विटामिन डी की कमी से रोग Vitamin D deficiency disease

विटामिन डी की कमी से रोग

विटामिन डी की कमी से रोग Vitamin D deficiency disease

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख विटामिन डी की कमी से रोग (Vitamin D deficiency disease) में।

दोस्तों इस लेख के माध्यम से आप विटामिन डी की कमी के लक्षण, विटामिन डी की आयुर्वेदिक दवा, विटामिन डी की होम्योपैथिक दवा,

विटामिन डी की कमी के लिए योगा आदि तथ्य जानेंगे। तो आइये दोस्तों करते है, शुरू यह लेख विटामिन डी की कमी से रोग:-

विटामिन डी के फायदे स्रोत रोग कमी के लक्षण

विटामिन डी की कमी से रोग Vitamin D deficiency disease

  1. हार्ट से संबंधी बीमारियों - विटामिन डी की कमी से विभिन्न ह्रदय रोग होने लगते है, रक्तचाप (Blood Pressure) बड़ने लगता है।
  2. हड्डी में दर्द और टूटना - हड्डियों में कैल्शियम कम होने लगता है, और हड्डियाँ विकृत होकर भंगूर हो जाती है, टूटने का खतरा बना रहता है, जोड़ो में दर्द पीठ की माशपेशियों में दर्द होता है।
  3. ऑस्टियोमलेशिया और ऑस्टियोपोरोसिस - विटामिन डी की कमी से हड्डियों में कैल्शियम की मात्रा कम हो जाती है, कियोकि विटामिन डी कैल्शियम का अवशोषण करता है, जिसकारण हड्डियाँ कमजोर होकर टेड़ी हो जाती है, जिस स्थिति को ऑस्टियोमलेशिया (Osteomalacia) कहते है। 
  4. डायबिटीज होना - विटामिन डी की कमी से इन्सुलिन होर्मोन्स (Hormonse) में अनियमितता होने लगती है, तथा डायबिटीज रोग होने की सम्भावना बढ़ जाती है। 
  5. इम्यूनिटी कमजोर होना - विटामिन डी की कमी से रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी असर पड़ता है। इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है, व्यक्ति जल्दी ही बीमार हो जाता है, सर्दी, जुखाम, बुखार उसे जल्दी हो जाते है। 
  6. सूजन और संक्रामक संबंधी रोग - लम्बे समय से विटामिन डी की कमी शरीर में रहती है, तो चेहरे, जोड़ो पर सूजन दिखाई देती है, कई संक्रामक रोग होने का खतरा बढ़ जाता है।

इसके बाद भी बालों की समस्या, कैंसर का खतरा, पाचन की समस्या, बजन बढ़ जाना, कटे, जले घाव देर से भरना  आदि कई समस्यायें बढ़ जाती है। 

विटामिन डी की कमी के लक्षण Vitamin D low Symptoms 

अगर शरीर में विटामिन डी की कमी होती है, तो विटामिन डी की कमी से ब्लड प्रेशर अनियमित हो जाता है। चेहरे और हाथों पर झुर्रियां दिखाई देने लागती है,

और जोड़ों और हड्डियों में दर्द बढ़ जाता है। मांशपेशियों में कमजोरी महसूस होना शुरू हो जाता है, व्यक्ति को थकावट और कमजोरी

महसूस होती है, बहुत ज्यादा नींद, अनिद्रा का शिकार हो जाता है और तनाव और डिप्रेशन महसूस होना आदि लक्षण देखे जाते है।

विटामिन डी 25 हाइड्राक्सी Vitamin D 25 Hydroxy

विटामिन डी 25 हाइड्राक्सी विटामिन डी का शरीर में स्तर जानने के लिए एक ब्लड टेस्ट होता है। जब व्यक्ति को एहसास होता है,

कि उसके शरीर में विटामिन डी की कमी हो रही है तथा विटामिन डी की कमी के लक्षण दिखाई दे रहे है तो ऐसी स्थिति में विटामिन डी 25 हाइड्राक्सी टेस्ट

कराया जाता है, जिससे शरीर में विटामिन डी की मात्रा का ज्ञान होता है। विटामिन डी की नार्मल रेंज 50 नैनोमोल्स/लीटर से 125 नैनोमोल्स/लीटर के बीच होती है। 

विटामिन डी की आयुर्वेदिक दवा Ayurvedic medicine for vitamin-D

आयुर्वेदिक उपचार भी विटामिन डी की कमी को काफी हद तक पूर्ण करता है, तथा शरीर को कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है।

अगर शरीर में विटामिन डी अत्यधिक मात्रा में कम है और कई प्रकार के विटामिन डी की कमी के घातक लक्षण दिखाई दे रहे हैं

