बुद्ध पूर्णिमा पर निबंध Essay on Buddha Purnima

बुद्ध पूर्णिमा पर निबंध Essay on Buddha Purnima 

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है, आज के हमारे इस लेख बुद्ध पूर्णिमा पर निबंध (Essay on Buddha Purnima) में।

दोस्तों इस लेख के माध्यम से आज आप बुद्ध पूर्णिमा के बारे में जानेंगे, कि बुद्ध पूर्णिमा क्या है? बुद्ध पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है?

बुद्ध पूर्णिमा कब मनाई जाती है और बुद्ध पूर्णिमा का महत्व तथा संबंध क्या है, तो आइए दोस्तों करते हैं, आज का यह लेख शुरू बुद्ध पूर्णिमा पर निबंध:-

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बुद्ध पूर्णिमा पर निबंध

बुद्ध पूर्णिमा क्या है What is Buddha Purnima 

संसार में ऐसे कई महापुरुष जन्मे हैं, जिन्होंने मानव जाति के कल्याण और उद्धार के लिए अपना सर्वस्व दान कर दिया है, उन्होंने लगातार कष्टों में रहकर मानव जाति के उद्धार और कल्याण के लिए अनेक प्रकार के मार्ग खोजने की कोशिश की है।

ऐसे महान पुरुषों में से एक भारत वर्ष के महापुरुष है 'महात्मा बुद्ध' महात्मा बुद्ध बौद्ध धर्म के संस्थापक तथा प्रतिपादक माने जाते हैं,

जिन्होंने मनुष्य को कल्याण मार्ग सत मार्ग पर चलने के लिए बौद्ध धर्म की स्थापना की। ऐसे महान पुरुष महात्मा बुद्ध की जयंती को ही संपूर्ण देश तथा विश्व भर में बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है।

सामान्य तौर पर बुद्धपूर्णिमा हमेशा वैशाख महीने (अप्रैल -मई ) में पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इस दिन लोग महात्मा बुद्ध को याद करते हैं उनकी शिक्षाओं का अनुसरण करते है, व्रत रखते हैं

और अपने गुरुओं के पास जाकर उनसे शिक्षा लेते हैं, उनको सम्मान देते हैं, चरण वंदना करते है। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा आदि का भी इस दिन विशेष महत्व रहता है।

महात्मा बुद्ध का परिचय Introduction of Mahatma Buddha 

धार्मिक आंदोलनों में कई नवीन धर्मो ने जन्म लिया जिनमें से एक धर्म था "बौद्ध धर्म" जो सर्वाधिक शक्तिशाली और प्रभावशाली सिद्ध हुआ।

ऐसे बौद्ध धर्म के संस्थापक तथा प्रतिपादक महात्मा बुद्ध थे, जिनका जन्म 563 ईसवी में कपिलवस्तु के पास ही निकट गांव लुंबिनी में हुआ था।

महात्मा बुद्ध के बचपन का नाम सिद्धार्थ था और पिता जी का नाम शुद्धोधन था जो उस समय शाक्य गणराज्य के शासक हुआ करते थे।

महात्मा बुद्ध की माता जी का नाम था महामाया जिनकी मृत्यु मृत्यु उनके जन्म के पश्चात हो गई थी, इसलिए इनका पालन-पोषण इनकी मौसी प्रजापति गौतमी

ने किया। महात्मा बुद्ध का विवाह यशोदा नामक सुंदर कन्या से हुआ जिनसे उनका एक पुत्र उत्पन्न हुआ, जिसका नाम था 'राहुल' किंतु 29 वर्ष की अवस्था में ही महत्मा बुद्ध एक साधु एक मृत तथा

एक वृद्ध व्यक्ति को देखकर गृह त्याग बनवास चले गए और सत्य की खोज में उन्होंने कई दुखों और कष्टों को सहा। महात्मा बुद्ध ने सबसे पहले अपना गुरु आलार कलाम को बनाया।

महात्मा बुद्ध ने निरंजना नदी के तट पर उरूबेला नाम के स्थान पर तपस्या की तभी उन्हें बुद्धत्व सर्वोच्च ज्ञान की प्राप्ति हुई और वह बुद्ध कहलाए।

