रसखान का जीवन परिचय एवं साहित्य रचना Raskhan ka jivan parichay

रसखान का जीवन परिचय एवं साहित्य रचना Raskhan ka jivan parichay 

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है इस लेख रसखान का जीवन परिचय एवं साहित्य रचना (Raskhan ka jivan parichay) में।

दोस्तों इस लेख के माध्यम से आप रसखान का जन्म कब हुआ, रसखान का साहित्य परिचय, रसखान का कला पक्ष और भाव पक्ष के बारे में पड़ेंगे। तो आइये शुरू करते है, यह लेख रसखान का जीवन परिचय एवं साहित्य रचना:-

रसखान का जीवन परिचय

रसखान का जन्म कब और कहाँ हुआ when and where raskhan born 

दोस्तों रसखान जो एक मुसलमान थे वे भगवान श्री कृष्ण के भक्तों में परम स्थान रखते है। भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से ही उन्होंने श्रीकृष्ण की कविताएँ, दोहे लिखने शुरू किये जिनमें वात्सल्य और श्रृंगार रस की प्रधानता है। ऐसे परम भक्त रसखान का वास्तविक नाम सैय्यद अब्राहम खान था,

जिनका जन्म 1548 में दिल्ली के आसपास के क्षेत्र में हुआ था। कुछ साहित्यकार रसखान का जन्म स्थान पिहानी को बताते है, किन्तु अब भी उनके जन्म स्थान के विषय में साहित्यकारों में मतभेद है।

रसखान के पिता का नाम गंनेखां था जो अपने एक मशहूर कवि के रूप में विख्यात थे। उन्हें खान की उपाधि भी मिली हुई थी, जबकि रसखान की माता का नाम मिश्री देवी था जो कि एक धार्मिक और समाज सेविका थी। कहा जाता है

रसखान को स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने बाल स्वरूप में दर्शन दिए थे, तभी से वे भक्ती मार्ग पर चल पड़े और ब्रन्दावन आ गए, जहाँ पर उन्होंने गोस्वामी विट्ठलनाथ से दीक्षा ली और प्रभु के भक्ति रस में गोते लगाते हुए कविताएँ लिखने लगे तभी से उनका नाम रसखान हो गया।

रसखान की रचनाएँ Composition of Raskhan 

रसखान कृष्ण भक्ति के कवि थे उन्होंने केवल भगवान कृष्ण की भक्ति में अपना तन मन खोखर भगवान कृष्ण की रचनाएँ कविताएँ लिखी हैं। रसखान ने प्रमुख रूप से दो ही रचनाएं लिखी हैं

जिनमें से एक है सुजान रसखान जिसमें भगवान श्री कृष्ण की भक्ति से युक्त दोहे, सोरठा, सैवये और कवित्त के 139 छंद है, जबकि दूसरी रचना प्रेमवाटिका है जिसमें भगवान कृष्ण की भक्ति और प्रेम को समर्पित 25 दोहे है।

रसखान का भाव पक्ष Raskhan ka Bhav Paksh 

हिन्दी साहित्य में कृष्ण भक्त और रीतिकालीन कवियों के रूप में रसखान को जाना जाता है। रसखान ने श्रृंगार रस को अपने काव्य में प्रधानता दी है, जिनके काव्य में भावपक्ष के अंतर्गत आलम्बन-निरूपण,नायिका-भेद, संचारी भाव, उद्दीपन विभाव आदि

मनोहारी वर्णन देखने को मिलता है। रसखान ने अपने काव्य में गोपियों और राधा को आलम्बन के रूप में चित्रित किया है, जबकि रसखान की प्रेम वाटिका में भगवान कृष्ण के मनोहारी रूप माली और राधा जी को मालिन के रूप में चित्रित कर प्रकृति प्रेम के अनुपम सौन्दर्य को दर्शाया है।

रसखान का कला पक्ष Raskhan ka Kala Paksh 

रसखान ने अपने काव्य में ब्रजभाषा का सहज़ और सरल रूप में प्रयोग किया है, उन्होंने अपनी भाषा में कई मुहावरों और छंद का रूप देने से उनके काव्य में मधुरता और सुंदरता के लक्षण साफ दिखाई देते है।

रसखान के काव्य में भक्ति और श्रृगांर दोनों रसों की प्रधानता देखने को मिलती है। रसखान कृष्ण भक्त हैं और प्रभु के सगुण और निर्गुण निराकार रूप के प्रति श्रद्धालु हैं उन्होंने सवैया, सोरठा, मुक्तक आदि छंदो का प्रयोग कर मुहावरों के प्रयोग से अपनी रचनाओं को अधिक सुंदरता प्रदान की है।

रसखान का साहित्य में स्थान Raskhan ka sahitya me sthan 

रसखान मुसलमान होकर भी भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य सेवक और भक्त थे, उन्होंने भक्ति के रस में भाव विभोर होकर भगवान श्रीकृष्ण से सम्बंधित दोहे लिखें है, जो आज भी मनुष्य को अपने भक्ति रस में पागल कर देते है। ऐसे भक्ति वत्सल कवि रसखान को हिंदी साहित्य में कृष्ण भक्त के रूप में हमेशा ही सम्मान प्राप्त होगा।

रसखान के दोहे Raskhan ke dohe 

देख्यो रुप अपार मोहन सुन्दर स्याम को !
वह ब्रज राजकुमार हिय जिय नैननि में बस्यो
मोहन छवि रसखानि लखि अब दृग अपने नाहि !
ऊँचे आबत धनुस से छुटे सर से जांहि !!
मो मन मानिक ले गयो चीते चोर नंदनंद !
अब बेमन मै क्या करू परि फेर के फंद !
अरी अनोखी बाम तू आई गौने नई !
बाहर धरसि न पाम है छलिया तुव ताक में !
प्रीतम नन्द किशोर जा दिन तै नेननि लग्यो !
मन पावन चितचोर पत्रक ओट नहि सहि सकौ
जोहन नन्द कुमार को गई नन्द के गेह !
मोहि देखि मुसिकाई के बरस्यो मेह स्नेह
काग के भाग बड़े सनती !
हरि हाथ सौ ले गयो माखन रोटी !!
प्रेम हरि को रूप है त्यों हरि प्रेमस्वरूप !
एक होई है यो लसे ज्यो सूरज औ धुप !

दोस्तों आपने इस लेख में रसखान का जीवन परिचय (Raskhan ka jivan parichay) एवं साहित्य रचना के साथ रसखानके दोहे पढ़े। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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