तुलसी जी के 108 नाम 108 Names of Tulsi ji 

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख तुलसी जी के 108 नाम (108 Names of Tulsi ji) में। दोस्तों इस लेख में आप

माता तुलसी जी की महिमा उनके 108 नाम के साथ माता तुलसी कौन है, तुलसी नाम का अर्थ जानेंगे। तो आइये करते है, शुरू यह लेख तुलसी जी के 108 नाम:-

भगवान शिव जी के 108 नाम

तुलसी जी के 108 नाम


माता तुलसी कौन है Who was Mata Tulsi 

तुलसी जिसे आजकल लोग पौधा और तुलसी माता के रूप में जानते है दरअसल वह पूर्व जन्म मे एक लड़की थी, जो राक्षस कुल में जन्मी और उनका नाम वृंदा था। वे भगवान विष्णु की बड़ी भक्त थी, किन्तु उनका विवाह राक्षस कुल में ही दानव राज जलंधर से संपन्न हुआ।

राक्षस जलंधर बहुत शक्तिशाली और समुद्र से उत्पन्न हुआ था, उसकी पत्नी वृंदा बड़ी ही पतिव्रता स्त्री थी, और हमेशा अपने पति की सेवा किया करती थी।

एक समय जब देवताओ और दानवों में युद्ध आरम्भ हुआ जब जलंधर भी युद्ध पर जाने लगे तो वृंदा ने कहा.. स्वामी आप युद्ध पर जा रहे हैं,

आप जब तक युद्ध में रहेंगे, मैं पूजा में बैठकर आपकी जीत के लिए अनुष्ठान करुंगी। जब तक आप नहीं लौट आते मैं अपना संकल्प नहीं छोड़ूंगी।

जलंधर युद्ध में चला गया और वृंदा व्रत का संकल्प लेकर पूजा में बैठ गई और वृंदा के व्रत के प्रभाव से देवता जलंधर को न हरा सके।

सारे देवता हारने लगे तो सभी भगवान विष्णु जी के पास पहुंचे और सभी ने भगवान से प्रार्थना की कि वह जालंधर से उनकी रक्षा करें तथा वृंदा का संकल्प तोड़ने में मदद करें ताकि वे जालंधर का वध कर सकें।

तब भगवान विष्णु बोले, वृंदा मेरी परम भक्त है, मैं उससे छल नहीं कर सकता। इसपर देवता बोले कि भगवान अगर आप ऐसा नहीं कर सकते तो दूसरा कोई उपाय बताएँ, लेकिन हमारी मदद जरूर करें।

इस पर भगवान विष्णु ने विवश होकर जलंधर का रूप धरा और वृंदा के महल में पहुँच गए। वृंदा ने जैसे ही अपने पति जालंधर को देखा, तो तुरंत पूजा मे से उठ गई और उनके चरणों को छू लिया।

इस प्रकार वृंदा का संकल्प टूट गया और युद्ध में देवताओ ने जलंधर को मार दिया और उसका सिर काट कर अलग कर दिया। जलंधर का कटा हुआ सिर जब वृंदा के महल में आकर गिरा

तो वृंदा ने आश्चर्य से भगवान रूपी जालंधर की ओर देखा इस पर भगवान विष्णु अपने रूप में आ गए पर कुछ बोल न सके। वृंदा ने कुपित होकर भगवान विष्णु को श्राप दे दिया, कि वे पत्थर के हो जाएँ

और भगवान विष्णु तुरंत पत्थर के हो गए जिसकारण सभी देवताओं में हाहाकार मच गया। देवताओं ने वृंदा से भगवान विष्णु को श्रापमुक्त करने की विनती की तो देवताओं की प्रार्थना के बाद वृंदा ने

अपना श्राप वापस ले लिया। इसके बाद वे अपने पति का सिर लेकर सती हो गईं। इसके पश्चात् वृंदा की राख से एक पौधा निकला, जिसका नाम भगवान विष्णु जी ने तुलसी रखा और कहा कि

मैं इस पत्थर रूप में ही रहुंगा, जिसे शालिग्राम के नाम से तुलसी जी के साथ ही पूजा जाएगा। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि किसी भी शुभ कार्य में बिना तुलसी जी के भोग के पहले कुछ भी स्वीकार नहीं करुंगा।

तभी से ही तुलसी जी कि पूजा होने लगी। कार्तिक मास में तुलसी जी का विवाह शालिग्राम जी के साथ किया जाता है। साथ ही देव-उठावनी एकादशी के दिन इसे तुलसी विवाह के रूप में मनाया जाता है।