उन्होंने अपना पहला उपदेश सारनाथ में दिया जिसे धर्मचक्रप्रवर्तन कहा जाता है। महात्मा बुद्ध की मृत्यु 483 ईसवी पूर्व में अर्थात 80 वर्ष की अवस्था में मगध राज्य की राजधानी कुशीनारा में हुआ था जिसे महापरिनिर्वाण के नाम से जाना जाता है। 

महात्मा बुद्ध की शिक्षाएँ Teachings of Mahatma Budhdha 

ज्ञान प्राप्ति के बाद महात्मा बुद्ध ने अपना पूरा जीवन असहाय गरीबों तथा सतमार्ग से भ्रमित लोगों की सेवा और उन्हीं के कल्याण में व्यतीत कर दिया।

महात्मा बुद्ध ने चार आर्य सत्य दिए:- 

जीवन दुखमय है, (दुख)
तृष्णा, लालसा, मोह आदि सांसारिक जीवन के कारण हैं (दुख समुदाय)
तृष्णा, लालसा, मोह आदि को समाप्त करके जीवन से मुक्ति प्राप्त की जा सकती है, (दुख निरोध)
इसके लिए अष्टांगिक मार्ग का अनुसरण करना होगा (दुख निरोध गामिनी प्रतिपदा)

बौद्ध धर्म के त्रिरत्न हैं:- 

बुद्ध, धम्म और संघ

बौद्ध धर्म का अष्टांगिक मार्ग

सम्यक दृष्टि - सही विश्वास (सत्य में)
सम्यक संकल्प - सही इरादा (बुराई के बजाय अच्छा करने में)
सम्यक वाणी - सही भाषण (असत्य, निंदा और शपथ ग्रहण से बचें)
सम्यक कर्म - सही व्यवहार (दोष पूर्ण व्यवहार से बचें)
सम्यक आजीव - सही आजीविका (कुछ व्यवसाय जैसे कसाई, प्रचारक, अपमानित थे)
सम्यक व्यायाम - सही प्रयास (अच्छे की तरफ)
सम्यक स्मृति - सही एकाग्रता (इन नियमों का पालन करने के परिणामस्वरूप)
सम्यक समाधि - सही अनुष्ठान (सत्य का)

बौद्ध धर्म के बारे में अन्य जानकारी Other information of buddhist 

बौद्ध धर्म में प्रवेश लेने वाले व्यक्तियों को बौद्ध भिक्षु कहा जाता था, जिनके मार्गदर्शन के लिए महात्मा बुद्ध ने बौद्ध संघ की स्थापना की।

संघ में व्यक्तियों के प्रयास के लिए उपसंपदा नामक संस्कार हुआ करता था, जो लोग गृहस्थ जीवन में रहकर बौद्ध धर्म स्वीकार करते थे, उनको उपासक कहा जाता था।

बौद्ध संघ में पहले महिलाओं का प्रवेश नहीं था किंतु आनंद और महाप्रजापति गौतमी के कहने पर महिलाओं के लिए अलग से बौद्ध संघ की स्थापना हुई।

बौद्ध धर्म ग्रंथों की रचना पाली भाषा में हुई है, इसमें सबसे प्रमुख धर्म ग्रंथ त्रिपिटक है, जो सुत्तपिटक, विनयपिटक और अभीधम्मपिटक में विभाजित है।

महात्मा बुद्ध की मृत्यु के पश्चात बौद्धधर्म कई संप्रदायों में विभक्त हो गया जिनमें हीनयान और महायान प्रमुख संप्रदाय थे।

बौद्ध धर्म की चार संगीतियाँ Boddhist sangeetiyan 

प्रथम बौद्ध संगीति 483 ईसवी पूर्व में राजगृह में हुई थी उस समय शासक अजातशत्रु थे तथा इसके अध्यक्ष महाकश्यप को चुना गया था।

द्वितीय बौद्ध संगीति 383 ईसवी पूर्व में वैशाली में हुई थी उस समय शासक कालाशोक था तथा सर्वकामिन को अध्यक्ष चुना गया था।

तृतीय बौद्ध संगीति 250 ईसवी पूर्व में पाटलिपुत्र में हुई थी और समय सम्राट थे अशोक तथा अध्यक्ष मोगलीपुत्ततिस्स को चुना गया था।

