मधुमक्खी पालन पर निबंध Essay on bee keeping

मधुमक्खी पालन पर निबंध Essay on bee keeping

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है, आज के हमारे इस लेख मधुमक्खी पालन पर निबंध (Essay on bee keeping) में।

दोस्तों इस लेख के माध्यम से आज आप मधुमक्खी पालन पर निबंध पड़ेंगे, जिसमें मधुमक्खी पालन क्या है और मधुमक्खी पालन किस प्रकार से किया जाता है, तो आइए दोस्तों बढ़ते हैं, इस लेख में और पढ़ते हैं मधुमक्खी पालन पर निबंध:-

मधुमक्खी पालन पर निबंध

मधुमक्खी पालन क्या है what is beekeeping

व्यापारिक स्तर पर शहद के उत्पादन के लिए मधुमक्खियों को वैज्ञानिक पद्धति तथा घरेलू पद्धति के आधार पर पालना मधुमक्खी पालन कहलाता है।

मधुमक्खी पालन पुरातन काल से चलता आ रहा एक व्यवसाय है, जिसमें परंपरागत तरीके से मधुमक्खी पालने के पश्चात उनसे शहद प्राप्ति की जाती है।

सन 1878 में रूस के पोक्रोपोविक ने मधुमक्खियों को पेटीका बॉक्स में पालने की सफलता प्राप्त की थी। इसके पश्चात यूरोप और अमेरिका में भी

मधुमक्खियों को पालने की कोशिश की गई. इस प्रकार से मधुमक्खी पालन व्यवसाय को एक नई दिशा मिलती गई और आज मधुमक्खी पालन एक रोजगार का व्यवसाय बन गया है।

मधुमक्खी पालन पर निबंध

मधुमक्खियों के प्रकार Type of bee 

मधुमक्खियों की 4 प्रजातियाँ होती हैं:-

  1. एपिस डोर्सेटा :- इसे पहाड़ी मधुमक्खी, चट्टानी मधुमक्खी और सारंग मधुमक्खी के नाम से जाना जाता है, जो ऊँचे स्थानों पर अपने छत्ते बनाते हैं। यह मधुमक्खी क्रोधी स्वभाव की होती है।
  2. एपिस इंडिका :- यह भारतीय मधुमक्खी है, जिसे भारत में सबसे अधिक पाला जाता है। यह स्वभाव में शांत होती है, जो छतो, चट्टानों, पेड़ों आदि पर अपने छत्ते बनाती है।
  3. एपिस फ्लोरिया :- यह मधुमक्खी सबसे छोटे आकार की होती है, जो घूमने के लिए शौकीन होती है. यह अपने छत्ते झाड़ियों में खुले स्थानों पर बना देती है।
  4. एपिस मेलीफेरा :- यह मधुमक्खी इटालियन या यूरोपियन मधुमक्खी के नाम से जानी जाती है,जो इटली की ही एक मूल प्रजाति है।

मधुमक्खियों का सामाजिक संगठन Social organization of bees

मधुमक्खी एक सामाजिक कीट होती है, जो कॉलोनी बनाकर रहती है और इन कालोनियों में लगभग 5000 से 50000 तक मधुमक्खियाँ हो सकती है। छत्ते में क्रियाकलाप के आधार पर यह निम्न प्रकार की होती है:-

  1. नर मधुमक्खी:-  नर मधुमक्खी रानी मधुमक्खी से छोटी और श्रमिक मधुमक्खियों से बड़ी होती है। इनका जन्म मधुमक्खियों के अनिषेचित अंडे से अनिषेकजनन के द्वारा होता है। इनका कार्य रानी मधुमक्खी के साथ मैथुन करना होता है और मैथुन करने के समाप्त ही यह मर जाते हैं या फिर भोजन खत्म होने की स्थिति में श्रमिक मधुमक्खियाँ भगा देती है, जिससे इनकी मृत्यु हो जाती है।
  2. रानी मधुमक्खी:- रानी मधुमक्खी पूर्ण विकसित जनन क्षमता वाली होती है, जो केवल एक कॉलोनी में एक ही होती है। इसका कार्य केवल अंडे देने होता है। रानी मधुमक्खी का जीवनकाल 2 से 5 वर्ष का होता है। यह जीवन में केवल एक बार ही मैथुन करती है, मैथुन के समय यह अपने शुक्रवाहिका में लगभग दो करोड़ शुक्राणुओं को संग्रहित कर लेती है, जो लगभग 3 वर्ष तक जीवित रहते हैं। यह आवश्यकता के अनुसार निषेचित और अनिषेचित अंडे देती है।
  3. श्रमिक मधुमक्खी :- श्रमिक मधुमक्खियाँ केवल मादाएँ होती है, जो निषेचित अंडे से विकसित किन्तु बाँझ होती है और आकार में छोटी होती है, किंतु संख्या में सबसे अधिक होती हैं और इनका कार्य पौधों से मकरंद चूसकर  शहद निर्माण करना छत्ते की साफ-सफाई तथा अन्य कार्य करना होता है।

