गायत्री मन्त्र के नुकसान Gaytri Mantra ke nuksaan in hindi 

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख गायत्री मन्त्र के नुकसान (Gaytri Mantra ke nuksaan in hindi) में।

दोस्तों इस लेख के माध्यम से आप गायत्री मन्त्र के नुकसान के साथ गायत्री मन्त्र क्या है अर्थ, गायत्री मन्त्र का जाप कब नहीं करना चाहिए, गायत्री मन्त्र का जाप कौन - कौन कर सकता है, आदि जान पायेंगे। तो आइये शुरू करते है, यह लेख गायत्री मन्त्र के नुकसान:-

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गायत्री मन्त्र के नुकसान

गायत्री मन्त्र क्या है अर्थ what is gaytri Mantra Meaning 

गायत्री मन्त्र माता गायत्री देवी को समर्पित है, जो ऋग्वेद के तीसरे मण्डल से लिया गया है किन्तु इसकी रचना यजुर्वेद और ऋग्वेद दोनों वेदों से हुई है।

गायत्री मन्त्र एक महामंत्र है, जो अन्य कई शक्तिशाली मंत्रो के समान है, इसलिए इसका उल्लेख चारों वेदों में देखने को मिलता है।

गायत्री मन्त्र Gaytri Mantra

ॐ भूर् भुवः स्वः।
तत् सवितुर्वरेण्यं।
भर्गो देवस्य धीमहि।
धियो यो नः प्रचोदयात् ॥

हिन्दी में व्याख्या 

उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अपनी अन्तरात्मा में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे।

गायत्री मन्त्र के नुकसान

गायत्री मन्त्र के नुकसान Gayatri Mantra ke Nuksaan 

गायत्री मन्त्र को हिन्दुओं का महामंत्र कहा जाता है, जिससे बुद्धि का विकास भक्ति में आस्था घर में सुख - सम्पति आदि का आगमन होता है, व्यक्ति सभी कष्टों से मुक्त होकर मुक्ति के पथ पर अग्रसर हो जाता है।

गायत्री मन्त्र की महानता और जाप से व्यक्ति को सभी सुख, धन व्यापार में उन्नति तथा घर परिवार में सुख सुमृद्धि और वृद्धि होती है, किन्तु गायत्री मन्त्र का नुकसान भी होता है।

अगर व्यक्ति गलत उद्देश्य के लिए गायत्री मन्त्र को सिद्ध करता है, या अशुद्ध स्थिति और मन में गायत्री मन्त्र के प्रति आस्था ना रखकर जाप करता है, तो गायत्री मन्त्र के नुकसान देखने को मिलते है।

व्यक्ति धन व्यापार में घाटा खाता है, परिवार में कलह उत्पन्न होता है मृत्यु का भय बना रहता है। यहाँ तक की व्यक्ति इसके दुष्प्रभाव से व्यक्ति गरीब तक हो जाता है। जो व्यक्ति दूसरों को कष्ट देता है,

अनीतिपूर्ण कार्य करता है, पाप करता है, तो गायत्री मन्त्र का उसे कोई लाभ नहीं मिलता है, कियोकि गायत्री मन्त्र का जाप करने वाला वैराग्य की ओर गमन करता है उसके पाप, पुण्य नष्ट होने लगते है, और वह व्यक्ति मुक्ति की राह पर अग्रसर हो जाता है।

गायत्री मन्त्र का जाप कब नहीं करना चाहिए Gaytri Mantra 

गायत्री मन्त्र जाप करने का सही तरीका और समय भी बहुत महत्वपूर्ण होता है, इसलिए यह जानना बहुत आवश्यक हो जाता है, कि गायत्री मन्त्र का जाप कब नहीं करना चाहिए।

गायत्री मन्त्र का जाप विभिन्न लाभप्रद करता है, किन्तु जब गायत्री मन्त्र का जाप ठीक समय पर विधि - विधान से किया जाये, वरना इससे कोई लाभ प्राप्त नहीं होता और गायत्री मन्त्र जाप के नुकसान झेलने पढ़ते है।

गायत्री मन्त्र का जाप सूर्यास्त के बाद, मध्य रात्रि में नहीं करना चाहिए वरना व्यक्ति पतन की और जा सकता है। गायत्री मन्त्र के जाप का सही समय सूर्योदय से पहले और सूर्योदय के बाद तक तथा दोपहर में

जबकि संध्याकाल में सूर्यास्त होने से पहले से सूर्यास्त के बाद तक उत्तम होता है। इस समय व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से शुद्ध होकर किसी भी पवित्र स्थान पर बैठकर माता गायत्री का कम से कम 108 बार जाप करने से मनोवांक्षित फल की प्राप्ति होती है।

गायत्री मन्त्र का जाप कौन - कौन कर सकता है Gayatri Mantra 

गायत्री मन्त्र हिन्दु धर्म की वह बड़ी शक्ति है जिसके उपयोग से मनुष्य अपनी जिंदगी संवार सकता है। किन्तु यह भी जान लेना आवश्यक है, कि गायत्री मन्त्र का जाप कौन - कौन कर सकता है?

गायत्री मन्त्र का जाप हिन्दु घर्म के सभी व्यक्तियों द्वारा किया जा सकता है। परन्तु कुछ ऐसी स्थितियाँ होती है, जहाँ पर स्त्री पुरुष दोनों को गायत्री मन्त्र का जाप नहीं करना चाहिए। गायत्री मन्त्र पूर्ण शुद्धता

के साथ किया जाता है, इसलिए नशे की हालत में अशुद्ध अवस्था में स्त्री तथा पुरुषों को गायत्री मन्त्र का जाप नहीं करना चाहिए। जो स्त्रियाँ माहवारी से ग्रसित है उन्हें भी गायत्री मन्त्र का जाप नहीं करना चाहिए।

दोस्तों आपने यहाँ पर गायत्री मन्त्र के नुकसान (Gaytri Mantra ke nuksaan in hindi) में पढ़े। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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