाग यूनिवर्सिटी से एम.ए.हिंदी मकी परीक्षा पूरे विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान  में पास की।

इसके बाद उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि आलोचनात्मक इतिहास में प्राप्त की। डॉ रामकुमार वर्मा ने अपना अध्यापन कार्य प्रयाग विश्वविद्यालय से प्रारंभ किया।

उन्होंने पूर्व सोवियत संघ तथा श्रीलंका की भी यात्रा की थी। भारत सरकार ने उन्हें 1963 में पदम भूषण की उपाधि तथा हिंदी साहित्य सम्मेलन ने उन्हें साहित्य वाच्यस्पति की उपाधि प्रदान की थी।

हिंदी साहित्य में योगदान देने के कारण उन्हें देव पुरस्कार तथा कालिदास पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

डॉ रामकुमार वर्मा प्रयाग विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के अध्यक्ष भी रहे 1966 में वे अपने इस पद से मुक्त हुए तथा 1990 में सदैव के लिए परलोक सिधार गए।

रामकुमार वर्मा का साहित्यिक जीवन Dr Ramkumar Verma ka sahityik Jivan 

रामकुमार वर्मा ने अपना साहित्यिक जीवन एक कहानीकार के रूप में प्रारंभ किया था। उन्होंने सबसे पहले एक कहानी लिखी थी जिसका नाम था "सुखद सम्मेलन" इसके बाद उन्होंने

विभिन्न प्रकार के नाटक उपन्यास तथा एकांकीयाँ भी लिखी हैं। तथा वे हिंदी साहित्य में एक कहानीकार, नाटककार तथा आलोचक के रूप में

विख्यात होते चले गए। डॉ रामकुमार वर्मा को हिंदी एकांकी का जनक भी माना जाता है। उनकी कृति बादल की मृत्यु नामक एकांकी हिंदी साहित्य का पहला एकांकी माना जाता है।

आधुनिक रहस्यवादी कवियों में डॉ रामकुमार वर्मा का स्थान सबसे उल्लेखनीय है। उनकी रचनाओं में कबीर के रहस्यवाद की झलक अवश्य देखने को मिलती है।

डॉ रामकुमार वर्मा की रचनाओं में कल्पना रहस्यवाद के साथ ही दुख निराशा करुणा आदि ममस्पर्शी  वेदनायें भी देखने को मिल जाती हैं।

डॉ रामकुमार वर्मा की रचनाएँ Dr Ramkumar Verma ki rachnaen 

काव्य - डॉ रामकुमार वर्मा के प्रमुख काव्य संग्रह चित्तौड़ की चिता, चंद्रकिरण, रूपाराशि, वीर हमीर, चित्रलेखा, एकलव्य अंजलि, कुल ललना, उत्तरायण, अभिशाप, आकाशगंगा आदि हैं।

नाटक - रामकुमार वर्मा के नाटक में सबसे प्रमुख स्थान विजय पर्व का है।  

उपन्यास - माँ का ह्रदय

एकांकी - रेशमी टाई, पृथ्वीराज की आंखें, चारुमित्रा, दीपदान, रजत, रश्मि, इंद्रधनुष, रूपरंग, आठ एकांकी आदि। जिनमें से डॉ रामकुमार वर्मा की एकांकी दीपदान हिंदी साहित्य में एक प्रमुख स्थान रखती है। 

डॉ रामकुमार वर्मा की भाषा शैली Dr Ramkumar Verma ki Bhasha Shaili 

डॉ रामकुमार वर्मा हिंदी साहित्य के एक ऐसे कवि थे जिनकी प्रतिभा उनकी रचनाओं में भली-भांति प्रतिबिंबित होती रहती है। उनकी शैली में रूप सौंदर्य और नाद सौंदर्य दोनों

का बड़ा ही अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। रामकुमार वर्मा की शैली प्रवाहपूर्ण तथा संगीतत्मकता है। उनकी रचनाओं में भावों की सुसंबंध प्रकृति देखने को मिलती है। 

डॉ रामकुमार वर्मा का साहित्य में स्थान Dr Ramkumar Verma ka Sahitya Mein sthan 

डॉ रामकुमार वर्मा हिंदी साहित्य के एक प्रसिद्ध साहित्यकार, आलोचक, नाटककार तथा एकांकी विधा के जन्मदाता माने जाते हैं।

इसके साथ ही उन्होंने एक अध्यापक और अध्यक्ष के रूप में हिंदी विभाग में भी कार्य किया है। हिंदी साहित्य में डॉक्टर राम कुमार द्वारा दिए गए अमूल्य योगदान के लिए उन्हें सदा ही जाना जाता रहेगा।

दोस्तों इस लेख में आपने डॉ रामकुमार वर्मा का जीवन परिचय डॉ रामकुमार वर्मा का कवि परिचय पड़ा। आशा करता हूँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा। 

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