मधुमक्खी पालन की विधियाँ Beekeeping Methods

मधुमक्खी पालन की दो प्रकार की विधियाँ प्रचलित होती है जो निम्न प्रकार से है:-

पुरातन या देशी विधि Archaic method

देशी विधि में मधुमक्खी पालन में अनिश्चितता रहती है, क्योंकि यह निश्चित नहीं रहता कि जो साधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, उसमें मधुमक्खियाँ रहेगी या फिर नहीं रहेगी। मधुमक्खियाँ अक्सर दीवार या पेड़ के कोटरो में छत्ता बनाना पसंद करती है,

इसीलिए कोई टोकरी या बक्सा या अनुपयुक्त खोखला सामान उपलब्ध कराया जाता है। प्रथम प्रकार के छत्ते को स्थिर छत्ता कहते हैं,

जिसमें आने जाने के लिए छेद रहते हैं, जबकि द्वितीय प्रकार के छत्ते को चल छत्ता कहते हैं इसमें से मधुमक्खियों के लिए आने और जाने के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएँ भी रहती हैं।

देसी विधि में शहद निकालने की तकनीक भी बड़ी ही दूषित प्रकार की होती है। इस विधि से पहले छत्ते के पास किसी जलती हुई वस्तु को ले जाते है

कियोकि ऐसा करने से मधुमक्खियाँ मर जाती है या भाग जाती है। इसके अतिरिक्त छत्ते के पास धुंआ भी करके मधुमक्खियों को भगा दिया जाता है।

अब मधुमक्खियों के छत्ते को निकाल लेते है और उसे निचोड़ देते है, जिससे शहद निकल आता है। इस प्रकार से प्राप्त शहद दूषित हो जाता है कियोकि इसमें मधुमक्खियों के अंडे और लावा भी नष्ट हो जाते है और मक्खियों को फिर से छत्ता बनाना पड़ता है।

मधुमक्खी पालन की आधुनिक विधि Modern method of beekeeping

आधुनिक पद्धति के द्वारा मधुमक्खी पालन सर्वाधिक किया जाता है और सबसे अधिक महत्व इसमें मधुमक्खी गृह को दिया जाता है। आधुनिक पद्धति से मधुमक्खी पालन करने के निम्न प्रकार के उपकरण उपयोग में लाये जाते हैं:- 

मधुमक्खी छत्ता:- यह लकड़ी का दो मंजिला बक्सा होता है, जिसमें दो कक्ष होते हैं। निचला कक्ष तीन चौथाई हिस्से में जनन कक्ष होता है और ऊपर एक चौथाई भाग में शहद कक्ष होता है।

दोनों कक्षो को एक दूसरे से अलग अलग कर दिया जाता है। दोनों कक्षो के बीच में रानी अपवर्जक लगा रहता है, जनन कक्ष अंडो एवं शिशुओ के लिए तथा शहद कक्ष केवल शहद एकत्रित करने के लिए

उपयोग में लाया जाता है। यह दो मंजिला बक्सा एक स्टैंड पर रखा जाता है, जिसके पायों को कटोरा में रखकर भर दिया जाता है, ताकि चीटियाँ ना चढ़ सके।

नीचे वाले भाग में बड़े आकार के जनन कक्षा में ऊर्ध्वाधर स्थिति में 5 से 10 चौखटे एक दूसरे से 0.96 सेंटीमीटर के मोनांतर पर रखे जाते हैं,

