पोषण पर निबंध हिंदी में Poshan par nibandh

पोषण पर निबंध हिंदी में Poshan par nibandh 

हैलो दोस्तों आपका इस लेख पोषण पर निबंध हिंदी में (Poshan par nibandh) में बहुत - बहुत स्वागत है। दोस्तों इस लेख में आप पोषण किसे कहते है, पोषण के प्रकार तथा पोषक तत्वों के बारे में पढ़ेंगे।

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पोषण पर निबंध हिंदी में


पोषण किसे कहते हैं what is nutrition 

समस्त प्रकार के जीवधारी विभिन्न प्रकार के कार्य करते हैं, और उन कार्यों को करने के लिए उन्हें ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इसलिए वह अपने बाहय वातावरण से विभिन्न प्रकार के भोज्य पदार्थों को एकठ्ठा करके खाते है जिनसे उन्हें ऊर्जा मिलती है

और वे कार्य करते है। इस क्रिया विधि को ही पोषण (Nutrition) कहा जाता है। साधारण शब्दों में कह सकते हैं, कि पोषण एक प्रकार की वह जैव रासायनिक क्रिया है, जिसके अंतर्गत समस्त प्रकार के

जीव जंतु अपने बाहय वातावरण (External Environment) से भोज्य पदार्थों को इकट्ठा करके ग्रहण करते हैं। तथा इन से मुक्त होने वाली ऊर्जा से अपने शरीर की वृद्धि और विकास करते हैं, वह विधि पोषण कहलाती है।

पोषण पर निबंध हिंदी में

पोषण का अर्थ Meaning of Nutrition

पोषण एक जैव रासायनिक प्रिक्रिया है, जिसमें जीवधारी वातावरण से भोज्य पदार्थ खाते है जिनका ऑक्सीजन की उपस्थिति में ऑक्सीकरण (Oxidation) होता है और ऊर्जा मुक्त होती है जिसका उपयोग जीवधारी की वृद्धि, विकास तथा रोगों से लड़ने तथा दैनिक कार्य करने में होता है।

पोषण परिभाषा Nutrition definition

देश विदेश के कई वैज्ञानिकों, संस्थाओं ने अपने अनुसार पोषण की परिभाषा (Definition) दी हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख परिभाषाएँ निम्न प्रकार से हैं:-

  1. चैंबर्स डिक्शनरी के अनुसार - पोषण का अर्थ है, एक्ट और प्रोसेस ऑफ नरिसिंग (Act and Process of Nursing) अर्थात भोजन चूषक कार्य अथवा प्रक्रिया जहाँ पर चूषक शब्द का अर्थ है, कि भोजन के प्रमुख तत्वों को खींचकर शरीर का एक अंग बनाना।
  2. टर्नर के अनुसार - पोषण शरीर में होने वाली विभिन्न क्रियाओं का एक संगठन है, जिसके द्वारा जीवित प्राणी ऐसे पदार्थों को ग्रहण तथा उपयोग करता है, जो शरीर के विभिन्न कार्यों को नियंत्रित करता है, वृद्धि करता है, तथा शारीरिक टूट-फूट की मरम्मत भी करता है।

पोषण के प्रकार हैं Type of Nutrition

पोषण दो प्रकार के होते हैं, स्वपोषी पोषण और विषमपोषी पोषण जिन्हे निम्न प्रकार समझते है:- 

  1. स्वपोषी पोषण :- स्वपोषी पोषण वह पोषण होता है, जिसमें जीवधारी अपने भोज्य पदार्थ के लिए किसी अन्य जीव या वनस्पति पर निर्भर (Dependent) नहीं करते अर्थात स्वपोषी पोषण के अंतर्गत जीवधारी अपना भोजन (Foods) स्वयं बनाते हैं। इस पोषण के अंतर्गत उन सभी जीवधारियों को रखा गया है, जो क्लोरोफिल युक्त होते हैं, क्योंकि यह क्लोरोफिल, सूर्य का प्रकाश, जल तथा कार्बन डाइऑक्साइड की सहायता से भोजन (Glocose) तथा ऑक्सीजन का उत्पादन करते हैं। उदाहरण के लिए प्रमुख रूप से हरे पौधे स्वपोषी पोषण प्रदर्शित करते है।
  2. विषमपोषी पोषण :- विषमपोषी पोषण वह पोषण होता है, जिसमें जीवधारी अपने भोजन के लिए अन्य जीव धारियों तथा वनस्पतियों पर निर्भर करते हैं। इनमें उन सभी जीव धारियों को शामिल किया गया है, जिनमें क्लोरोफिल (Chlorophyll) नहीं पाया जाता और यह अपना भोजन स्वयं नहीं बना पाते हैं. जैसे- शेर हिरन सुआरा आदि। विषमपोषी पोषण निम्न प्रकार का होता है:- 

