महामृत्युंजय मंत्र लिरिक्स तथा जाप Mahamrityunjay Mantra lyrics in Hindi

हैलो दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख महामृत्युंजय मंत्र लिरिक्स तथा जाप (Mahamrityunjay Mantra lyrics in hindi) में। दोस्तों यहाँ पर आप महामृत्युंजय मंत्र लिरिक्स तथा जाप के साथ महामृत्युंजय मंत्र क्या है,

महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ इन हिंदी, महामृत्युंजय मंत्र की उत्पति के साथ महामृत्युंजय मंत्र के फायदे जानेंगे. तो आइये शुरू करते है, यह लेख महामृत्युंजय मंत्र लिरिक्स तथा जाप:-

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महामृत्युंजय मंत्र लिरिक्स तथा जाप

महामृत्युंजय मंत्र क्या है what is Mahamrityunjay Mantra

हिन्दु धर्म ग्रंथो में देवी देवताओं को प्रसन्न करने और उनका आशीष प्राप्त करने के लिए देवताओं और देवियो के पृथक - पृथक स्तुति मन्त्र होते है,

जिनका विधि विधान से जाप करने पर व्यक्ति को मनोवांक्षित फल की प्राप्ति होती है। इसी प्रकार एक मन्त्र है महामृत्युंजय मंत्र जो भगवान शिव की स्तुति के लिए ऋषियों द्वारा रचित किया गया था।

भगवान शिव के महामृत्युंजय मंत्र का विधि विधान से जाप करने पर भक्त मृत्यु के भय से दूर रहता है, भक्त की आयु लम्बी होती है, मन शांत रहता है, परिवार में सुख और शांति रहती है।

महामृत्युंजय मंत्र लिरिक्स तथा जाप

महामृत्युंजय मंत्र लिरिक्स Mahamrityunjay Mantra lyrics

ऋषियों द्वारा दीर्धआयु प्रदान कारक महामृत्युंजय मंत्र लिरिक्स निम्न प्रकार से है:- 

ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः,
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।
ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ।।

महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ इन हिंदी Meaning of Mahamrityunjay Mantra in hindi 

महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव की भक्ति और उनकी कृपा प्राप्ति का मन्त्र है, जिसका हिंदी अर्थ निम्नप्रकार से है:- 

हम त्रिनेत्र अर्थात भगवान शिव को पूजते हैं, जो सुगंधित हैं, हमारा अर्थात संसार के सभी जीवों का पोषण करते हैं, जिस तरह फल, शाखा के बंधन से मुक्त हो जाता है, वैसे ही हम भी मृत्यु और नश्वरता से मुक्त हो जाएँ।

महामृत्युंजय मंत्र की उत्पति Mahamrityunjay Mantra ki utpatti 

महामृत्युंजय मंत्र की उत्पति कैसे हुई इस विषय में मतभेद है, कियोकि पौराणिक धर्म ग्रंथो में महामृत्युंजय मंत्र की उत्पतिकी अलग - अलग कथाएँ प्रचलित है, यहाँ पर एक कथा का वर्णन किया गया है। 

एक समय एक शिव भक्त ऋषि हुआ करते थे जिनका नाम था मृकण्डु जिनकी कोई संतान नहीं थी। एक बार मृकण्डु ने संतान प्राप्ति के लिए भगवान शिव की कठोर तपस्या की और तपस्या से प्रसन्न होकर

भगवान शिव ने ऋषि मृकण्डु को इच्छानुसार संतान प्राप्त होने का वर तो दे दिया, किन्तु शिवजी ने ऋषि मृकण्डु को बताया कि उनका यह पुत्र अल्पायु होगा।

भगवान शिव के आशीर्वाद के फलस्वरूप कुछ समय बाद ऋषि मृकण्डु को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई और ऋषियों ने बताया कि इस संतान की उम्र केवल 16 साल ही होगी। यह सुनते ही ऋषि मृकण्डु दुखी हो गए।

उनको दुखी देख जब उनकी पत्नी ने दुःख का कारण पूंछा तो उन्होंने सारी बात बताई। तब उनकी पत्नी ने कहा कि यदि शिव जी की कृपा होगी, तो यह विधान भी वे टाल देंगे। ऋषि ने अपने पुत्र का नाम मार्कण्डेय रखा और उन्हें शिव मंत्र भी दिया।

मार्कण्डेय बचपन से ही शिव भक्ति में लीन रहने और जब मार्कण्डेय की मृत्यु का समय निकट आया तो ऋषि मृकण्डु ने अपने पुत्र की अल्पायु की बात पुत्र मार्कण्डेय को बताई। साथ ही उन्होंने कहा

कि यदि शिवजी चाहेंगें तो इसे टाल देंगें। माता-पिता के दुःख को दूर करने के लिए मार्कण्डेय ने शिव जी से दीर्घायु का वरदान पाने के लिए शिव जी आराधना शुरू कर दी। मार्कण्डेय जी ने दीर्घायु का वरदान की प्राप्ति हेतु शिवजी की आराधना के लिए

महामृत्युंजय मंत्र की रचना की और शिव मंदिर में बैठ कर इसका अखंड जाप करने लगे।  जब मार्कण्डेय की आयु का समय पूरा हुआ तो मार्कण्डेय के प्राण लेने के लिए यमदूत आये परंतु उन्हें शिव की तपस्या में लीन देखकर वे यमराज के पास वापस

आकर पूरी बात बताई। तब मार्कण्डेय के प्राण लेने के लिए यमराज स्वयं आये। यमराज ने जब अपना पाश मार्कण्डेय पर डाला, तो बालक मार्कण्डेय शिवलिंग से लिपट गए. ऐसे में पाश गलती से शिवलिंग पर जा गिरा.

यमराज की आक्रमकता पर शिव जी बहुत क्रोधित हुए. और यमराज से मार्कण्डेय की रक्षा के लिए भगवान शिव प्रकट हुए. इस पर यमराज ने विधि के नियम की याद दिलाई. तब शिवजी ने मार्कण्डेय को दीर्घायु का वरदान देकर विधान ही बदल दिया। 

महामृत्युंजय मंत्र के लाभ Benefits of Mahamrityunjay Mantra

महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव को प्रसन्न करने वाला मंत्र है, जिसका उल्लेख ऋग्वेद, यजुर्वेद के साथ पुराणों में भी दिखाई देता है। महामृत्युंजय मंत्र का जाप रुद्राक्ष की माला के 108 बार करने पर कई प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं। महामृत्युंजय मंत्र के जाप करने से

जीवन की कई बाधाएं दूर हो जाती है, अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है, लंबी आयु होती है, घर में सुख शांति समृद्धि आती है, शरीर निरोग, दंपति को संतान सुख प्राप्त होती है। महामृत्युंजय मंत्र का जाप महाशिवरात्रि के दिन करने पर विशेष लाभकारी होता है।

महामृत्युंजय मंत्र का जाप पवित्र स्थान पर बैठकर शरीर और मन दोनों को ही पवित्र करके कम से कम एक माला 108 बार करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली सभी संकट खत्म हो जाते हैं।

दोस्तों आपने यहाँ महामृत्युंजय मंत्र लिरिक्स तथा जाप (Mahamrityunjay Mantra lyrics in Hindi) में पढ़ा। आशा करता हूँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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