सूर्य नमस्कार के 12 आसन के नाम महत्व फायदे विधि Name 12 Poses of Surya Namaskar

सूर्य नमस्कार के 12 आसन के नाम Name 12 Poses of Surya Namaskar 

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख सूर्य नमस्कार के 12 आसन के नाम (Name 12 Poses of Surya Namaskar) में।

दोस्तों इस लेख में आप सूर्य नमस्कार क्या है? सूर्य नमस्कार का अर्थ, के साथ सूर्य नमस्कार के लाभ भी जान पायेंगे। तो आइये शुरू करते है, यह लेख सूर्य नमस्कार के 12 आसन के नाम:-

सूर्य नमस्कार के 12 आसन के नाम

सूर्य नमस्कार क्या है What is surya namaskar 

सूर्य नमस्कार एक प्राचीन योग पद्धति है। मनुष्य आदिकाल से रोगों से मुक्ति पाकर 100 वर्ष तक का जीवन पूरा करना चाहता है जिसके लिए उसे शारीरिक और मानसिक रूप से स्वास्थ्य रहना होगा इसलिए विभिन्न प्रकार की व्यायाम पद्धतियाँ प्रचलित हैं।

वर्तमान में भारतीय योग विज्ञान को विश्व में मानता प्रदान की है और करोड़ों लोगों ने इसको अपनाया है और लाभ भी उठाया है। योग विज्ञान में सूर्य नमस्कार का सबसे अधिक महत्व माना जाता है।

स्वयं योग गुरु स्वामी रामदेव ने भी कहा है, कि सूर्य नमस्कार सभी आसनों का राजा होता है। सूर्य नमस्कार भारतीयों के लिए पूर्व परिचित सर्वांग सुंदर व्यायाम है। वह शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पूर्वजों ने अनमोल धरोहर के रूप में बताया है।

सूर्य नमस्कार 7 आसनों की एक मल्लिका होती है, सूर्य नमस्कार करने से शरीर को स्थिरता प्राप्त होती है, वही शरीर सुंदर और रोग मुक्त बनता है। शरीर को मानसिक और शारीरिक सुख शांति प्राप्त होती है।

भारत के अलावा विश्व के कई लोगों ने सूर्य नमस्कार को सबसे महत्वपूर्ण आसन माना है और कहा है, यदि व्यक्ति नित्यप्रति सूर्य नमस्कार करता है, तो मनुष्य अवश्य ही निरोग और 100 वर्ष तक जीवित रहता है।

सूर्य नमस्कार के 12 आसन के नाम

सूर्य नमस्कार का अर्थ Meaning of Surya namaskar 

सूर्य नमस्कार को हम भगवान सूर्य की वंदना करना कहते हैं, जो एक प्राचीन व्यायाम पद्धति है और यह सुबह-सुबह पूर्व दिशा में खड़े होकर शांत मन से भगवान सूर्यनारायण की स्तुति करते-करते की जाती है।

साधारण भाषा में हम कहें, कि सूर्य नमस्कार का अर्थ भगवान सूर्य की वंदन करना होता है, जिससे हमें असीम सुख शांति और स्वास्थ्य लाभ की प्राप्ति होती है।


सूर्य नमस्कार के 12 आसन के नाम Name of 12 poses of surya namaskar 

सूर्य नमस्कार के कुल 12 आसन हैं, जिनमें से कुछ आसान दो बार भी रिपीट होते हैं। यहां पर सूर्य नमस्कार के 12 आसनों के नाम निम्न प्रकार से बताए गए हैं:-

  • 1.नमस्कारासन

दक्षासन की स्थिति में खड़े रहते हुए दोनों हाथों को इस प्रकार जोड़ते हैं, कि अंगूठे सीने को स्पर्श करें और सीना बाहर की ओर निकला हुआ रहे, जबकि पेट अंदर की ओर धंसा होना चाहिए, ऐसी स्थिति में स्वाँस अंदर खींचते हैं और फेफड़े फूल जाते हैं, जबकि दृष्टि सामने की ओर होनी चाहिए। शरीर गर्दन और सिर तीनों एक सीध में तने रहते हैं अब मुंह बंद करके स्वास को अंदर जितनी खींच सके उतनी खींचते हैं और शरीर के अंदर ही रखते हैं।

  • 2. पूर्वोत्तानासन

अब नमस्कारासन की मुद्रा से दोनों हाथों को ऊपर उठाकर पूरे शरीर को पीछे की ओर खींच देते हैं। आंखें खुली हुई आकाश की ओर रहती हैं, जितना संभव होता है, ऐसी स्थिति में हाथों को शरीर के पीछे की ओर खींचते हुए झुकाते हैं, साथ-साथ सीने को भी झुकाते हैं और सामने की ओर निकालते हैं।