चतुर्थ बौद्ध संगीति 72 ईसवी पूर्व में हुई जिसका आयोजन कुंडलवन कश्मीर में किया गया जबकि उस समय शासक कनिष्क थे और अध्यक्ष वसुमित्र थे। 

बुद्ध पूर्णिमा 2022 में कब मनाई जाएगी Buddha Purnima in 2022

बुद्ध पूर्णिमा भगवान महात्मा बुद्ध जिन्हे विष्णु भगवान का नौवाँ अवतार भी माना जाता है की जयंती के उपलक्ष में संपूर्ण संसार में मनाए जाने वाला पवित्र त्यौहार होता है, जो प्रत्येक वर्ष बैसाखी की पूर्णिमा को मनाया जाता है।

बुद्ध पूर्णिमा भारतवर्ष संपूर्ण संसार में 2022 में 16 मई को मनाई जाएगी इसका शुभ मुहूर्त 15 मई की मध्य रात्रि के 12:45 से शुरू होगा जो सोमवार को पूरे दिन रहेगा और रात्रि 9:43 पर समाप्त होगा।

बुद्ध पूर्णिमा के दिन विधि विधान से पूजा अर्चना करने पर घर परिवार में सुख शांति रहती है तथा कई कष्टों से व्यक्ति पार हो जाता है। बुद्ध पूर्णिमा के दिन व्यक्ति किसी पवित्र नदी में स्नान करके दान देता है

तो उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं उसे ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। बुद्ध पूर्णिमा के दिन पीपल को जल देना, सूर्य देव को अर्ध्य देना,

भगवान विष्णु और माँ लक्ष्मी की पूजा करना अपने गुरु आदि की सेवा करना उनके चरण स्पर्श करना तथा दान देना पड़ा ही लाभकारी माना जाता है।

बुद्ध पूर्णिमा का महत्व Importence of Buddha purnima 

जो लोग ईश्वर में आस्था रखते हैं, दूसरों को दुख नहीं देते हैं, उनके दुख में सहायता करते हैं, पशु पक्षी जानवरों के प्रति दया रखते हैं, लोगों से प्रेम करते हैं

ऐसे लोग हमेशा ही जग में पूज्यनीय और सम्मानीय होते हैं और भगवान भी उन्हें अपना आशीष प्रदान करते हैं, किंतु हिंदू धर्म में कुछ ऐसे पर्व कुछ ऐसी तिथियाँ भी होती हैं, जिनका विशेष महत्व होता है।

इसी प्रकार बुद्ध पूर्णिमा का अपने आप में एक विशेष महत्व होता है और इस बार बुद्ध पूर्णिमा 2022 को एक खास योग बन रहा है क्योंकि चंद्र ग्रहण होने के कारण बहुत से लोगों को इसका लाभ मिलने वाला है।

बुद्ध पूर्णिमा के दिन व्यक्ति को किसी भी पवित्र नदी या घर में शीतल जल से स्नान करना चाहिए, पवित्र वस्त्र धारण करना चाहिए, तथा भगवान श्री हरि विष्णु तथा माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए।

सूर्य भगवान को अर्ध्य देना, पीपल के वृक्ष को पानी देना तुलसी की पूजा करना, ब्राह्मणों तथा गरीबों को दान देना गौ को हरा चारा देना तथा पानी पिलाना, पक्षियों को पानी और दाना देना

आदि चंद्र ग्रहण के बाद करने से मनुष्य को सुख शांति प्राप्त होंगी घर में माँ लक्ष्मी का प्रवेश होगा तथा हर एक प्रकार की आपदा और मुसीबत दूर होंगी नकारात्मक ऊर्जा दूर होंगी और सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार होगा, चंद्र ग्रह का दुष्प्रभाव शून्य हो जायेगा,

कई रोग दोष दूर हो जायेंगे ऐसे में अपने-अपने गुरुओं का सम्मान कर उनकी चरण वंदना करना उनसे दीक्षा और आशीर्वाद लेना बहुत ही लाभकारी सिद्ध होता है।

दोस्तों यहाँ पर आपने बुद्ध पूर्णिमा पर निबंध (Essay on Buddha Purnima) के साथ अन्य तथ्य पढ़े। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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