  • जंतु सम / प्राणी सम पोषण (Animal feed)- इस प्रकार के पोषण में ठोस प्रकार के भोज्य पदार्थ ग्रहण किए जाते हैं. अधिकतर जीव जंतु इसी प्रकार का पोषण दर्शाते हैं।
  • मृतजीवी पोषण (Survival nutrition) - इस पोषण में जंतु मृत कार्बनिक पदार्थों को भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं इसके अंतर्गत जीवाणु तथा अन्य सूक्ष्मजीवों को रखा गया है।
  • परजीवी पोषण (Parasitic nutrition) - परजीवी पोषण वह पोषण होता है, जिसमें एक जीव दूसरे जीव पर भोजन के लिए पूरी तरह से निर्भर रहता है, जिस प्रकार से प्लाज्मोडियम (Plasmodium) आदि।

पोषण आहार एवं पोषक तत्व Poshan Aahar or Poshak Tatva 

ऐसे तत्व जो शरीर को पोषण प्रदान करते हैं, जिनसे ऊर्जा और शक्ति मिलती है, तथा रोगों से बचाव और शरीर के लिए आवश्यक होते है, उन तत्वों को पोषक तत्व के नाम से जाना जाता है, जिन्हें निम्न 6 समूहों में बांटा गया है।

  1. कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrate):- कार्बोहाइड्रेट वे पोषक पदार्थ होते हैं, जिनका भोज्य पदार्थों में विशेष स्थान होता है, क्योंकि यह भारत ही नहीं बल्कि विश्व के सभी जीव जंतुओं का मुख्य पोषक पदार्थ (Main nutrients) होता है। दैनिक कार्य करने के लिए, सभी प्रकार की गतिविधियों के लिए, कार्बोहाइड्रेट्स की अतुलनीय भूमिका होती है। कार्बोहाइड्रेट्स कार्बन (Carbon) हाइड्रोजन (Hydrogen) और ऑक्सीजन (Oxigen) से मिलकर बने होते हैं, जिस में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का अनुपात जल के समान अर्थात 2:1 होता है। कार्बोहाइड्रेट शरीर को लगभग 70% ऊर्जा (Energy) प्रदान करते हैं। कार्बोहाइड्रेट्स, चावल, मक्का, गेहूं, बाजरा, चुकंदर, शकरकंद तथा विभिन्न प्रकार के भोज्य पदार्थ में उपस्थित होता है। कार्बोहाइड्रेट्स (Carbohydrates) तीन प्रकार का होता है। मोनोसैकेराइड (Monosaccharide), डाईसैकेराइड (Disaccharide), पालीसैकेराइड (Polysaccharide) होते है।
  2. प्रोटीन (Protein) :-  प्रोटीन भी एक प्रकार के कार्बनिक योगिक (Organic Compound) होते हैं, जो कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से मिलने से बनते हैं। प्रोटीन का हमारे आहार में सबसे प्रमुख स्थान होता है, क्योंकि यह शरीर की वृद्धि विकास (Growth development) और टूट-फूट की मरम्मत करने के लिए उत्तरदाई होता है। प्रोटीन के द्वारा ही रक्त मांसपेशियाँ, तंतु, त्वचा, बाल आदि निर्मित होते हैं। इसलिए जीवित रहने के लिए प्रोटीन बहुत ही आवश्यक होती है। अधिकतर एंजाइम्स, हारमोंस, एंटीजन, एंटीबॉडी सब प्रोटीन के ही बने होते हैं। प्रोटीन मुख्य रूप से दालों में अनाज में चावल में दूध में तथा मांसाहारी पदार्थ (Non-vegetarian food) में भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
  3. वसा (Fat) :- वसा कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन की तरह ही कार्बनिक योगिक होते हैं, जो प्रकृति में बहुतायत में उपलब्ध हैं, वसा गिलिसरीन (Glycerin) तथा वसीय अम्ल (fatty acids) का मिश्रण होता है, जिन्हें छूने पर चिकनाई महसूस होती है। 1 ग्राम वसा से लगभग शरीर को 9 कैलोरी ऊर्जा की प्राप्ति होती है। वसा मुख्यत: प्राकृतिक तेल, सूरजमुखी, मूंगफली, पनीर दूध, मक्खन, मछली मांस में प्रचुर मात्रा में पाई जाती है।
  4. खनिज लवण (Mineral salts) :- वे अकार्बनिक पदार्थ जो हमारे शरीर के लिए सूक्ष्म मात्रा में आवश्यक होते हैं। किंतु अपनी उपस्थिति के कारण ही विभिन्न प्रकार की अभिक्रियाओ को सुचारू रूप से चलाने में सहायता प्रदान करते हैं. उन्हें खनिज लवण कहा जाता है। मानव शरीर में लगभग 24% खनिज लवण विद्यमान होते हैं। खनिज लवण हमारे शरीर का महत्व 4% भाग बनाते हैं, किंतु यह वृद्धि और विकास के लिए परम आवश्यक होते हैं। जिनमें कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम, सल्फेट, सोडियम, क्लोरीन,  मैग्नीशियम मुख्य खनिज लवण के अंतर्गत आते हैं। इसके साथ ही सूक्ष्म खनिज लवण के अंतर्गत लोहा, मैग्नीज, तांबा, आयोडीन, कोबाल्ट, क्लोरीन आदि को शामिल किया गया है।
  5. विटामिन (Vitamin) :-विटामिन कार्बनिक पदार्थ होते हैं, जो शरीर में भोज्य पदार्थों के द्वारा पहुंचते हैं। तथा अपनी उपस्थिति के कारण विभिन्न प्रकार की चयापचय क्रियाओं (Metabolic activities) में मदद करते हैं।तथा शारीरिक वृद्धि तथा विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विटामिन दो प्रकार के होते हैं, जल में घुलनशील विटामिन और वसा में घुलनशील विटामिन जल में घुलनशील विटामिन विटामिन बी (Vitamin-B) और विटामिन सी (Vitamine-C) होते हैं, जबकि वसा में घुलनशील विटामिन विटामिन ए (Vitamin-A) विटामिन डी (Vitamin-D) विटामिन ई (Vitamin-E) विटामिन के (Vitamin-K) होते हैं। यह सभी अस्थि, दातों, त्वचा, बाल, आंखों, संबंधी विभिन्न अंगों की क्रियाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए लाभदायक और महत्वपूर्ण सिद्ध होते हैं।
  6. जल Water :- जल जीवन के लिए बहुत ही आवश्यक है। ऑक्सीजन (O2) के बाद दूसरा पदार्थ जल ही है, जो हम सभी के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसके बिना जीवन की कल्पना तक नहीं की जा सकती। जल में कोई भी प्रकार के पौष्टिक आहार नहीं होते और ना ही यह हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं, किंतु जल शरीर में होने वाले विभिन्न प्रकार की चयापचय क्रिया में अपना योगदान देते हैं। जल का रासायनिक फार्मूला H2O होता है, जो हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के मिश्रण से बना होता है।