जबकि प्रत्येक फ्रेम में तारों की सहायता से मोमी छत्ताधार लगाया जाता है, जिनमें बने षटकोणीय निशानो को आधार बनाकर श्रमिक छत्तों का निर्माण करते हैं। यह छत्ते दोनों दिशाओं में बनाए जाते हैं।

जनन कक्ष में एक छोटा प्रवेश छिद्र होता है, जिसके द्वारा एक समय में एक ही मधुमक्खी प्रवेश कर सकती है और बाहर निकल सकती है।

रानी अपवर्जक :- यह तार की एक जाली का बना होता है, जिसके छिद्रों का आकार 2.3-3.5 एमएम तक हो सकता है। यह रानी अपवर्जक जनन कक्ष को शहद कक्ष से अलग करने का कार्य करता है।

इसके छिद्रों से श्रमिक मधुमक्खियाँ तो आ जा सकती है, किंतु रानी मधुमक्खी नहीं निकल सकती है, क्योंकि रानी मधुमक्खी आकार में बड़ी होती है। इस प्रकार जनन कक्ष से श्रमिक ही शहद कक्ष में शहद एकत्रित करने हेतु जा पाते हैं।

छत्ता आधार :- यह मधुमक्खी के मोम से आलेपित होती शीट है, जिस पर षटकोणीय निशान बने रहते हैं, जो श्रमिकों को कक्ष बनाने के लिए आधार प्रदान करते हैं। विभिन्न प्रजातियों की मधुमक्खियों के लिए विभिन्न

आकार के षटकोणीय निशाने वाली छत्ता आधार शीट बनाई जाती है। यह छत्ता आधार मोमी शीट को एक मशीन के दो बेलनों जिनमें षटकोणीय आधार बने होते हैं के मध्य से गुजार कर बनाया जाता है। 

इसके अलावा ढक्कन खोलने का चाकू लुक विलय, जिसे गर्म करके शहद के कक्षों की टोपी पर घुमाने से टोपी, खुल जाती है।

इसमें एक बड़ा ड्रम भी उपयोग में लाया जाता है, जिसके अंदर एक जालीदार डिब्बा भी रहता है, जिसे ड्रम के बाहर लगी चरखी द्वारा घुमाया जाता है।

ड्रम की पेंदी अंदर की तरफ को भी रहती है, तथा शहद बाहर निकालने के लिए एक छोटी सी टोंटी लगी रहती है। अंदर के जालीदार डिब्बे में शहद से भरे

छत्ते को रखकर डिब्बे को घुमाया जाता है, जिससे अपकेंद्री बल के कारण कक्षाओं से शहद बाहर आकर जाली से होता हुआ ड्रम में चला जाता है।

मधुमक्खी पालन के लाभ  Benefit of Beekeeping 

मधुमक्खी पालन के फलस्वरुप तीन प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं, जिसमें सबसे प्रमुख लाभ शहद उत्पादन होता है, क्योंकि शहर एक पौष्टिक आहार है और इसका प्रयोग शरीर को स्वस्थ रखने के लिए विभिन्न प्रकार से किया जाता है,

जैसे कि इसका उपयोग औषधियों में टॉनिक के रूप में होता है, तो वही इसका उपयोग चेहरे पर सुंदरता बढ़ाने के लिए भी किया जाता है। जीवाणुनाशक पूर्तिरोधी तथा एंटीसेप्टिक के रूप में भी शहद का उपयोग होता है,

जबकि मधुमक्खी पालन का दूसरा लाभ मधुमक्खी मॉम से होता है। मधुमक्खियों से प्राप्त होने वाले मॉम से लगभग 70 प्रतिशत से अधिक कॉस्मेटिक उत्पाद बनाए जाते हैं। इसके बाद इनका उपयोग

औषधि महत्व में भी होता है। इसके आलावा मधुमक्खियों से तीसरा उत्पाद भी प्राप्त होता है, उसे मधुमक्खी विष भी कहा जाता है, जिसका उपयोग कई असाध्य रोगों की दवाइयाँ बनाने में होता है।

आपने यहाँ पर मधुमक्खी पालन पर निबंध (Essay on bee keeping) पढ़ा। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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