तो विटामिन डी की कमी पूरी करने के लिए आयुर्वेद में विटामिन डी पूरक ओषधि प्रवालपिष्टि (250 ग्राम) और मोतीपिष्टि (125 ग्राम) औषधियों का रोजाना

दो बार ठंडे पानी के साथ या फिर दूध के साथ सेवन करना बताया है। इन दोनों औषधियों का प्रयोग शरीर में विटामिन डी की मात्रा के आधार पर किया जाता है

अगर शरीर में विटामिन डी की मात्रा बहुत ही ज्यादा कम है, तो इन दोनों औषधियों का प्रयोग आपको कम से कम 6 माह तक करना होगा।

किंतु अगर शरीर में विटामिन डी की मात्रा सामान्य से थोड़ा कम है, तो इन दोनों औषधियों का प्रयोग आपको कम से कम 2 से 3 महीने तक करना होगा।

तथा विटामिन डी की कमी की समस्या पूरी होने पर आपको 10 साल के अंतराल में दो 2 महीने इन दोनों और तीनों का सेवन करना होगा जिससे भविष्य में भी आपको विटामिन डी की कमी नहीं होंगी।

इन दोनों दवाओं का प्रयोग करने से शरीर में विटामिन डी की मात्रा बढ़ती है जिस कारण विटामिन डी कैल्शियम का अवशोषण करता है

और कैल्शियम की कमी दूर होती है और हड्ड‌ियाँ मजबूत बनती है। इसके अलावा भी आप अश्वगंधा, मेदालकड़ी, हरजोड़ी और मधुयष्टि का चूर्ण सभी 50-50 ग्राम बराबर मात्रा में मिला लें और उन्हें अच्छे

से कूट-पीस लें और एक वर्तन में अच्छी तरह से मिला लें और रोज दूध या ठंडा पानी के सुबह-शाम एक चम्मच खाएँ जिससे शरीर में विटामिन डी की पूर्ति होंगी और शरीर में कैल्शियम की मात्रा नियंत्रित रहेगी।

विटामिन डी की होम्योपैथिक दवा Homeopathic Medicine for vitamin-D

विटामिन डी की होम्योपैथिक दवा भी विटामिन डी की कमी में बड़ी असरकारक साबित होती है किंतु यह दवा उस समय दी जाती है जब शरीर में विटामिन डी की मात्रा का लेबल जान लिया जाता है,

जिसके लिए विटामिन D3 टेस्ट कराया जाता है। होम्योपैथी में विटामिन D3 की कमी के लक्षण देखकर इलाज किया जाता है, कि व्यक्ति में किस प्रकार के लक्षण नजर आ रहे हैं।

तो फिर विटामिन डी3 युक्त दवाइयाँ जो हड्ड‌ियों में कैल्शियम को सोखने की क्षमता बढ़ाने और कैल्शियम की कमी दूर करने के लिए दी जाती है, जो निम्नप्रकार से है:- 

  1. कैल्केरिया फॉस 30 (Calcaria Phos 30),
  2. कैल्केरिया कार्ब 30 (Calcaria Carb 30),
  3. नैट्रम मुर (Natrum Mur 30)
  4. लायकोपोडियम 30 (Lycopodium 30)

विटामिन डी की कमी के लिए योगा Yoga for vitamin d deficiency

योग एक ऐसा माध्यम है, जिससे शरीर स्वास्थ्य तथा फिट तो रहता ही है, इसके साथ ही रोज योग को अपनाने से शरीर के कई दोष तथा असाध्य विकार ख़त्म हो जाते है:- 

विटामिन डी की कमी में प्रमुख रूप से भुजंगासन, ताड़ासन, वज्रासन, एकपादउत्तानासन, अर्धचक्रासन, शलभासन, कटिचक्रासन, सेतुबंध, पवनमुक्तासन (बिना सिर उठाए), अर्धशलभासन, अर्धनौकासन

और हाथों व पैरों की छोटी- छोटी क्रियाएँ आदि अधिक लाभकारी होती है, इसके साथ ही प्राणायाम भी विटामिन डी की कमी को पूरा करता है, इसके अंतर्गत अनुलोम-विलोम, भस्त्रिका उज्जायी, सूर्यभेदी, चंद्रभेदी और कपालभाति प्राणायाम आदि लाभकारी होते है।

दोस्तों इस लेख में आपने विटामिन डी की कमी से रोग (Vitamin D deficiency disease) तथा अन्य तथ्यों को जाना। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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  1. विटामिन किसे कहते है प्रकार तथा कार्य
  2. विटामिन ए के स्रोत कमी से रोग लक्षण उपचार
  3. विटामिन ई के स्रोत कमी से रोग लक्षण तथा रोग

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