तुलसी जी के 108 नाम

तुलसी जी के 108 नाम 108 Name of Tulsi ji 

1.ॐ श्री तुलस्यै नमः।
2..ॐ नन्दिन्यै नमः।
3.ॐ देव्यै नमः।
4.ॐ शिखिन्यै नमः।
5.ॐ धारिण्यै नमः।
6.ॐ धात्र्यै नमः।
7.ॐ सावित्र्यै नमः।
8.ॐ सत्यसन्धायै नमः।
9.ॐ कालहारिण्यै नमः।
10.ॐ गौर्यै नमः।
11.ॐ देवगीतायै नमः।
12.ॐ द्रवीयस्यै नमः।
13.ॐ पद्मिन्यै नमः।
14.ॐ सीतायै नमः।
15.ॐ रुक्मिण्यै नमः।
16.ॐ प्रियभूषणायै नमः।
17.ॐ श्रेयस्यै नमः।
18.ॐ श्रीमत्यै 
19.ॐ मान्यायै नमः।
20.ॐ गौर्यै नमः।
21.ॐ गौतमार्चितायै नमः।
22.ॐ त्रेतायै नमः।
23.ॐ त्रिपथगायै नमः।
24.ॐ त्रिपादायै नमः।
25.ॐ त्रैमूर्त्यै नमः।
26.ॐ जगत्रयायै नमः।
27.ॐ त्रासिन्यै नमः।
28.ॐ गात्रायै नमः।
29.ॐ गात्रियायै नमः।
30.ॐ गर्भवारिण्यै नमः।
31.ॐ शोभनायै नमः।
32.ॐ समायै नमः।
33.ॐ द्विरदायै नमः।
34.ॐ आराद्यै नमः।
35.ॐ यज्ञविद्यायै नमः।
36.ॐ महाविद्यायै नमः।
37.ॐ गुह्यविद्यायै नमः।
38.ॐ कामाक्ष्यै नमः।
39.ॐ कुलायै नमः।
40.ॐ श्रीयै नमः।
41.ॐ भूम्यै नमः।
42.ॐ भवित्र्यै नमः।
43.ॐ सावित्र्यै नमः।
44.ॐ सरवेदविदाम्वरायै नमः।
45.ॐ शंखिन्यै नमः।
46.ॐ चक्रिण्यै नमः।
47.ॐ चारिण्यै नमः।
48.ॐ चपलेक्षणायै नमः।
49.ॐ पीताम्बरायै नमः।
50.ॐ प्रोत सोमायै नमः।
51.ॐ सौरसायै नमः।
52.ॐ अक्षिण्यै नमः।
53.ॐ अम्बायै नमः।
54.ॐ सरस्वत्यै नमः।
55.ॐ सम्श्रयायै नमः।
56.ॐ सर्व देवत्यै नमः।
57.ॐ विश्वाश्रयायै नमः।
58.ॐ सुगन्धिन्यै नमः।
59.ॐ सुवासनायै नमः।
60.ॐ वरदायै नमः।
61.ॐ सुश्रोण्यै नमः।
62.ॐ चन्द्रभागायै नमः।
63.ॐ यमुनाप्रियायै नमः।
64.ॐ कावेर्यै नमः।
65.ॐ मणिकर्णिकायै नमः।
66.ॐ अर्चिन्यै नमः।
67.ॐ स्थायिन्यै नमः।
68.ॐ दानप्रदायै नमः।

69.ॐ धनवत्यै नमः।
70.ॐ सोच्यमानसायै नमः।
71.ॐ शुचिन्यै नमः।
72.ॐ श्रेयस्यै नमः।
73.ॐ प्रीतिचिन्तेक्षण्यै नमः।
74.ॐ विभूत्यै नमः।
75.ॐ आकृत्यै नमः।
76.ॐ आविर्भूत्यै नमः।
77.ॐ प्रभाविन्यै नमः।
78.ॐ गन्धिन्यै नमः।
79.ॐ स्वर्गिन्यै नमः।
80.ॐ गदायै नमः।
81.ॐ वेद्यायै नमः।
82.ॐ प्रभायै नमः।
83.ॐ सारस्यै नमः।
84.ॐ सरसिवासायै नमः।
85.ॐ सरस्वत्यै नमः।
86.ॐ शरावत्यै नमः।
87.ॐ रसिन्यै नमः।
88.ॐ काळिन्यै नमः।
89.ॐ श्रेयोवत्यै नमः।
90.ॐ यामायै नमः।
91.ॐ ब्रह्मप्रियायै नमः।
92.ॐ श्यामसुन्दरायै नमः।
93.ॐ रत्नरूपिण्यै नमः।
94.ॐ शमनिधिन्यै नमः।
95.ॐ शतानन्दायै नमः।
96.ॐ शतद्युतये नमः।
97.ॐ शितिकण्ठायै नमः।
98.ॐ प्रयायै नमः।
99.ॐ धात्र्यै नमः।
100.ॐ श्री वृन्दावन्यै नमः।
101.ॐ कृष्णायै नमः।
102.ॐ भक्तवत्सलायै नमः।
103.ॐ गोपिकाक्रीडायै नमः।
104.ॐ हरायै नमः।
105.ॐ अमृतरूपिण्यै नमः।
106.ॐ भूम्यै नमः।
107.ॐ श्री कृष्णकान्तायै नमः।
108.ॐ श्री तुलस्यै नमः।

दोस्तों यहाँ पर आपने तुलसी जी के 108 नाम (108 Names of Tulsi ji) के साथ माता तुलसी कौन थी कथा पढ़ी। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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