  • 3. हस्तपादासन

इस स्थिति में पर्वतासन की मुद्रा में दोनों हाथों को सीधा रखते हुए धीरे-धीरे नीचे सामने की ओर झुकाते हैं, शरीर व हाथों को सामने की ओर नीचे झुकाते समय घुटने बिल्कुल सीधे रहते हैं। अब दोनों हाथों की हथेलियों को इस प्रकार जमाते हैं, कि हाथ की उंगलियाँ एक दूसरे को स्पर्श करें। दोनों हाथ पैरों को समानांतर रखें अब ललाट को घुटनों से स्पर्श कराकर नाक से ध्वनि युक्त सांस लेते हैं।

  • 4. एक पाद प्रसरणासन

हस्तपादासन में रहते हुए दाया वाला पैर को पीछे की ओर ले जाते हैं और ऐसी स्थिति में पैर का घुटना और उंगलियाँ फर्श को स्पर्श करते हैं। बाएं पैर के घुटने को बाई बगल के आगे लाते हैं। इस क्रिया में पैर अच्छी तरह दबाना चाहिए और सिर को ऊपर उठाकर जितना अधिक ऊपर की ओर देख सकें उतना ऊपर की ओर देखते रहना चाहिए, जबकि कमर को झुकाना चाहिए और श्वास को रोककर रखना चाहिए।

  • 5. पर्वतासन

ऐसी स्थिति में आगे दोनों हाथों को वही भूमि पर टिका कर ही दूसरा पैर अर्थात बाएं पैर को पीछे दाएं पैर के साथ ले जाकर दोनों पैरों को जमा देते हैं। इसमें सिर और शरीर का पिछला भाग कोहनियाँ तीनों एक सीध में तने हुए रहते हैं, पूरा शरीर का वजन दोनों हथेलियों और दोनों पैरों के पंजे पर रखा होता है।

  • 6. अष्टांग प्राणीपादासन

इसमें पर्वतासन से आगे चलते हुए दोनों पैरों को धीरे-धीरे पीछे की ओर ले जाते हुए दोनों घुटने फर्श पर टिकाते हैं। सीने को फर्श से स्पर्श कराते हैं, और नाक को फर्श से स्पर्श कर आते हैं। पेट को भीतर खींचते हैं, सीना दोनों हाथों के बीच रखते हैं।

  • 7. भुजंगासन

अष्टांग प्राणीपादासन से आगे चलते हुए दोनों जांघों व घुटनों को फर्श पर टिका देते हैं और दोनों हथेलियों पर शरीर को ऊपर उठाते हैं। जबकि आगे की ओर जाते हुए कमर को अधिक से अधिक गोलाकार में उठाते हैं तथा जितना संभव होता है, ऊपर की ओर देखते हैं अर्थात भुजंग की तरह यह आसन होता है।

इस आसन के पश्चात फिर से पर्वतासन एक पाद प्रसरणासन हस्तपादासन पूर्वोत्तासन और नमस्कार आसान किया जाता है। 


सूर्य नमस्कार का लाभ Benefits of surya namaskar 

क्रीड़ा भारती ने सूर्य नमस्कार से होने वाले लाभों का वैज्ञानिक और व्यवस्थित अध्ययन किया है। उन्होंने बताया कि इसको नियमित करने से विद्यार्थियों की स्मरण शक्ति तो बढ़ ही जाती है, साथ में खिलाड़ियों का प्रदर्शन भी बेहतर होने लगता है।

इसके अनेक फायदे विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के द्वारा बताए गए हैं। सूर्य नमस्कार शारीरिक मानसिक बौद्धिक और आत्मिक बल प्रदान करता है। प्रतिदिन आराधना के भाव से सूर्य नमस्कार करने से अनेक लाभ होते हैं।

जीवन दीर्घायु बनता है, बुढ़ापा नहीं सताता है, शरीर स्वस्थ रहता है, स्नायु तंत्र, पाचन तंत्र, रक्त तंत्र, श्वसन तंत्र आदि में विभिन्न प्रकार के विकार दूर होने लगते हैं। ग्रंथियों में शक्ति का संचार होता है, प्राणों को सशक्त बनाया जाता है। मन एकाग्र चित्त रहता है, आत्मविश्वास बढ़ता है, नेत्र की ज्योति बढ़ जाती है

और अनावश्यक चर्बी कम होने लगती है। सूर्य नमस्कार स्त्रियों के लिए भी अत्यंत लाभकारी होता है। सूर्य नमस्कार करने से व्यक्ति सब कुछ भूल कर शरीर को हल्का अनुभव करता है, इसीलिए व्यक्ति को निष्ठा और श्रद्धा के भाव से नमस्कार करना चाहिए यह जाति धर्म पंथ इत्यादि के बंधन से मुक्त है।

दोस्तों आपने यहाँ पर सूर्य नमस्कार के 12 आसन के नाम (Name 12 Poses of Surya Namaskar) के साथ अन्य तथ्य पड़े। आशा करता हुँ आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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