देश प्रेम पर निबंध Essay on Desh prem in hindi

देश प्रेम पर निबंध Essay on Desh prem in hindi 

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लाल किला पर निबंध

देश प्रेम पर निबंध

प्रस्तावना Introduction 

देश प्रेम वह पुण्य क्षेत्र है अमल असीम त्याग से विलसित 
आत्मा के विकास से जिसमें मानवता होती विकसित।।

मनुष्य जिस देश, जिस समाज और देश परिवार में जन्म लेता है अगर वह उस देश, उस समाज और उस परिवार के विकास में अपनी भूमिका अदा नहीं करता तो उस मनुष्य का जन्म व्यर्थ माना जाता है।

इसलिए मनुष्य जिस देश में जन्म लेता है, जिस समाज में बड़ा होता है अपने आप का विकास करता है, पोषण प्राप्त करता है, और समाज में महत्वपूर्ण स्थान भी प्राप्त करता है, उसे उस समाज,

उस देश और उस परिवार के विकास में मनुष्य को अवश्य ही अपना योगदान देना चाहिए। मनुष्य में देश, समाज तथा परिवार के प्रति त्याग, बलिदान और परोपकार की भावना सदा से ही विधमान रहती है

और प्रेम की भावना ही मनुष्य के ह्रदय में देश समाज और अपने परिवार पर मर मिटने का जज्बा और जुनून पैदा करती है। इसीलिए प्रेम की भावना मनुष्य के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखती है, अतः कहा गया है,कि

जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।।

देश प्रेम पर निबंध

देश प्रेम की स्वभाविकता Desh prem ki svbhavikta 

प्रत्येक मनुष्य में देश प्रेम की भावना उसके जन्म लेने के पश्चात ही विकसित हो जाती है। मनुष्य जिस परिवेश में बड़ा होता है, उस परिवेश तथा मातृभूमि के प्रति उसके ह्रदय में प्रेम, त्याग लगाव

तथा बलिदान की भावना स्वतः ही जाग्रत होने लगती है। यहाँ तक की पशु - पक्षी भी अपने परिवेश के प्रति प्रेम और लगाव रखते है। इसलिए कहा गया है:-

आग लगी इस वृक्ष में जलते इसके पात।
तुम क्यों जलते पंछियों जब पंख तुम्हारे पास।।
फल खाये इस वृक्ष के बीट लथेडे पात।
यही हमारा धर्म है जलें इसी के साथ।।

अर्थात पक्षी जिस वृक्ष पर रहते है, जहाँ उन्होंने अपना बचपन, जवानी, बुढ़ापा देखा सुख - दुख देखे है, जिस वृक्ष की शीतल छाया में आराम किया,

वृक्ष के फल खाकर वह बड़े हुए हैं, अगर वह वृक्ष किसी भी व्यक्ति के द्वारा काटा जाता है या फिर आग लगाई जाती है या उसको कोई क्षति होती है,

तो पक्षी उसके आसपास पंख फड़फड़ाते हुए, कोलाहल करते हुए नजर आते हैं। उन्हें उस वृक्ष के काटने से और नष्ट होने से अपार पीड़ा और दुखों का सामना भी करना पड़ता है, क्योंकि उस वृक्ष से उनका लगाव है,

उससे प्रेम है। अर्थात देश प्रेम की भावना सभी पशु-पक्षियों में मनुष्यों में स्वत: ही उत्पन्न हो जाती है। वह अपने जन्म स्थान पर रहते हुए विभिन्न दुखों को सहते हुए भी उसके प्रति लगाव और प्रेम रखता है।

देशप्रेम में सुख-दुख की बात नहीं होती है, बहुत से ऐसे स्थान हैं, जहाँ पर जीवन बहुत ही कठिन है, किंतु वहाँ के नागरिकों में देश के प्रति मर मिटने का जज्बा बड़ा ही प्रजवलित तरीके से देखने को मिलता है।

बहुत से ऐसे स्थान हैं, जहाँ पर जीवन इतना कठिन है, कि वहाँ पर जीना बहुत ही असंभव होता है, किंतु मनुष्यों ने अपने देश प्रेम

उस स्थान के प्रति लगाव के कारण उस स्थान को इस प्रकार से रहने योग्य बनाया है कि वहां पर वह आसानी से रह रहे हैं। इसीलिए कहा गया है, कि

विषुवत रेखा का वासी जो जी रहा है, हाफ-हाफ कर।
रखता है अनुराग आलौकिक फिर भी अपनी मातृभूमि पर।।
हिमवासी भी जो हिम में तप में जी लेता है,कांप-कांप कर।
वह भी अपनी मातृभूमि पर कर देता है, शीश निछावर।।