पोषण का महत्व Importence of Nutrition

प्रत्येक प्रकार के छोटे या बड़े जीवो में पोषण की क्रिया आवश्य होती है, क्योंकि इससे उन जीवों को कई कार्यों के लिए ऊर्जा मिलती है।

विभिन्न प्रकार के कार्य करने के लिए, रोगों से बचाव के लिए, ऊर्जा उत्पादन के लिए, शरीर की वृद्धि के लिए, आनुवांशिक लक्षणों की वंशागति के लिए, भोज्य पदार्थों को ग्रहण करके ऊर्जा प्राप्त करना पड़ता है,

जिनका शरीर में ऑक्सीकरण होता है और ऊर्जा मुक्त होती है, जिसका उपयोग वृद्धि विकास तथा कई दैनिक क्रियाओं में होता है। इसीलिए पोषण की आवश्यकता होती है, जो भी व्यक्ति या जीव पृथ्वी पर जन्म लेता है।

वह किसी न किसी रूप में अपना पोषण अवश्य करता है, क्योंकि पोषण ही जीवन का आधार (Base of life) है, और पोषण के अभाव में व्यक्ति या जीव की मृत्यु तुरंत हो जाती है।

पोषण से सभी जीवधारियों की वृद्धि और विकास होता है,उनका दिमाग का विकास होता हैं। यदि पोषण ठीक प्रकार से होता है, तो बीमारियों से लड़ने की शक्ति मिलती है और बार-बार लोग बीमार नहीं पड़ते।

पोषण से ही बार-बार बीमार होने से बचा जा सकता है और कुपोषण के दायरे से मुक्ति भी पाई जा सकती है। इसका असर सभी व्यक्तियों के जीवन पर देखने को मिलता है। अच्छे पोषण से शरीर हष्ट -पुष्ट बनता है,

उत्पादकता में बढ़ोत्तरी होती है, बच्चों की एकाग्रता बढ़ जाती है, उनका विकास ठीक से होता है और देश के विकास में योगदान होता है।

निष्कर्ष Conclusion

पोषण सभी जीवधारियों के लिए आवश्यक क्रिया है इसलिए सभी एककोशिकीय और बहुकोशिकीय जीवधारी पोषण करते है और अपना विकास करके अपने जैसी संतति को उत्पन्न करते है।

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