स्वास्तिक चिन्ह क्या है महत्व Svastik chinha kya hai 

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दोस्तों इस लेख के द्वारा आप स्वास्तिक चिन्ह क्या है महत्वके साथ स्वास्तिक चिन्ह की उत्पति, स्वास्तिक मन्त्र आदि जान पायेंगे। तो आइये शुरू करते है, यह लेख स्वास्तिक चिन्ह क्या है महत्व:-

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स्वास्तिक चिन्ह क्या है महत्व

स्वास्तिक चिन्ह क्या है Svastik chinha kya hai 

स्वास्तिक चिन्ह भारतीय संस्कृति और हिन्दू धर्म का एक पवित्र और मंगल कामना वाला चिन्ह होता है, जो भारतीय संस्कृति में लम्बे समय से ही मनुष्य के ह्रदय में वास करता है। स्वास्तिक का अर्थ ही होता है,

सभी का मंगल करने वाला या अच्छा करने वाला। इसलिए भारतीय संस्कृति में किसी भी व्यक्ति के घर पूजन, हवन या कोई भी शुभ कार्य धार्मिक अनुष्ठान होता है, तो स्वास्तिक चिन्ह को अवश्य बनाया जाता है,

तथा उसकी पूजा की जाती स्वास्तिक चिन्ह में चार भुजायें होती है, जो चारों दिशाओं में मंगल का प्रतीक है, ऋग्वेद में स्वास्तिक को सूर्य का प्रतीक माना गया है, धार्मिक व्यक्ति के सभी कार्य पूर्ण होते है, आनंद मंगल रहता है, तथा बधाएँ तथा कष्ट दूर हो जाते है।

स्वास्तिक चिन्ह क्या है महत्व


स्वास्तिक चिन्ह का अर्थ और उत्पति Svastik ka Meaning or Utpatti 

स्वास्तिक चिन्ह भारतीय संस्कृति और हिन्दू धर्म का एक धार्मिक चिन्ह है। ऋग्वेद में इसे सूर्य का प्रतीक भी कहा गया है। स्वास्तिक शब्द की उत्पत्ति सु+अस+क से हुई है, यहाँ सु का अर्थ मंगल या अच्छा होता है,

अस का अर्थ सत्ता या अस्तित्व और क का अर्थ होता है करने वाला इस प्रकार से स्वास्तिक चिन्ह का अर्थ मंगल करने वाला होता है।

स्वास्तिक चिन्ह में चार भुजाये होती है जिसका अर्थ चारों दिशाओं में मंगल करना होता है। हिन्दू धर्म में स्वास्तिक का बड़ा महत्व माना जाता है।

स्वास्तिक मन्त्र तथा स्वास्तिक प्रार्थना Svastik Mantra and Prayer 

स्वास्तिक मन्त्र का प्रयोग सभी प्रकार के शुभ कार्यों पर किया जाता है, कियोकि यह मन्त्र एक मंगलकारी मन्त्र होता है। जिसका अर्थ ही होता है, कल्याण करना। स्वास्तिक मन्त्र का उच्चारण करने से

तथा हाँथ में जल लेकर उसके छीटे डालने से क्रोध और वैर का नाश होता है, तथा शांति प्रेम और मंगल का आगमन होता है। स्वास्तिक मन्त्र का उच्चारण करना स्वास्तिवाचन कहते है।

स्वास्तिक मन्त्र Svastik Mantra 

ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः।
स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः।
स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु ॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

स्वास्तिक मन्त्र का जाप हल्दी से स्वास्तिक चिन्ह बनाकर किसी भी शुभ कार्य करने से पहले करते है तो वह कार्य अवश्य सफल होता है, नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है व्यक्ति नम्र और मृदु स्वभाव का बनता है।

स्वास्तिक चिन्ह का महत्त्व Importence of Svastik Chinha 

स्वास्तिक चिन्ह हिन्दु धर्म का एक पवित्र चिन्ह माना जाता है इसलिए इसको अन्य धर्मो जैसे कि जैन और बौद्ध धर्म में भी अपनाया गया है।

हिन्दु धर्म में स्वास्तिक चिन्ह को एक शुभकारक चिन्ह माना जाता है, इसलिए कोई भी शुभ कार्य होने पर स्वास्तिक चिन्ह बनाया जाता है, यज्ञ, हवन दैवीय अनुष्ठान आदि कई पवित्र आयोजनों पर स्वास्तिक चिन्ह का खास महत्व होता है।

स्वास्तिक चिन्ह में चार रेखाएँ होती है, जो चारों दिशाओं की और इंगित करती है, जबकि कुछ लोग इन्हें चार वेदों का प्रतीक तो कुछ ब्रम्हा के चार सिरों का प्रतीक मानते है।

स्वास्तिक चिन्ह घर के मुख्यद्वार पर बनाने से वास्तुदोष दूर होता है, घर में सुख - सम्पति आती है, चारों दिशाएँ शुद्ध हो जाती ह, जबकि काले रंग के स्वास्तिक से घर बुरी नजरों से बचता है

और व्यापार में लाभ के लिए उत्तर दिशा में हल्दी से स्वास्तिक चिन्ह बनाने से लाभ होता है। स्वास्तिक चिन्ह ठीक प्रकार से बना होने पर उससे सकारात्मक ऊर्जा निकलती है, जो व्यक्ति को रक्षा, बल बुद्धि प्रदान कर नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है।

दोस्तों आपने यहाँ पर स्वास्तिक चिन्ह क्या है महत्व (Svastik chinha kya hai) के साथ अन्य तथ्य पढ़े। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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