दुनिया के बहुत से ऐसे देश हैं, जहाँ पर लोग बड़ी ही विषम परिस्थितियों में जीवन यापन करते हैं, किंतु उनमें देश के प्रति देश प्रेम बलिदान और त्याग का जज्बा और जुनून हमेशा विद्यमान रहता है।

कहा जाता है कि मनुष्यों के साथ फूल पौधे पेड़ पत्ते भी अपने देश पर कुर्बान होने का जज्बा रखते हैं, माखनलाल चतुर्वेदी जी कि पंक्तियों से स्पष्ट होता है कि

मुझे तोड़ लेना वनमाली उस पथ पर देना तुम फेंक।
मातृभूमि पर शीश चढ़ाने जिस पथ जाते वीर अनेक।।

अर्थात पुष्प भी यह कामना करता है, कि वह उन व्यक्तियों के उन वीर सपूतों के पैरों के नीचे आए जो मातृभूमि पर अपना शीश भी निछावर कर देते हैं।

देश प्रेम का महत्व Desh prem ka Mahtva 

देश प्रेम एक ऐसी भावना होती है, जो प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में विद्यमान रहती है। यह भावना जिस व्यक्ति के हृदय में जितनी प्रबल होगी, वह व्यक्ति उस देश से उतना ही अधिक प्रेम करेगा

और किसी भी परिस्थिति में उस देश का अपमान सहन नहीं कर सकेगा उस देश पर आने वाली विपत्ति का डटकर सामना करेगा।

उस व्यक्ति में हमेशा ही देश के प्रति मर मिटने और बलिदान होने का जज्बा और जुनून सवार रहता है। देश प्रेम की भावना एक ऐसी भावना है,

जो मनुष्य को हमेशा ही देश के प्रति प्रेम बलिदान देश की सुरक्षा की प्रेरणा देती है। मनुष्य चाहे किसी भी देश में जन्म लेकर अन्य देशों में क्यों ना रहे

लेकिन जब वह मृत्यु की सैया पर आता है तब वह यही चाहता है, कि वह अपनी मातृभूमि पर ही अंतिम सांस ले। इसीलिए मैथिलीशरण गुप्त जी ने कहा है:-

पाकर तुझको सभी सुखों को हमने भोगा।
तेरा प्रत्युउकार कभी क्या मुझसे होगा।।
तेरी है यह देह तुझी से बनी हुई है।
बस तेरे ही सूरस सार से सनी हुई है।।
फिर अंत समय तू ही इसे अचल देख अपनाएगी।
हे मातृभूमि अंत में यह तुझ में ही मिल जाएगी।।

इसीलिए कहा गया है, कि वास्तव में देश प्रेम एक सबसे बड़ी भावना है, जिस व्यक्ति के हृदय में इसका सागर होता है, वह हमेशा ही देश के विकास में अपना योगदान देता है। इसी देश प्रेम की भावना के खातिर

हमारे वीर जवान सरहदों पर अपनी मातृभूमि की आन की रक्षा करते हुए शहीद हो जाते हैं। किंतु जिस मानव के हृदय में देश प्रेम की भावना नहीं है, उस व्यक्ति का जन्म लेना ही सार्थक नहीं है। कहा भी गया है कि

भरा नहीं जो भावों से बहती जिसमें रसधार नहीं।
वह हृदय नहीं वह पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।।

देश प्रेम के विविध क्षेत्र और सेवा Desh prem ke vividh kshetra or seva 

जब से मनुष्य इस पृथ्वी पर जन्म लेता है तब से स्वतंत्र रूप से विकास करता है। तथा उसमें कई नैतिक गुणों और मूल्यों का विकास हो जाता है।

जिनमें से एक है देश के प्रति प्रेम देश का विकास और देश के हित में सभी प्रकार के कार्य करना। इसीलिए मनुष्य देश प्रेम की भावना से ओतप्रोत होकर

विभिन्न प्रकार से देश के विकास तथा देश को समृद्ध बनाने के लिए कार्य कर सकते हैं। देश सेवा के विभिन्न क्षेत्र है, यहाँ पर कुछ को निम्न प्रकार से परिभाषित किया गया है:-

समाज सेवा द्वारा By Social Service 

समाज सेवा का अर्थ होता है, समाज के लिए की गई सेवा अर्थात समाज में पुराने समय से ही विभिन्न प्रकार की ऐसी कुछ कुरुतियाँ स्थापित हैं, जो वास्तव में समाज के लिए अभिशाप बन गई हैं।

कुछ कुरीतियों को तो मनुष्य ने स्वतः समाज के लाभ के लिए ही स्थापित किया है, किंतु समय के साथ यह समाज के लिए अभिशाप बन कर उभर आई हैं।

जिनमें से प्रमुख रूप से दहेज प्रथा, सती प्रथा, बाल विवाह, पर्दाप्रथा, छुआछूत,अशिक्षा आदि है, जो समाज को दूषित करती जा रही हैं।

अतः मनुष्य इनके खिलाफ आवाज उठाकर तथा समाज में इन कुरीतियों को दूर कर समाज सेवा के साथ ही देश के विकास में भी अपना योगदान दे सकता है।

भारत के कुछ महान हस्तियों ने समाज सेवा की चरण सीमा को भी सार्थक कर दिया है, जिनमें से प्रमुख रूप से बाबा आमटे, राजा राममोहन राय, मदर टेरेसा, स्वामी विवेकानंद, दयानंद सरस्वती, ज्योतिबा फुले, रामकृष्ण परमहंस आदि आते हैं। 

धन सेवा के द्वारा Service by Money 

समाज में और देश में सभी प्रकार के लोग रहते हैं, जिनमें कुछ अच्छे धनी संपन्न होते हैं और कुछ लोग अत्यंत गरीब होते हैं।

कुछ लोग तो ऐसे होते हैं, जिन्हें अपना सर छुपाने के लिए भी जगह नहीं मिलती। ऐसे व्यक्तियों के लिए अमीर और संपन्न लोगों को मदद करनी चाहिए

तथा देश की सेवा में और देश की प्रगति में सहयोग करना चाहिए। आज के समय में विभिन्न धनी संपन्न लोगों के द्वारा विश्व के विभिन्न देशों में कई ऐसे सामाजिक संस्थाएं स्थापित हो चुकी है,

जो गरीबों के लिए तथा असहाय लोगों के लिए कार्य कर रही हैं, उन संस्थाओ को सरकार से भी प्रोत्साहन मिलता है। यह संस्थाएँ उन्हें आश्रय दे रहे हैं,

उन्हें खाना और अच्छा स्वास्थ्य प्रदान कर रही है, जो एक वास्तव में महान कार्य है। मनुष्य इन संस्थाओं को सहयोग करके देश सेवा में अपना योगदान दे सकता है।

राजनीति द्वारा By Politics 

भारत एक स्वतंत्र और प्रजातांत्रिक देश है, यहाँ पर जनता सरकार बनाती है, अर्थात जनता के द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि देश का प्रतिनिधित्व करते हैं।

इसीलिए मनुष्य जनता के द्वारा चुने गए प्रतिनिधि रूप में देश की सेवा तथा देश और समाज का र्वागीण विकास और समृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

कला द्वारा देश सेवा Service by Art 

कला के द्वारा भी देश सेवा की जा सकती है। यह बात सही है कि सभी व्यक्तियों में किसी ना किसी प्रकार की कला अवश्य छुपी होती है।

मनुष्य उस कला को पहचान कर अपने देश की सेवा अपने देश का नाम रोशन कर सकता है। आज के समय में भारत देश के कई ऐसे युवा हैं

जो अपनी कला के द्वारा देश विदेश में भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। भारत के खिलाड़ी ओलंपिक राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लेते हैं और वहाँ पर गोल्ड मेडल, सिल्वर मेडल आदि जीतकर भारत देश का नाम रोशन करते हैं।

कई व्यक्ति चित्रकला में अच्छे पारंगत होते हैं, जो ऐसी कलाकृति ने बनाते हैं कि विदेशों से लोग उनको खरीदने के लिए आते हैं। शिक्षका एक राष्ट्र का निर्माता कहा जाता है,

इसीलिए शिक्षक की सबसे अधिक भूमिका देश की प्रगति में होती है, यूँ कहा जा सकता है कि देश का भविष्य शिक्षा के हाथों में ही है।

शिक्षका जिस प्रकार से विद्यार्थी को शिक्षा देगा उस प्रकार वह देश सेवा और देश के कार्य में आएगा। शिक्षक के द्वारा शिक्षा प्राप्त करके शिक्षार्थी विभिन्न प्रकार की देश की सेवाएँ करते हैं

कई शिक्षार्थी वैज्ञानिक बनते है तथा कई अविष्कार करते है तो बहुत अच्छे वक्ता। इस प्रकार से देश की सेवा तथा विकास में योगदान दिया जा सकता है। 

उपसंहार Conclusion 

देश प्रेम वास्तव में एक महत्वपूर्ण भावना है जिसका सभी के दिलों में होना अवश्यक है। कियोकि यही एक भावना है जो देश को चहूँ और से सुरक्षित और विकसित बना सकती है।

अतः सभी नागरिकों को अपने देश समाज और परिवार के प्रति प्रेम, त्याग, समर्पण का भाव रखना चाहिए। तभी राष्ट्रप्रेम जैसे आदर्श भावों का अर्थ सार्थक होगा।

दोस्तों यहाँ आपने राष्ट्रप्रेम पर निबंध पड़ा। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा। 

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  1. भारत का राष्ट्रीय वृक्ष बरगद
  2. जल ही जीवन है पर निबंध
  3. इंटरनेट पर निबंध



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